धून्ध है चारों तरफ़ रास्ते की खबर नहीं जाऊँ तो जाऊँ कहाँ आती मंजिल नज़र नहीं । फिक्र अब कहाँ ये जहाँ मिलें निन्द है कहाँ जो स्वप्न नया खिले बढ सकूँ जहाँ कोई ऐसी […]

हम उस मुकाम पर है जहाँ जिम्मेदारियां सर चढ़ बोलती हैं काम के बोझ तले दबी जिन्दगी, नयी चीजों को सीखने की प्रवृत्ति उदासीन होती है पर मेरी उत्कंठा नित नयी चीजों को सीखने की […]

गर पढ़ते हो जिस्म मेरा तो सुन लो क्या तुम इस लायक हो! दर्द दिया करते हो मुझको चैन नहीं आने देते पढ़ते हो बस रूप मेरा कभी रूह में क्यों नहीं झांकते ! हाँ, […]

अरे ओ रोशनी क्यों टिमटिमाती हो, क्यों इस तरह से दर्द में खुद को रुलाती हो। समझ लो तुम स्वयं को एक अदभुत शक्ति हो मत रहो दुविधा में तुम तो वाकई में शक्ति हो। […]

जो बंदे बकरा-मुर्गा काट छौंककर खाते हैं वो मानुष भगवान के घर में उल्टा लटकाए जाते हैं निर्जीवों का तो इस जग में कोई मान नहीं क्या जीवित जीवों में भी कोई जान नहीं ? […]

वो छोटे-छोटे मासूम से थे कमरे में मेरे बैठे थे मैं गई रात को देर से थी उस समय थोड़ी-सी सर्दी थी फिर देखा मैंने उनको तो मन में हमदर्दी जाग उठी वह सिकुडे़-सिकुड़े बैठे […]

मन कभी छोटा न करना दैव पर विश्वास रखना, गर कभी मुश्किल समय हो टूटना मत धैर्य रखना। जिन्दगी में मुश्किलें लाखों मिलेंगी आपको, मुश्किलों में, ठोस बनकर झेल लेना धैर्य रखना। गर कभी आंखों […]

रात अंधियारी थी उसमें चाँद सी तुम साथ थी, साँस उलझन में भरी थी, क्या पता क्या बात थी। चाहते थे खूब कहना बोल पाये थे नहीं, अश्क आये थे उमड़ हम रोक पाये थे […]

मैं पैदा हुआ तो था कुछ अजीब फूटा हुआ था मेरा नसीब शंकर-पार्वती का मिश्रित रूप हूँ मैं चुप रहो अर्धनारीश्वर हूँ मैं बचपन से ही मेरे साथ भेदभाव होता था शीशे को देखकर मुस्कुराता […]

वो उठा ले झाडू तो सबकी शामत आ जाती है मेरे पूरे दिन की मेहनत ना रास किसी को आती है हाथ में उसके पानी पकड़ाओ तब वो मैडम पीती हैं उम्र में हैं मुझसे […]

यूं नजरों से ना देख मुझे रूह में झांक कभी मैं क्या हूँ उसका परिचय तू पाएगा तभी रूप तो मेरा उजला-उजला बस दिल थोड़ा-सा काला है बता रही हूँ तुझको नजरों से क्योंकि तू […]

सब मुझे देख रहे थे ऐसे जैसे मैं कोई चीज बिकाऊ कुर्सी, मेज खरीदने जैसे वो कर रहे थे भाव-ताव क्या मेरा कोई स्वाभिमान नहीं क्या मैं कोई इंसान नहीं लड़कियों का इस देश में […]

सब मुझे देख रहे थे ऐसे जैसे मैं कोई चीज बिकाऊ कुर्सी, मेज खरीदने जैसे वो कर रहे थे भाव-ताव क्या मेरा कोई स्वाभिमान नहीं क्या मैं कोई इंसान नहीं लड़कियों का इस देश में […]

चलो एक नये कोने की तलाश करें उदासियो को हटा, सोंच में बदलाव करें । खुद को नये सिरे से गढ़े अबतक खुद के लिए जीते रहे अपने लिए त्योहार मनाते चले अब एक नयी […]

मैं हमेशा दुःख से कतराती रही, इसे दुत्कारती रही मगर ये दुःख हमेशा ही मिला है मुझसे बाहें पसारे…!! मैं भटकती रही चेहरे दर चेहरे सुख की तलाश में… और वो हमेशा रहा एक परछाई […]

माँ मुझे बुला लो कुछ दिन अपने पास यहाँ कुछ भी अच्छा नहीं लगता प्यार तो सब करते हैं पर फिर भी कुछ नहीं जचता गोल-गोल रोटियां बनाकर तू मुझे जबरदस्ती खिलाती थी बुरा लगता […]

कविता- डॉक्टर साहब ——————————- देखिए डॉक्टर साहब जी, बेटा क्यों अब रोता हैं| रात अंधेरी काले बादल, रिमझिम बरसा पानी था, हाय पिताजी प्रेम तुम्हारा, कितना अद्भुत अच्छा था, देखा हमकों रोतें जैसे, रख कंधे […]

प्यार दूर की बात सम्मान कभी सपने में भी ना सोचूं तुम तो देखने से भी कतराए देख कर नज़र फेर ली फिर कहते हो मेरी दुआओं मे बड़ी ताकत हैं जल्दी कबूल हो जाती […]

कविता-खिलौना मत बनाना ————————————– हे कुम्हार, मत बना खिलौना हमें, जमाना खेलें , तोड़ के, मिटा दे मेरी हस्ती को, बेचे किसी बाजार में, कोई खरीदें मुझे, बाजार की सबसे सस्ती वस्तु समझ, मिट्टी से […]

बच्चों का मंगल मनाती, आई अहोई-अष्टमी चांदी के मनकों की, मां, मंजुल माला पहनती मां दिन भर व्रत है करती चांदी के मोती-मनके पिरोकर बच्चों की शुभ-कामना करती हलवा-पूरी का भोग बनाकर, अहोई माता की […]

जीवन में बुलन्दियों को छूना है अगर कुछ कर दिखाने का दिल में,जुनून होना चाहिए दामन को रखिए दूर ,दलदलों से पाप की शालीनता और स्वच्छता को ,जीवन में होना चाहिए || अधिकार गर समान […]

सात रंग की किरणें लेकर, सूर्य-देव का रथ आया सूर्य-रश्मि की सौगात लेकर, रौशन करता पथ लाया नई आशाएं लाता है प्रतिदिन, जीवन कुछ नहीं,आशा के बिन आशा पर ही दुनियां अडिग है, ये सुखद […]

कहीं दीप जले तो कहीं , गरीब के घर में चूल्हा न जले। हम खुशियाँ मनाते रहे और वो, अंधेरे में माचिस खोजते रहे।। कहीं दीपावली की धूम तो कहीं पापी पेट में भूख की […]

अश्क जो बहे नयनों से लुढ़के गालों पे मेरे किसी ने ही देखे अनदेखे ही हुऐ अश्क जो अटके गले में गटके हर सांस में ना देखे किसी ने अनदेखे ही रहे तोड़े मुझे हर […]

हर बात की आखिर इक हद होती है सच लगता था कभी झूठ आज साबित हुआ अँधेरे में थी जिंदगी उजाले पर काबिज हुआ भविष्य देखने का दावा अब तो खोखला पड़ा जिसकी हथेली थी […]

हम आदतों से अब बाज आने लगे तुमसे दूरियां बनाने लगे रोया करते थे रात भर तुम्हें याद करते हुए अब हम अपने आँसू छुपाने लगे सिसकियां अब कमरे में ही बंद रहती हैं बाहर […]

एक ही तो खिड़की थी जिससे दीदार हो जाता था खिड़की खोलने-बंद करने में ही इजहार हो जाता था आज वो भी बंद कर दी तुमने.! अब वो हंसी नजारे कैसे होंगे ? भेजा करते […]

चाँद ने गोद में जाकर हिमालय की बिछाया बिस्तर सोने के लिए तभी एक टिमटिमाता तारा आकर रोने लगा कहने लगा ऐ चाँद ! आज कोई तेरा इन्तजार कर रहा है भूखा प्यासा रहकर उपवास […]

किसने कहा कि, बेटी पराई है ये वो शख्सियत है, इस दुनियां की जो मायके और ससुराल, दोनों जगह ही छाई है ससुराल में सब कहें, क्या रौनक लगी है, देखो, घर में बहू आई […]

हाथों में मेंहदी खूब रचाई है लाल चूनर से सिर की शोभा बढ़ाई है शादी का लहंगा-चूड़ी पहनकर माथे पर सिंदूर की लम्बी रेखा बनाई है चमकती बिंदी और लाली से घर में फैली है […]

कविता- गुड मॉर्निंग भेजा ———————————- गुड मॉर्निंग भेजा, हमकों एकSMS मिला, क्षण भर हम ठहर गए थें, हाय कोरोना तेरे कारण भूल गए थें, अपने सभी बिछड़ गए थें, जब से आया कोरोना हैं, याद […]

आज सजूं साजन की खातिर, ओढ़ के सुर्ख चुनरिया हाथों में मेंहदी पिया नाम की, पहनूं लाल चूड़ियां माथे पर बिंदी चमके सदा, साजन तेरे नाम की तेरी हो गई साजन मैं तो, जबसे बाहें […]

आज ,अखण्ड सौभाग्यवती का माँ उमा से है वर पाना ऐ चाँद, तुम जल्दी आ जाना || आज पिया के लिये है सजना संवरना अमर रहे सदा मेरा सजना ऐसा वर तुम देते जाना ऐ […]

उठ जा लाडो सरगी लेकर तेरी सासु अम्मा आई है। हाथ दिखाओ मेंहदीवाली कित प्रीत पिया की पाई है।। पहिला रंग पिया का प्यार । दूजा सास-ससुर का लाड़।। तीजे गण गौरी की भक्ति बीच […]

यूँ हीं बैशाखी चली गई बिन भंगरा बिन गिद्दा के। फीके सारे पर्व पर गए बिना खीर -मलिद्दा के।। लाॅकडाउन ने खाया सब हम क्या खाऊँ मुँह को बांध। धूंधली रह गई रात पूनम की […]

अब और नहीं कर देर देखो फैला कैसा अंधेर और नहीं भटकाओ अविलंब चले आओ । उम्मीद की कोई पून्ज नहीं डगर कहाँ, जहाँ तेरी गुन्ज नहीं विश्वास की डोर बढ़ा जाओ अविलंब चले आओ […]

शस्त्र उठा लो अब सीते, श्री राम नहीं आएंगे करनी होगी खुद अपनी रक्षा, श्री रघुनाथ नहीं आएंगे शस्त्र उठा लो हे द्रौपदी, श्री श्याम नहीं आएंगे सभा में अपने भी,अपने ना रहे बिगुल बजा, […]

सोंच समझकर कदम बढ़ाओ राह बहुत पथरीली है। साथी मीठे सुर गुंजाओ, दुनियाँ तो जहरीली है।। ख़ुशी परायी देख ख़ुशी से किसका हृदय मचलता है। कौन हृदय है जिसके भीतर प्रेम- पपीहा पलता है। बिना […]

मेरा नाम बाबूजी ने, बड़े लाड से रखा था बेला…… मेरे जन्म पर एक पौधा भी रोपा था, बेला का….. बेला के फूल की तरह, खिलती रही, बढ़ती रही यौवन की दहलीज चढ़ती रही, बेला […]

अजीब है यह दुनिया जिनोंहने बात बैर की की, लोगों को बाटने की की बात वह राम राज्य की करते है जिनके बिरियानी खा कर हम लखनऊ की नवाबी ठाठ के गुण गाते है बात […]

कविता-अपनी भूख मिटाने के लिए ——————————————— भूख मिटाने के लिये, परिवार चलाने के लिए, लेबर चौराहे पर जाते हैं, आतें हैं मालिक कई मजदूरी की मोल भाव करते हैं | मजदूरी मिलती ना, गाली मिल […]

झरने झर-झर बह रहे थे, समीर के शोर कुछ कह रहे थे कितना आनन्द आता होगा उन्हें, जो यहां पे रह रहे थे ये सोचती-सोचती मैं चली जा रही थी, वहीं कहीं अंदर को, एक […]

बदनाम हो गये ———————— बदनाम हो गये जमाने के नजरों में, वजूद खो दिया खुद का उसे मनाने में, इल्जाम लगता है इसे कोई और मिल गई, क्या पता उसे – रोते-रोते मेरी जिंदगी खाक […]

वो हुनर में हमारी बराबरी करने चले थे अरे ! वो नासमझ हैं ये क्या करने चले थे हमने तो तबाह कर दिया खुद को मोहब्बत में तब जाकर लिखना आया है वो तो जल्दबाजी […]

उनका नंबर भी है और मुलाकात के सिलसिले भी होते रहते हैं मुकद्दर ऐसा है हम फिर भी रोते रहते हैं बात सदियों से नहीं हुई उनसे ना हम उनकी तरफ देखते हैं आ भी […]

जो कर सकता है उसने उनकी मदद करनी ही होगी, जो कड़कड़ाती ठंड में भी खुले में सोते हैं। छोटे छोटे बच्चे ठिठुरते हैं तो भीतर ही भीतर रोते हैं। आने वाला है ठंड का […]

मैं थककर चूर थी जा बिस्तर पर लेटी थी साँसें तेज थीं बदन में अकड़न थी आँखें अधखुली थीं शायद नींद थी कुछ पुरानी-सी यादें कर रही बेचैन थी वो बहुत देर से देख रहा […]

बीत गईं लाखों शामें पर ना भूली वो रात अभी तक | तुमने छोंड़ दिया था जिस पथ पर मैं बैठी हूँ उस राह अभी तक | तुम हो धड़कन तुम ही हो दिल मेरा […]