एक मां की अरदास

इक अरदास करूं तुमसे प्रभू !
मैं रो लूंगी भाग्य को अपने,
हर दुःख को चुप्पी से सह लुंगी।
बना देना मुझे निर्भया की मां,
दिल को अपने समझा लुंगी।
मगर न बनाना मुझे,
बलात्कारी की जननी,
मैं खुद को आग लगा लुंगी।


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22 Comments

  1. Geeta kumari - September 30, 2020, 3:46 pm

    आपने बहुत सुन्दर लिखा है प्रतिमा जी आपकी भावनाओं का सम्मान करती हूं कि एक बलात्कारी कि मां कभी नहीं बनना चाहेंगी ,किंतु भगवान से प्रार्थना है कि कोई भी औरत निर्भया की मां भी ना बने कभी भी नहीं । पूरी कोशिश रहेगी कि और निर्भया नहीं ना ही निर्भया की मां बने कोई ….OH MY GOD, PLEASE NO MORE NIRBHAYA.

    • प्रतिमा चौधरी - September 30, 2020, 4:47 pm

      बहुत बहुत आभार गीता मैम सुंदर समीक्षा के लिए
      आपकी बात से मैं बिल्कुल सहमत हूं ,
      बहुत ही बुरा लगता है जब जब ऐसी संवेदनशील एवं क्रुर घटनाएं
      हमारे देश में घटित होती है ,हृदय भर आता है

  2. Priyanka Kohli - September 30, 2020, 5:48 pm

    Nice

  3. Pushpendra Kumar - September 30, 2020, 6:08 pm

    बहुत सुंदर विचार है आपका

  4. Neetu Mishra - September 30, 2020, 6:09 pm

    Sabdon k moti kaafi aakarshak hai

  5. प्रतिमा चौधरी - September 30, 2020, 6:58 pm

    Thank you

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 30, 2020, 7:44 pm

    मार्मिक

  7. Aditya Kumar - September 30, 2020, 9:09 pm

    अति मार्मिक। निशब्द

  8. मोहन सिंह मानुष - September 30, 2020, 9:29 pm

    बहुत ही उम्दा रचना
    मार्मिक भाव

  9. akash choudhary - September 30, 2020, 10:25 pm

    Nice lines

  10. Anonymous - September 30, 2020, 11:25 pm

    बहोत ही सुंदर कविता लिखी है आपने यह.👍

  11. Siya Chauhan - September 30, 2020, 11:49 pm

    Very nice

  12. Suman Kumari - October 1, 2020, 7:28 pm

    अत्यन्त मार्मिक

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