कार्य हमारे मन के

कार्य हमारे मन के
अनुरूप हो
थोङी सी छाया
ना सिर्फ धूप हो।
हम सही मायने में
कार्य उसे ही कहेंगे
जिससे कोई
सकारात्मक
परिणाम का
आभास मिलें ।
हमारे कार्य का
एक मकसद हो
हमारा यह मकसद
हमारे ह्रदय को
अथाह आनंद से
सराबोर कर दे।
कर्म वही करें
जो मन से पसंद हो
वरना हमारे काम
जेल में कैदियों से
कराये गये कार्य के
समरूप हो ।


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4 Comments

  1. Satish Pandey - January 16, 2021, 10:19 pm

    बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति

  2. Suman Kumari - January 16, 2021, 10:28 pm

    सादर धन्यवाद सतीश जी

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 17, 2021, 7:36 am

    बहुत खूब

  4. Geeta kumari - January 17, 2021, 9:28 am

    सुन्दर अभिव्यक्ति

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