कालेज का नियम

मुक्तक- कालेज का नियम
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अनजाने से पथ पर,
एक अनजाने से पहचान हुई,
दो दुनिया के थे दोनों,
मानों अंबर का मिलन धरती से हुई|

देखा उसको पहली बार,
भूल गया खुद होशो हवास,
सारी खुशियां संग संग थी,
पपीहा बन देख रहा-
अब स्वाति बरसे तो बुझती प्यास|

एक मिनट दो मिनट,
बीत गये चालीस मिनट,
टीचर आये चले गए,
भुल गया कालेज का नियम|
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***✍ऋषि कुमार “प्रभाकर”—–


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3 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 12, 2020, 8:03 am

    बहुत खूब

  2. Suman Kumari - October 12, 2020, 12:11 pm

    सुन्दर

  3. Geeta kumari - October 12, 2020, 5:04 pm

    सुन्दर प्रस्तुतीकरण

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