कैशलेस

कैशलेस होने में हर्ज क्या है?
फिर सोचा ये मर्ज क्या है?
गौर किया तो कुछ तस्वीर यूँ उभरी।
मेरे घर आने वाली वो अनजान वृद्धा ,
बाला जी से तानपूरा लेआने वालेभक्त।
वो कभी कभी अँधे का हाथ पकड चलने वाली औरत।
वो जबान ना होने से आव आव का शोर मचा ,
अपनी व्यथा कहने वाला मूक युवक।
पीर बाबा की चद्दर चढाने अजमेर शरीफ जाने वाले।
वो नाच गा पेट पालने वाले किन्नर।
आती ही रहती है कोई ना कोई व्यथित चिंतित आत्मा,
मै कैसलेस होकर कैसे करूँगी उनका सामना,
आशा की इक चमक जो दिखती है उनकी आँखों में,
मै कैसे कहूँगी उन्हें पेटीएम कर दूँ,या
स्विप मशीन है ला कार्ड स्वीप कर दूँ।
और कहीं ना दे पाऊँ उन्हें कुछ संतोष,
फिर कभी कहीं कोई कर ले अकाउँट हैक ,
चला जाए गलत खाते में सारा कैश,
फिर सोचूँ कहीं उनकी हाय तो नहीं लगी।
जिनको दे नहीं पाई थी उनका देय।
क्योंकि हो गयी थी मै कैशलेस।
क्या है प्रयाप्त सुदृढ तंत्र हमारे पास,
या नोट बंदी सा होगा इसका भी.हाल।
क्योंकि साईबर क्राइम के खतरे बढे हैं।
खडे खडे ही लोगों के अकाउँट हो जाते हैक,
सोच समझ कर इस मुहिम में कदम बढाना,
छोटी छोटी छूट के लालच में मत सब गँवाना,
पता चले धर्म कर्म से तो गये ही जनाब,
खाते का पैसा भी गलती से चला गया कहीं ओर।
खून पसीने की कमाई एक पल में गायब हो जाएगी।
अब कोर्ट.कचहरी के चक्कर में जिन्दगी जाएगी।
कमाई मिलेगी वापिस या नहीं कोई गारंटी नहीं ,
क्योंकी कोर्ट से न्याय कम,तारीख ज्यादा मिलती हैं।
कैशलेस सच में बडी मुसीबत ही लगती है।
सरकार की तैयारी आधी अधूरी दिखती है।

सावित्री राणा।

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