खामख्वाह वो अपने अंदाज़

खामख्वाह वो अपने अंदाज़ सितम के बदलते है
पुराने अंदाज़ भी सितम के कम लाज़वाब न थे
राजेश’अरमान’

 

Related Articles

फेल रिजल्ट

कविता -फेल रिजल्ट —————————- आज सारे, ख्वाब टूट गए, कभी सोचते थें, जो बैठ टहल कर, वो आज सारे ख्वाब टूट गए, मत भरोसा करो,…

ना समझ संतान

कहानी-ना समझ संतान पैतृक संपत्ति से कुशल किसान रहता था, अनेक पशुओं तथा कृषि यंत्रों के साथ एक सुनहरे भवन का मालिक था, किसान के…

Responses

New Report

Close