जिसे भी देखा दौड़ता मिला

डगर पर जो भी मिला
वह दौड़ता भागता मिला
ज़िंदगी जिसकी भी मिली
उससे पुराना वास्ता मिला
जब भी शाम होते घर गया
दर्देदिल ही जागता मिला|
बीते साल की तरह फिर
नए साल का सुबह मिला
सर पर यूं चढ़ सा बोला
ज़िंदगी में डांटता मिला |
मुक्तक -व्यवस्था और जन- जन जब जागेगा
वर्षों की जमी मैल सब भी काटेगा |
-सुखमंगल सिंह ,अवध निवासी

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8 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - November 3, 2019, 9:42 am

    Nice

  2. Astrology class - November 3, 2019, 12:32 pm

    Nice

  3. देवेश साखरे 'देव' - November 3, 2019, 3:07 pm

    सुन्दर

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - November 3, 2019, 8:40 pm

    वाह बहुत सुंदर

  5. nitu kandera - November 4, 2019, 7:25 am

    wah

  6. Kanchan Dwivedi - November 4, 2019, 3:50 pm

    सुन्दर रचना

  7. राही अंजाना - November 4, 2019, 10:10 pm

    Wah

  8. राही अंजाना - November 5, 2019, 3:04 pm

    Wah

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