जिसे भी देखा दौड़ता मिला

डगर पर जो भी मिला
वह दौड़ता भागता मिला
ज़िंदगी जिसकी भी मिली
उससे पुराना वास्ता मिला
जब भी शाम होते घर गया
दर्देदिल ही जागता मिला|
बीते साल की तरह फिर
नए साल का सुबह मिला
सर पर यूं चढ़ सा बोला
ज़िंदगी में डांटता मिला |
मुक्तक -व्यवस्था और जन- जन जब जागेगा
वर्षों की जमी मैल सब भी काटेगा |
-सुखमंगल सिंह ,अवध निवासी


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13 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - November 3, 2019, 9:42 am

    Nice

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 3, 2019, 12:32 pm

    Nice

  3. देवेश साखरे 'देव' - November 3, 2019, 3:07 pm

    सुन्दर

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - November 3, 2019, 8:40 pm

    वाह बहुत सुंदर

    • Sukhmangal - November 15, 2019, 5:02 am

      हार्दिक स्वागत ,आदरणीय महेश गुप्ता जौनपुरीजी

  5. nitu kandera - November 4, 2019, 7:25 am

    wah

  6. Kanchan Dwivedi - November 4, 2019, 3:50 pm

    सुन्दर रचना

    • Sukhmangal - November 15, 2019, 5:06 am

      रचनाकार के मनोबल बढ़ाने में मदद कीं ,हार्दिक आभार Kanchan Dwivediजी आभार

  7. राही अंजाना - November 4, 2019, 10:10 pm

    Wah

    • Sukhmangal - November 15, 2019, 5:07 am

      हार्दिक अभिनंदन आभार आदरणीय राही अंजाना जी

  8. राही अंजाना - November 5, 2019, 3:04 pm

    Wah

  9. Abhishek kumar - November 24, 2019, 11:45 pm

    वाह

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