तेरी आवाज है जो हरदम सुनाई देती है

तेरी आवाज है जो हरदम सुनाई देती है
इक तेरा ही तो अक्स है जो हर जगह दिखता है मुझे
कहां मैं तुझे मिल पाऊंगी कभी
किस्मत पै भरोसा अब कहां है मुझे

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

इस बार

सोचती हूँ, क्या इस बार तुम्हारे आने पर पहले सा आलिंगन कर पाऊँगी या तुम्हें इतने दिनों बाद देख ख़ुशी से झूम जाउंगी चेहरे पे…

Responses

New Report

Close