नटखट, ओ लल्ला मोरे

नटखट, ओ लल्ला मोरे तू काहें मोहे खिझायों।
संग सखा तू पुनि-पुनि मटकी पर नज़र लगायो।।
सब ग्वालन से मिलकर झटपट माखन खायो।
नटखट ओ लल्ला मोरे तू काहें मोहे खिझायों।।

मैया, ओ प्यारी मैया मैं मन को न रोक पायो।
मटकी में माखन देख जी ललचाओ।।
तू तो जानत हैं मोहे माखन बहुत सुहायो।

नटखट कान्हा मोरे, तिन्ही सकल हृदय में बस जायो।
तोरी मधुर बोली मोरे कानों को अति सुहायो।।
मनमोहक रूप को देख मोरे नयन तोहे निहारत जायो।
अद्भुत अखियन तिन्ही पाई, देखत ही इन कमल नयनों को इन्हीं में संसार खो जायो।।
झील-सी इन अखियन में तोरी मैया सुध भूल जायो।
इहि खातिर यर मैया तोरी तोहे खुल के न डाट पायो।।
ओ लल्ला, ओ कान्हा मोरे तू काहें मोहे खिझायों।।


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13 Comments

  1. Shiwani Maurya - August 8, 2020, 1:52 pm

    जिन्हें भी पसंद आये
    Like, comment जरूर करे।

  2. Chandrika maurya - August 8, 2020, 1:59 pm

    Very nice poem.
    Good keep it up.
    👌👌

  3. Geeta kumari - August 8, 2020, 2:02 pm

    सुंदर भाव

  4. New Charms - August 8, 2020, 2:27 pm

    Wow these lines are too good…

  5. New Charms - August 8, 2020, 2:28 pm

    Looking forward to get more such things from you!!

  6. मोहन सिंह मानुष - August 8, 2020, 5:25 pm

    बेहतरीन

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 8, 2020, 8:56 pm

    अच्छी रचना

  8. Sofi Maurya - August 9, 2020, 8:04 pm

    Very nice poem❤❤

  9. Devansh Maurya - August 9, 2020, 9:00 pm

    Good Nice lines Keep it up👌🏻👏

  10. Devansh Maurya - August 9, 2020, 9:00 pm

    Impressive!!

  11. Mandrika Maurya - August 10, 2020, 8:19 pm

    ʘ‿ʘ So cool🤩

  12. Chandrika maurya - August 10, 2020, 8:52 pm

    बेहद सुंदर रचना है।

  13. Chandrika maurya - August 10, 2020, 9:07 pm

    इस रचना से श्री कृष्ण के बाल युग का सलोनापन दिखाई देता है।

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