पौष पूर्णिमा के चंद्र

पौष पूर्णिमा के चंद्र देखो,
नभ में कैसे चमक रहे हैं।
सर्द रातों में चांदनी सहित,
देखो ना कैसे दमक रहे हैं।
चांदनी भी ठंड में सिमटी सी जाए,
चंद्र उसको देख-देख मुस्काएं।
यह ठंड का असर है या हया है,
ये तो चांदनी ही बतला पाए।
चंद्र रीझे जाते हैं अपनी चांदनी पर,
चांदनी भी इठलाती जाए।।
____✍️गीता


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10 Comments

  1. Chandra Pandey - January 28, 2021, 11:29 pm

    Very nice

  2. vivek singhal - January 28, 2021, 11:52 pm

    Good

  3. Satish Pandey - January 29, 2021, 9:32 am

    पौष पूर्णिमा के चंद्र देखो,
    नभ में कैसे चमक रहे हैं।
    सर्द रातों में चांदनी सहित,
    देखो ना कैसे दमक रहे हैं।
    ———– पूर्णिमा के चाँद पर कवि गीता जी की बहुत सुंदर रचना।
    लाजवाब अभिव्यक्ति।

    • Geeta kumari - January 29, 2021, 10:01 am

      इतनी सुंदर समीक्षा हेतु अभिवादन हार्दिक धन्यवाद सतीश जी, अभिवादन सर

  4. Suman Kumari - January 30, 2021, 12:32 am

    बहुत सुन्दर

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 30, 2021, 9:04 pm

    बहुत खूब

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