प्रिय

प्रिय तुझे मैं पथ मैं पाऊं,
मैं जिस जिस पथ जाऊं
उत तेरे ही दर्शन पाऊं
सांझ सवेरे तुझको ध्याऊँ

प्रिय तुझे मैं पथ मैं पाऊं

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

सांझ

सांझ हुई,दीपक जलाओ आयंगे प्रियतम तुम्हारे हैं अँधेरे पंथ में जो है वही चांदनी हमारी सांझ हुई दीपक जलाओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

Responses

New Report

Close