‘यहां नहीं तो कहीं ओर ….

‘यहां नहीं तो कहीं ओर जल रहा होगा,
किसी सूरज के मुकद्दर में, कोई शाम नहीं…।’
……………..सतीश कसेरा

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I am Journalist and Writer. I like Story, Poem and Gazal's

3 Comments

  1. Sridhar - May 27, 2016, 9:36 pm

    nice one 🙂

  2. Kavi Manohar - May 28, 2016, 7:31 pm

    Nice

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 17, 2019, 11:54 pm

    वाह बहुत सुन्दर

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