हिन्दी कविता- आसमान की बुलंदी

हिन्दी कविता- आसमान की बुलंदी

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हिन्दी कविता- आसमान की बुलंदी
गिरा तो फिर भी उठ जाएगा |
झुका नहीं तो तू टूट जाएगा |
छूना है आसमान की बुलंदी |
पाँव उठा तो आधार छुट जाएगा |
हारा भी तू योद्धा लड़ा तो सही |
पीछे मुड़ा मुकद्दर रूठ जाएगा |
सफर क्या जिसमे आंधिया न हो |
हौसला रख तू गुबार फुट जाएगा |
मांगना है हिम्मत मांगो खुदा से |
मंजिल मिलेगी अंधेरा छंट जाएगा |
पाना मुकाम आसान नहीं होता |
जुनून की हद रोड़ा हट जाएगा |
श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,
मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

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7 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - November 5, 2019, 12:09 pm

    Sahi kha

  2. देवेश साखरे 'देव' - November 5, 2019, 2:05 pm

    सुन्दर रचना

  3. राही अंजाना - November 5, 2019, 3:02 pm

    वाह

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - November 5, 2019, 3:58 pm

    वाह बहुत सुंदर

  5. Poonam singh - November 6, 2019, 3:43 pm

    Good

  6. nitu kandera - November 8, 2019, 9:18 am

    Nice

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 10, 2019, 7:14 pm

    वाह

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