अपने मित्रों की पीर हरण

अपने मित्रों की पीर हरण ,
जो करता है ।
मित्रता -कसौटी , जगजाहिर,
वो करता है ।
जब विपदाओं के ,चक्रव्यूह में,
मित्र फँसे ,
फिर अर्जुन जैसा बन कर मित्र ,
कर्तव्य उजागर करता है ।
जानकी प्रसाद विवश

प्यारे मित्रो ,
मनोहर सवेरे की , अनुपम घड़ियों में ,सपरिवारसहर्ष , हमारी मंगलकामनाएँ स्वीकार करें ।
आपका हर पल सत्य-शुभ , सुंदर हो ।

आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

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