गीत

–:?गीत ?:-

सावन का मुग्ध फुहार तू है ।
बूंदो की रमणीक धार तू है ।।
कोमल वाणी मे खिली,
आह! लचक सुरीली ।
खनकती बोली मे ढली,
ओह!आवाज सजीली
सावन झड़ी मस्त बहार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
हवा की मादकता मधुर,
सरसराहट मे निखरी अजब,
बदन मे ऊमंग की सजी,
कशमकशाहट अजब।।
सावन की बेला साकार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
पानी मे नहाया यौवन,
सांसो मे रफ्तार बढाये।
दृश्य सावन मे लाजवाब,
मन मे चाहते प्यार जगाये ।
सावनी बारिशकी रसधार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
????
✍✍✍✍✍
श्याम दास महंत
घरघोडा (रायगढ )
✍✍✍✍
दिनांक 09-03-2018
—“”?”—

Related Articles

गीत

–:?गीत ?:- ✍ सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली ।…

वाणी

मानव का गहना है वाणी, वाणी का भोगी है प्राणी । मधुर वचन है मीठी खीर, कटु वचन है चुभता तीर । सद वचन है…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close