दौड़

दौड़ते परायी है जो
अपनी मंजिल छोड़ कर

कठिन है रास्ता
कदम रखना सोच कर

साथ न कोई आएगा
अकेले तुझे जाना है

जग मेरी मंजिल नहीं
कुछ पल का ठिकाना है

रास्ता पहचान लो
मंजिल फिर मुश्किल नहीं

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

Comments

4 responses to “दौड़”

  1. Arun Avatar

    Kya khoob likha hai

  2. Vinita Shrivastava Avatar
    Vinita Shrivastava

    धन्यवाद

  3. राम नरेशपुरवाला

    Good

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