नाम देश का ऊंचा हो.

देश की रक्षा
पहला धर्म
देश की रक्षा
पहला कर्म,
जुटे देश की रक्षा को,
नाम देश का ऊंचा हो.

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दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता…

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कर्म ही जीवन का सार, कर्म ही प्राणों का आधार कर्म करते हुए हो इच्छा, सौ वर्ष तक जीने की कर्म नहीं तो इस दुनियां…

पहला नमन

“*पहला नमन “* *—***—** हर सुवह का पहला नमन आपको अर्पण करें। मनमीत मेरे आप खुश हों खुशियाँ पदार्पण करें । जानकी प्रसाद विवश मेरे…

धर्म-पथ

ख़ुद को कर्म–पथ पे जिवा, धर्म–पथ भी निभाना है धर्म–पथ पर चलते हुए, भूलों को राह दिखानी है अपने तन की पीर भुला, औरन की पीर घटानी है जिनके अपने भूल चुके, अपना उन्हेँ बनाना है हार चुके मनों को , जीत की राह दिखानी है   नाम, वैभव, वित की चाह भुला, परार्थ की राह अपनानी है लोग जो तम में बस्ते है, दिल में उनके दीपक की लो जलानी है ना–उम्मीदी से भरे दिलों को, उम्मीद की किरणों से सजाना है जिन्हें लोग तुछ मान चुके, सम्मान उनका लौटाना है सबके दिलो में सम्मानता ला, भिन्नता को दफनाना है   यह जो मेरा जीवन है , यह कर्म–धर्म का जीवन है यूई कर्म–धर्म की राहों को, अब सहर्ष निभाना है तन–मन से अपना इस राह को, मानव–धर्म को नयी ऊँचाई दिलाना है                  …

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