लोगों की नज़रों का क्या कहना
झटपट रंग जमाते हैं
झूँठे-मूँठे रिश्ते खूब बनाते हैं।
माँ को कुछ समझते ही नहीं
हर गलियारों में शोर मचाते हैं।
बहन को माँ कहने लगे हैं लोग
लोगों की नज़रों का क्या कहना।
☹😴👏👏👏
नज़र
Comments
8 responses to “नज़र”
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वाह, सत्यवचन
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waah
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बहुत ही अच्छी
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बिल्कुल सही प्रज्ञा जी
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सुन्दर और सटीक
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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