उठा के फर्श से अर्श तक के सफर में
हर कदम साथ चलते हैं पापा
डर हो मन में किसी बात का हममें
उंगली थाम के डर पार कराते हैं पापा
मंजिल हो चाहें कितनी भी मुश्किल
राह तो ढूंढ ही लाते हैं पापा
समुंदर की गहराई सी खाली जेब से भी
खिलौना तो ले ही आते हैं पापा
भागदौड़ भरी जिंदगी से अपनी
शाम का वक़्त ले आते हैं पापा
कमाई चाहें कितनी भी हो पापाकी
शहजादी सी जिंदगी देते हैं पापा।
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