बादल घनघोर

कुछ देर की गर्मी थी,
फ़िर बादल घनघोर आ गया
तब तुम्हारा वक्त था ,
अब हमारा दौर आ गया ।।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. समय बदलते रहता है, कभी किसी का वक्त होता है कभी किसी का। कभी बादल का दौर चलता है तो कभी सूरज की तपिश तो कभी ठंडी ठिठुरन।
    चुनौती पेश करती बेहतरीन पंक्तियाँ।

    1. आपकी सटीक टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
      कविता के भाव को समझने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सर

New Report

Close