अभी बाकी है

https://ritusoni70ritusoni70.wordpress.com/2016/08/12

जीने की लय में,

अभी सरगम बाकी है,

बारिशो के बाद,

इन्द्रधनुषी छटा आती है,

चकाचौंध रोशनी न सही,

अभी झरोखों से किरण आती है,

जिंदगी कहीं न कहीं ,

अभी बाकी है ।

चरमराई सी चारपाई में,

अभी दम बाकी है,

दो पहर न सही,

रात में नींद तो आती है ,

जिंदगी कहीं न कहीं ,

अभी बाकी है ।

बसंती हवा न सही,

पतझड़ की बयार तो आती है,

नव जीवन की आस ,

अभी बाकी है ।

सरपट रास्ते न सही,

पगडंडी तो मुझ तक आती है,

सूख गयी दरिया तो क्या,

पर्वतो पर बर्फ ,

अभी बाकी है,

कपकपाती लौ सही,

चिराग में तेल,

अभी बाकी है,

जिंदगी कहीं न कहीं,

अभी बाकी है ।।

Related Articles

सड़क का सरोकार

।। सड़क का सरोकार ।। : अनुपम त्रिपाठी सड़कें : मीलों—की—परिधि—में बिछी होती हैं । पगडंडियां : उसी परिधि के आसपास छुपी होती हैं ॥…

जागो जनता जनार्दन

http://pravaaah.blogspot.in/2016/11/blog-post_75.htmlसमाज आज एक छल तंत्र की ओर बढ़ रहा है प्रजातंत्र खत्म हुआ। अराजकता बढ़ रही, बुद्धिजीवी मौन है या चर्चारत हे कृष्ण फिर से…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close