बहाना

उसको समझना बड़ा मुश्किल होने लगा,
कोई भी बहाना न उस पर चलने लगा,
छोटी से न जाने कब बड़ी हुई मेरी बेटी,
के अब चिंता में ये बाप हर दम डरने लगा।।
राही (अंजाना)

Comments

5 responses to “बहाना”

  1. Satish Pandey

    Nice

  2. Abhishek kumar

    उम्दा

  3. Pragya Shukla

    बहुत अच्छा शगुन सक्सेना जी

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