खेलने लगी है जिंदगी मुझसे आज कल कुछ ज्यादा,
चल मैं भी चाल चलती हूं ,पर कर तू एक वादा,
तू अपनी चाल ना रोकना,
मैं खुद का हौसला पहचानूंगी,
तू यू ही पग पग ठुकराना,
मैं सम्भल सम्भल कर तूझे दिखाऊंगी,
जरूरी नहीं आंधियों में चिराग बुझ ही जाएंगे,
तू आंधि बन आना मैं आग लगाने का रखती हूं इरादा।
चल…..
जिंदगी की चाले
Comments
18 responses to “जिंदगी की चाले”
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बहुत सुन्दर।
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Thank you
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Bhut sunder
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धन्यवाद दीदी
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Nice
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Thank you di
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Good
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Thank you sir
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बहुत खूब
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Thank you sir
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Wah
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धन्यवाद
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Good
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वाह
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धन्यवाद
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Nice
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Thank you di
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वाह
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