हिन्दी तो जीता जागता संसार है

हिन्दी में छंद हैं , अलंकार हैं | कवियों की कल्पना हैं, लेखकों के उद्गार हैं | दोहों की छटा है , रसों की भरमार है | कल्पना और यथार्थ है , नैतिकता भी अपार है | समाज का दर्पण है , भारत का श्र्रंगार है | कौन कहता है कि हिन्दी सिर्फ भाषा है , ये तो जीता जागता संसार है |

Comments

10 responses to “हिन्दी तो जीता जागता संसार है”

    1. SANDEEP KALA BANGOTHARI

      Thank you sir

  1. Geeta kumari

    हिंदी के बारे में बहुत सुंदर विचार ।
    हिंदी दिवस की शुभकामनाएं ।

    1. SANDEEP KALA BANGOTHARI

      Thank you very much mam

    1. SANDEEP KALA BANGOTHARI

      Thanks

  2. Satish Pandey

    बहुत अच्छी पंक्तियाँ लिखी हैं आपने, हिंदी दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं

    1. SANDEEP KALA BANGOTHARI

      Thank you sir

  3. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  4. SANDEEP KALA BANGOTHARI

    Thank you very much mam

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