धोखेबाज दोस्त

कविता- धोखेबाज दोस्त
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हजार झूठे स्वार्थी दोस्त से अच्छा,
एक सच्चा परम मित्र हो,
नाज किया
समय पैसा बर्बाद किया,
वही दोस्त आइना दिखा जाते,
डूबते हुए इंसान से-
किनारे होकर भी, मुंह फेर लेते,
इन उचक्के दोस्तों से अच्छा,
एक बौना अशिक्षित मित्र हो,
मेरी परेशानी मुसीबत में,
सदैव सदैव मेरे साथ हो,
ख्वाब में मेरा दर्द चीख सुनकर,
उठे, फोन करके दुआ कर दें,
मालिक भेज दे ऐसे मिलनसार को,
अपनी हिचकी से मेरी याद समझ लें,
आज भरोसा किस पर करूं,
दो कौड़ी के दोस्तों पे करूं,
जिससे कई बार चैट किया करते,
इनका हाल जानने के लिए फोन किया करते,
हमें पता नहीं था,
इतना बेदर्द स्वार्थी-
घमंडी चापलूस मतलबी मेरे यार हैं,
जिन पे किया अपार भरोसा हूं,
वही सबसे बड़े, झूठे मक्कार मेरे दोस्त हैं,
विश्वास हो गया,
मेरे मित्रों की मित्रता का पता चल गया,
लगा लाकडाउन तो,
जो छिपा था, और आज खुल गया,
फसा शहर में जब अकेला,
किससे बात करें ,
प्यार का खिले उजाला,
कोई फोन उठाकर काट दें,
कोई फोन ही उठाएं ना,
कोई ब्लॉक कर के रख दिया
कोई चुप रहने का सलाह दिया,
जिसे सुबह शाम ,फोन पर सलामी ठोकते,
वही दोस्त मुझे शैतान कह दिया,
डूब रहे निराशा में,
घुट घुट के जी रहे हैं रूम पर,
कान खोलकर,सुनो जमाने के लोग तुम,
मित्रता करो पशु जानवर से,
मत मित्रता करो ऐसे इंसान से,
जो हाल तुम्हारा ना सुने,
अपने व्यंग बाणों से बेहाल कर दें,
मित्रता करो उस इंसान से,
जो दुश्मन होकर भी तुम्हारा साथ दें,
हो गरीब पर दिलवाला हो,
जुबान से गूंगा, पर समझने वाला हो,
हर अंग से क्षतिग्रस्त हो,
रोगी कोढ़ी पागल आओ मेरे पास
उसे पलकों की छांव में रखकर-
प्यार करने वाला हूं,
बस अपने दर्द के जैसा,
मेरा भी दर्द समझे,
मैं उसे भगवान की तरह पूजने वाला हूं,
‘ऋषि’ की प्रार्थना खुदा बस इतनी हैं,
जिस मित्र ने बुरे हाल में साथ दिया,
हर पल की खबर लेकर मुझे प्यार दिया,
मुझे कुत्ता बनाना अगले जन्म में
रखवारी करूं अपने मित्र के घर परिवार की,
खुदा मैं तुझसे अपने पुण्य कर्मों का फल ,
इसी स्वरूप में मांगा हूं|
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**✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’—

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