अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस (भाग -२)

आओ अपने भारत का भ्रमण कर ले,
बिसरी हुई नृत्यकला फिर से चित्रण कर ले,
दक्षिण भारत की नृत्य शैली है भरतनाट्यम,
अपने केरल की नृत्य शैली है मोहिनीअट्टम,
अपने उत्तर भारत का प्रमुख कत्थक नृत्य,
जो कभी श्री कृष्ण ने किया नटवरी नृत्य,
उड़ीसा में जगन्नाथ जी को समर्पित नृत्य ओड़िसी,
अपने आंध्र प्रदेश का प्रसिद्ध नृत्य कुचिपुड़ी,
मणिपुर और असम जाकर देखा नृत्य बिहू और मणिपुरी,
पहुंची गुजरात तो देखा गरबा और डांडिया,
उत्तराखंड का मन भाया नृत्य थडिया और छोलिया,
पहुंची राजस्थान जो देखा घूमर, झांझी,कठपुतली,
रऊ नृत्य जम्मू का देखा,गढ़वाल का नृत्य है गढ़वाली,
पहुंची महाराष्ट्र तो देखा, टिपरी कोली गोक नृत्य गौरीचा,
जाना हुआ पंजाब रोक न पाई खुद को,हमने भी कर लिया गिद्दा और भांगड़ा,
उत्तर प्रदेश का मनभावन है अंबर नीला,देखा सुंदर सा चट्टा नृत्य,थाली नृत्य,और रासलीला,
झारखंड में देखा छऊ नृत्य और देखा नृत्य फगुआ,
आज है नृत्य दिवस यह याद रखो बबुआ।
अपने कर्नाटक की संपन्न नृत्य शैली तो यक्षगान है,
अपने देश की सुंदर नृत्य शैली अपने भारत का सम्मान है।
सब मिल अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस मनाए यह तो विश्व की शान है।
एकता की कलम कर रही आज नृत्यों का बखान है।।
—✍️—-एकता—

Comments

6 responses to “अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस (भाग -२)”

  1. Amita Gupta

    आपकी कविता के माध्यम से सभी को अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
    नृत्य कला का वर्णन कर बढ़ाया अपने मान है।।
    बहुत खूब एकता जी उम्दा लेखन।

  2. अति उत्तम प्रस्तुति

  3. बहुत सुंदर

  4. आप सभी का सादर अभिनंदन

  5. Komal sonwani

    bhut achha likha h .very beautiful

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