सारी सृस्टि है सियाराम में समाई भज ले, भज ले तु प्रेम से सीताराम रे भाई ।
आकर चारी लाख चौरासी
जाति जीव जल थल नभ वासी
सीय राममय सब जग जानी
करउ प्रणाम जोरी जुग पानी।।
सारी सृस्टि है सियाराम में समाई
भज ले, भज ले तु प्रेम से सीताराम रे भाई ।
सीताराम सीताराम सीताराम रे भाई ।।
जलचर, थलचर, नभचर, सभी पाते राम से मुक्ति
रे! नर क्यूं नही भजता राम का नाम रे भाई!
सारी सृस्टि है सियाराम में समाई
भज ले, भज ले तु प्रेम से सीताराम रे भाई ।।
सीताराम सीताराम सीताराम रे भाई।।
कितने दयालु राम हैं
उलटे भजने पर भी खुश हो जाते है
प्रेम वस सबरी के झूठे बेर खाये,
बुलाया भक्त तो, खम्भ फाड़ आते हैं ।
सारी सृस्टि है सियाराम में समाई
भज ले, भज ले तु प्रेम से सीताराम रे भाई ।।
सीताराम सीताराम सीताराम रे भाई।
गज की चित्कार सुने प्रभु
सुने गणिका की नाम निष्ठा
अहल्या की सदियों की प्रतीक्षा
और सुने प्रभु द्रौपदी की पुकार।।
सारी सृस्टि है सियाराम में समाई
भज ले, भज ले तु प्रेम से सीताराम रे भाई ।
सीताराम सीताराम सीताराम रे भाई ।।
चींटी की भी सुने मेरे राम
उनके दरबार में नहीं कोई भेदभाव
जो जैसे सुमिरते, वो वैसे पाते है राम।
सारी सृस्टि है सियाराम में समाई
भज ले, भज ले तु प्रेम से सीताराम रे भाई ।
सीताराम सीताराम सीताराम रे भाई।।
कोई कलम नही बना, आजतक इस संसार में ।
जो राम की महिमा लिख दे, कागज पे ।
राम उदार हैं, पतितपावन हैं
अकारण दया करनेवाले एकमात्र भगवान हैं ।।
सारी सृस्टि है सियाराम में समाई
भज ले, भज ले तु प्रेम से सीताराम रे भाई ।
सीताराम सीताराम सीताराम रे भाई ।।
श्री सीताराम
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