Nanhi si pari thi tum

नन्ही सी परी थी तुम,
जब आई थी गोद में मेरे,
सपने जो संजोए थे मैंने,
एक बेटी हो प्यारी सी,
वो कर दिया था पूरा,
मेरी गोद में आकर तूने,
न जाने कितनी लोरियां
सुनाई थी बचपन में मैंने तुझे,
जैसा था सोचा मैंने
वैसा ही पाया तुझे,
दिल की दुआ है मेरी,
मेरी भी उम्र लग जाए तुझे
अभी भी याद है मुझे
गुड़ियो से खेलना तेरा,
तेरी पायल की घुंघरू
कानों में अभी भी बजती है,
ठुमक ठुमक कर चलना तेरा,
अभी भी याद है मुझे,
न जाने कब तू बड़ी हो गई
पता चला भी नहीं मुझे,
वो पल मै सोच के घबराऊ,
जब विदा मैं करूं तुझे,
अरमा है मेरे दिल में
तेरे हाथों में मेहंदी रचाऊ,
दुल्हन के जोड़े में
जन्नत की परी तुझे बनाऊं |


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16 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 12, 2019, 4:51 pm

    सुन्दर भाव

  2. Panna - November 12, 2019, 5:11 pm

    beautiful poetry!!

  3. NIMISHA SINGHAL - November 12, 2019, 5:32 pm

    बहुत सुंदर

  4. देवेश साखरे 'देव' - November 12, 2019, 5:41 pm

    Sundar rachana

  5. राही अंजाना - November 12, 2019, 6:10 pm

    वाह

  6. Antariksha Saha - November 12, 2019, 8:14 pm

    Bahut khoob

  7. nitu kandera - November 12, 2019, 8:21 pm

    wah

  8. Raj Bhatia - November 12, 2019, 8:48 pm

    कुछ परियों सी है तो कुछ तितलियों सी है.
    आपकी ये पंक्तियां सच में पंखुड़ियों सी हैं .

  9. NIMISHA SINGHAL - November 12, 2019, 11:52 pm

    Wah

  10. Ashmita Sinha - November 13, 2019, 9:22 am

    Nice one poonam ji

  11. Abhishek kumar - November 24, 2019, 9:05 am

    परी

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