यह हिन्दू नूतन वर्ष सभी को, हृदय में प्यार दे, खु़शियाँ अपरम्पार दे नए गेहूँ, चावल धान दे शिक्षा का वरदान दे दुखियों के दुख दूर कर सकूँ, सब को सदा सम्मान दूॅं ऐसा मुझे […]
यह हिन्दू नूतन वर्ष सभी को, हृदय में प्यार दे, खु़शियाँ अपरम्पार दे नए गेहूँ, चावल धान दे शिक्षा का वरदान दे दुखियों के दुख दूर कर सकूँ, सब को सदा सम्मान दूॅं ऐसा मुझे […]
हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि की, आप सबको शुभकामनाएँ। यही है नववर्ष हमारा, यही जीवन में खुशियाँ लाए। एक जनवरी को क्या हुआ, क्या ऋतु बदली कोई? या बदला कोई मौसम। क्या फ़सल बदली? […]
नई फसल के आगमन का प्रतीक बैसाखी, खुशियों के आने का संकेत बैसाखी। नई फसल कटती है खेतों से, आती है घर। रौशन करती कृषक का जीवन, खुशहाली लाती घर-आंगन। नई फ़सल के आने से, […]
सुबह सुबह में इतना चहचहाती हो, क्या बात करती हो बताओ ना, कहीं इंसान की बातों की कोई बात करती हो, या मिलने-बिछुड़ने का कोई जज्बात रखती हो। बताओ ना। भूख की प्यास की आवास […]
एक गुलाब एक सी पत्ती, काँटे, डंठल एक समान फिर कौन रंग भरता है इनमें, कहाँ है रंगों की खान। लाल-सफेद, पीले, गुलाबी कितने सारे हैं गुलाब, इतने सारे रंग व खुशबू मन विस्मित सा […]
नवजात बच्चे दूध पी रहे थे, भूख उसे भी लगी थी, दूध पिलाने में भूख भी बहुत लगती है दूध पिलाने में। उर जल रहा था आमाशय के तेजाब से, बच्चों को छोटी सी झाड़ीनुमा […]
सुबह सुबह सूरज की किरणें लगती हैं कितनी मनभावन, नई लालिमा युक्त चमक है, लगती हैं निखरी सी पावन। खुश होकर चिड़िया बोली है उठो सखी सुबह हो ली है, एक झाँकती है बाहर को […]
इतना छोटा था उसे सेवा करके बड़ा किया था सोंचा और फले-फूले, चारों दिशाओं में फैले इसी नीयत से, उसे बड़े गमले में लगाया खूब खाद डाली खूब जल पिलाया बच्चों की तरह जिसे रोज […]
किसी ने कहा लिखा करो किसी ने कहा पढ़ा करो यूं वक्त ना जाया करो कविता तो बाद में भी लिखी जा सकतीं हैं वक्त रहते पढ़ा करो.. मेरा हृदय बोला दुनिया की कब तक […]
कविता-होगा कोई लोभी ——————————- होगा कोई लोभी, होगा कोई ना समझ, जो तुम्हें खरीदे रुपयों में वरना तुम्हारी कीमत चवन्नी से भी कम है, अरे…. होगा कोई आंख का अंधा, जो तुम्हारी सूरत को ,उगता […]
कुछ है बात निराली सी मेरे भारत की बात अद्भुत है। खूबसूरत है हिमालय पर्वत, जहाँ से मीठी हवा आती है, ऐसी लगती है जैसे हो शर्बत। गंगा जमुना व नर्मदा जैसी बह रही हैं […]
साहित्य लिखो क्यों तुम आपस में लड़ते रहते हो कभी तुम जीतो कभी वो हारे क्यों जीत-हार में रोते हो पैसे कमाने के साधन तो दुनिया में हैं बहुत पड़े साहित्य लिखो क्यों पुरस्कार की […]
बड़ी बात करते हैं लोग पर बड़ा ह्रदय ना रखते हैं कुछ अभिलाषा मन में जागे तो फिर कुबड़ाई करते हैं लेखनी को दूषित करते हैं अपनी कुत्सित सोंच से दूसरे की ना सुनते बस […]
ममता किसने भर दी मन में गाय को बछड़े से ममता है माँ को बेटे से। ये ममता किसने भर दी मन में। ममता जिसने पैदा की वह ईश्वर सबसे ऊपर है, ममता का गुण […]
हंसी आ गई मुझको कि अब आया तुमको होश, जब यहां अवसान पड़ा था तब ना आया यह जोश अपना यह जोश संभालो करो परिश्रम यदि पड़ जाओ अकेले तो देंगे साथ हम देंगे आपका […]
नाच रहा मन मोर क्यों, आज बिना बरसात, है यह आहट प्रेम की, या है कोई बात। या है कोई बात, उमड़ क्यों नेह रहा है, साजन पर है गीत तभी यह गेय रहा है। […]
बेटा बीमार है ना होश है ना करार है कल से एक निवाला तक गले ना उतरा बेटे को बहुत बुखार है क्या करूं ? कैसे जियूं ! यही तो मेरे जीवन का आधार है
मेरा भारत मेरा देश उन्नति को बढ़े, हर तरफ हरियाली और खुशहाली रहे। दूध की नदियां बहें खेत सोना उगल दें, मेघ जल वर्षा करें, वृद्धजन हर्षा करें, युवा मंजिल को पायें हर घड़ी मुस्कुराएं, […]
किसी की जीत या किसी की हार का बाजार शोक नहीं मनाता। एक व्यापारी का पतन दूसरे व्यापारी के उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, प्रेम इत्यादि की बातें व्यापार में खोटे सिक्के […]
पवन मनोहर झौंका लाई साथ में उसके खुशबू आई, सद्कर्मों का अच्छा ही तो फल मिलता है मेरे भाई। अच्छी सोच रखो मन में तो अच्छा ही होने लगता है, बिना स्वार्थ के रब की […]
खो गए खेल आज बचपन के, रम गया बालपन मोबाइल में, आँख का सूख रहा पानी है टकटकी आज है मोबाइल में। वक्त है ही नहीं बचा जिससे संस्कारों को सीख लें बच्चे, कुछ रहा […]
कविता – मां और कवि —————————- मां और कवि में , अंतर इतना, सीता और बाल्मिकी में, अंतर जितना, मां सुधा अगर है, कवि पारस पत्थर है, मां सरिता गर है, कवि सागर की गहराई […]
कविता- आलसी तू आलसी है ————————————– आलसी तू आलसी है तू बेरोजगार नही है आलस छोड़ काम कर वरना तेरी खैर नही है, डिग्री हैं डिप्लोमा हैं है पास तेरे कोई हुनर, कुछ नहीं है […]
ऐसी बातें क्यों करें, जो देती हों पीड़, सबसे अच्छा बोल दें, अपनों की हो भीड़। अपनों की हो भीड़, सभी अपने हो जायें, बेगानापन छोड़, सभी अपने हो जायें। कहे लेखनी छोड़, चलो सब […]
सब ओर खुशी छा जाये दुख की छाया पड़े न किसी में। मन मानव का होता है कोमल आशा होती है मन में, आशा टूटे कभी न किसी की, दिल टूटे न कभी भी, इच्छा […]
समझाना चाहते थे हम उनको क्या और वे समझे हैं देख लो जी क्या ये देख के लगता है यूं कश्मकश में चुप रहना ही बेहतर है इस जगत में शब्द का उत्तर शब्द ही […]
युद्ध से एक सैनिक घर आया, बिटिया को द्वारे पर पाया। एक हाथ में थैला था उसके, दूजा पीठ पीछे छिपाया। पांच साल की छोटी बिटिया के, चेहरे पर आई मुस्कान। उसने सोचा पापा के […]
प्रेम…. किसी को समझाया नहीं जा सकता। यह तो केवल एक अनुभूति है, जो स्वयं ही होती है। प्रेम स्वार्थहीन है, सागर सी गहराई लिए हुए , एक खूबसूरत एहसास!! इन्तजार में और भी वृद्धि […]
ओ नवोदित पीढ़ी मेरे भारत की, उठ जा तू धूम मचा दे हर क्षेत्र में हर विधा में भारत को मान दिला दे, तू है वह पौध जिसमें कल के फल लगने हैं, तूने ही […]
नफरत केवल खून सुखाता प्यार उजाला देता है। मेहनत का परिणाम अंततः हमें निवाला देता है। दूजे से ईर्ष्या रखने से नहीं किसी का भला हुआ, अपने ही संघर्ष से साथी सबका अपना भला हुआ। […]
चमक रही है नयी सुबह सूरज की किरणें फैली हैं, बन्द रात भर थी जो आंखें, उनमें नई उमंग खिली है। गमलों के पौधों में देखो, नई ताजगी निखर रही है, फूलों में कलियों में […]
हरी दूब पर सुबह सवेरे, किस के बिखर गए हैं मोती। किस जौहरी का लुट गया है, देखो सुबह-सुबह खजाना। पुष्प और पल्लव सब मुस्काए, ये किसने हीरे बिखराए। देखो प्रकृति लुटा रही है, प्रा:त […]
क्यों कोई मोहब्बत के काबिल नहीं होता ? क्यों हर किसी के सीने में दिल नहीं होता ? क्यों होता है उसी बेदर्द से इश्क ! जो इस दिल के काबिल नहीं होता…!!
अब फिर से उस तरफ से खत आ रहें हैं वो अपने नुमाइन्दों से मेरी खैरियत पुंछवा रहे हैं…. हमारी फिक्र है या हमारी आरजू हम कैसे हैं ? बस वो यह जानना चाह रहे […]
हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ || कि अब ना बजती बंशी की धुन कहीं गइयों को ठौर नहीं माखन चुराने आ जाओ… हे कृष्ण ! पुन: […]
*कोरोना को दूर भगा लो* ********************* मन का भय सब दूर करो वैक्सीन लगा लो आप सभी कोरोना को दूर भगा लो वैक्सीन लगा लो आप सभी। डरो नहीं कुछ दर्द नहीं है, नहीं कोई […]
स्टैंड पोस्ट का नल बेचारा खड़ा रहा बस खड़ा रहा, एक बूंद भी टपक न पाई, ऐसा सूखा पड़ा रहा। प्यासों के खाली बर्तन जब देखे उसने रोना चाहा, मगर कहाँ से आते आँसू, ऐसा […]
सुबह होगी हाँ, सुबह होगी लेकर स्वर्ण रश्मियों को अपने झोले में कुछ खंगालेगी गेहूं की अधपकी बालियों को लहलायेगी उलझी हुई वृक्षों की लटों को सुलझाकर नदियों को काला टीका लगाकर कुछ गुनगुनाएगी समुंदर […]
नही हाथ में उंगलियां पर पेट में हैं दात जितना कमाती है किस्मत उतना खाती आंत उतना खाती आंत करूं क्या मुझे बताओ मेरी हालत पर तुम ना हमदर्दी दिखाओ काम कराओ फिर मुझको दो […]
ना राधा ना रुक्मणी, वो कान्हा की मीरा बनी। हरि नाम ही जपती थी, ऐसी उसकी भक्ति थी। विष का प्याला पी गई, जाने कैसे वो जी गई। भरी जवानी जोग लिया, मीरा ने सब […]
आँख का जल एक है, मानव की पहचान, अगर न हो संवेदना, फिर कैसा इंसान। फिर कैसा इंसान, जानवर भी रोते हैं, मानव में तो दया भाव के गुण होते हैं। कहे कलम विचरते, हैं […]
भोर होती है हर रोज बहुल के लिए आशा की एक किरण लेकर नऐ विचार नई ख्वाहिशें नई चाह नई भूख जो होती है पद-प्रतिष्ठा धन- दौलत वस्तुओं संबंधों को समेटने की… बहुल के होती […]
खो जाये सब कुछ मगर, मत खोना विश्वास, गया भरोसा बात का, होता है परिहास। होता है परिहास, सभी हल्का कहते हैं, बिना पूर्ण विश्वास सभी दूरी रखते हैं। कहे लेखनी बीज, भरोसे का तू […]
पानी बरसा ही नहीं, सूख चुके हैं मूल, अब कैसे जीवन चले, हिय में उठते शूल। हिय में उठते शूल, जंग पानी को लेकर, जनता में छिड़ रही, पड़े बर्तन को लेकर। कहे सतीश अब […]
घड़ी तो घड़ी है साधारण हो या फिर असामान्य। पर समय बड़ा हीं होता जग में सदा से असामान्य।। टिक – टिक करती सूई वाली। अपने हीं चाल में चलने वाली।। डिजिटल घड़ी में अंकों […]
उगते सूर्य की रश्मियाँ, जब-जब पड़ी हरित किसलय पर सुनहरी पत्तियाँ हो गईं, देख सुनहरी आभा उनकी, आली, मैं कहीं खो गई। वृक्षों के बीच-बीच से, रश्मियाँ छन-छन कर आती थीं उषा काल की सुन्दर […]
मेरी बेटी, मेरी है, सिर्फ मेरी है मेरी है, मेरी है, सिर्फ मेरी है, तुम सिर्फ मेरी है, मेरे बिना कोई दूसरा तुम से ज्यादा प्यार नहीं कर सकता मेरी जान, तेरे सिवा किसी ओर […]
दो पत्ती के रूप में, उगता है नन्हा बीज, धीरे-धीरे एक दिन, विशाल वृक्ष बनता है। जो सैकड़ों प्राणियों का बसेरा बनता है। छांव देता है, प्राणवायु देता है। फल देता है, फूल देता है, […]
हाथी की तरह दो दांत मत देना मुझे प्रभो कि बाहर अलग, भीतर अलग। दो रूप न दिख पाऊँ। दो राह न चल पाऊँ। जैसा भी दिखूँ एक दिखूँ, नेक रहूँ। न किसी से ठेस […]
मेरी एक सखी चली ससुराल, आशीष लेकर बुजुर्गों का। गले मिलकर सखियों के, भावी जीवन के सपने लेकर अपनी अंखियों में सखी चली ससुराल। सखियों की भी दुआएँ, लेती जाना तुम। साजन सॅंग मिलकर, नव-सॅंसार […]
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