जब मै बूडा हो जाउगा,जब आँखो के दीये बूझ जाएंगे, कया तबी तुम मुझको चाहोगी,कया तबभी तुम मुझको प्यार करोगी, बोला ना. जब मेरी आँखे धुधली हो जाएंगी,जब चेहरे की झुर्रियां ज़िन्दगी की कशमकश से […]
जब मै बूडा हो जाउगा,जब आँखो के दीये बूझ जाएंगे, कया तबी तुम मुझको चाहोगी,कया तबभी तुम मुझको प्यार करोगी, बोला ना. जब मेरी आँखे धुधली हो जाएंगी,जब चेहरे की झुर्रियां ज़िन्दगी की कशमकश से […]
जिंदगी का पल पल बीत जाता है, हम देखते रह जाते हैं, सुबह से शाम तक शाम से सुबह तक मिलन से विरह तक, बीते पलों की जिरह तक नहीं कर पाते हैं, कल से […]
गांव के खेत बंजर होते गये गांव के बुजुर्ग पेड़ रोते गये, पुराने घर आँगन टूटते रह गये। जो गया लौट कर आया नहीं। शहर का हो गया गांव फिर भाया नहीं। वह चबूतरा टूटता […]
नभ में एक तारा टूटा, और धरा पर तार। चाॅंदनी मद्धम हुई, चाॅंद हुआ लाचार। कभी दिखता कभी छिप रहा है, नभ के उस तारे को, चाॅंद ढ़ूंढ़ रहा है। वह सच्चाई थी या, था […]
मत चलो भीड़ में बंधु, भेड़ झुंड कहलाओगे। एक गिरा कुए में तो, सभी को उसमें पाओगे।। वो बिना मास्क के रहता, मानव बम सा लगता है। आतंकी श्रेणी में आता, दुश्मन मानवता का लगता […]
मुक्तक:- किसी दिल में उदासी है कहीं उदासी में ही दिल है तेरी आंखों का दरिया मेरे दिल के काबिल है यकीन करना बड़ा मुश्किल मगर सच है हकीकत है तेरी बेरुखी कहती है तुझे […]
जो कृत्य खुशी दे मन को वह कृत्य तुझे करना होगा नफरत विद्वेष भरी बातों से दूर तुझे रहना होगा। तन अलग कहे मन अलग कहे उलझन का मूल यहीं पर है, तन-मन दोनों की […]
मत कहना सूरज डूब रहा है नहीं डूबता है सूरज जलकर निरंतर रात औऱ दिन ज्योति उगलता है सूरज। धरती गतिशील घूमती है स्थिर नहीं रहती है इसलिए हर कोने में क्रम क्रम से उजाला […]
समाज में हो रहा गलत तेरे भीतर की आत्मा को झकझोरता नहीं क्या किसी निरीह की चीत्कार किसी भूखे की भूख प्यासे की प्यास जीवन में व्याप्त दर्द तेरे भीतर की आत्मा को झकझोरता नहीं […]
तुझसे है नाता विश्वास न आता इक पास आता दूजा दूर जाता दूर रहकर भी कहां चैन आता शादी लड्डु जैसे खाकर है पछताता अब ताकता राह नये पंछियों की जो देख सुनकर भी न […]
लगी है आग जंगल में न जाने कौन है ऐसा रगड़ माचिस की तीली को जला कर चल दिया घर को। इधर घर जल रहे लाखों विकल हैं भस्म हैं प्राणी उधर है मौज में […]
जिन्दगी की अंधेरी रातों में काम जुगनू से न चल पायेगा, कभी चमकता कभी बुझता सा ये नहीं राह दिखा पायेगा। दबा ले स्विच जगा ले बत्ती को ये बत्ती हो मन की ऊर्जा की, […]
मोमबत्तियों-सा है जीवन अब तो पिघलना है प्रकाश फैलाना है काव्य लिखने का मन है अब तो तेल डाल दे कोई मेरे जीवनरूपी दीपक में, अभी और तम मिटाना है अभी इमारतें बनानी हैं अभी […]
आज जब भूल बैठी थी सदियों बाद छत पर बैठी थी ठंडी-ठंडी हवाएं तन को छू रही थी तुम्हारी यादें मन को छू रही थीं सरसराहट पत्तियों की कानों तक जा रहीं थीं चाय की […]
चिठ्ठियों की वेदना कभी सुनी है तुमने? कितना सिसक-सिसककर रोती हैं एक पते को ढूढ़ने में जमाने लगते थे अब बात क्षण भर में पहुँचती है लिखने वाले और पढ़ने वाले में एक कल्पना का […]
अद्भुत है यह लेखनी भी स्वयं को ब्रह्मा बना देती है कभी करुण रस का पान करती है कभी प्रेम की सरिता बन जाती है जहाँ रवि नहीं पहुँचता है वहां प्रकाश ये फैलती है […]
यह देश ब्रह्मा-चरक- पतंजलि का है क्या?? तो बेटियों को पेट में ही क्यों मार देते हैं विज्ञान अभिशाप है या वरदान पेट में बेटा है या बेटी बता देते हैं कैसी मानसिकता है जो […]
कहाँ गई वो दानवीर कर्ण की संतानें ??? ***************************** ____________________________ मत बाँधो मेरी नाव को तैरने दो इसे पीर के विशाल सागर में भर गया है जो इन दिनों पीड़ितों की दयनीय दशा देखकर चौराहों […]
बेटियों का दर्द तो सब जानते हैं पर बेटों के दर्द को कहां किसी ने देखा है बेटियाँ चली जाती हैं घर छोड़ कर फिर उस घर की बेटा ही तो देख-रेख करता है प्यार […]
भले ही सो रहा हूँ मैं थका-माँदा यहाँ फुटपाथ में मगर चलती सड़क है रुकती है बमुश्किल एकाध घंटा रात में। उसी में नींद लेता हूँ उसी में स्वप्न आते हैं, कभी जब राहगीरों के […]
छोड़ दे छोड़ दे उदासी को कोई फायदा नहीं है चिंता से गम में मत रह बढ़ा न दर्द ए दिल कोई फायदा नहीं है चिंता से। दुःख तो होता है कुछ भी खोने से […]
कोरोना का कहर हुआ, गली-गली हर शहर हुआ। आ गई है दूजी लहर, कोरोना ने कितना बीमार किया। दर्द दिया लाचारी दी, बहुत बड़ी बीमारी दी परेशान बहुत किया इसने, कितनी बड़ी महामारी दी। फ़िर […]
चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम, चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी। चाॅंद की रौशनी में, तुम्हारे संग जश्न मनाऊंगी। दो-चार सितारे अलग से लूॅंगी, तुम्हारे कुर्ते में लगवाऊॅंगी। दोनों घूमेंगे चमचम करते, पायल की छम-छम […]
वफा तो वही करेगा वफा करना जिसका काम हैं, अक्सर वफादार है बेवफाई करते हैं बेवफा तो यूं ही बदनाम हैं।।
कई साल गुजर गए पर आज भी महसूस होता है जब भी तू इन गलियों से गुजरता है तेरा आना जाना लगा रहता है दिल की गलियों में आंखों की पुतलियों में तू घूमता रहता […]
एक दिन तो जाना है तुझको,आज तो साथ रहने दे, ये दर्द ज़फ़ा का तेरे संघ सहने दे. ऐसे न नज़रे चुरा मुझसे,हूँ मै आखिर तेरा दीवाना, है जब तक साँस बाकि,तब तक तो तेरे […]
Jo bit gai so baat gai Chalo ek nai suruat karen Mera gham tu lele tera gham mailelun Chal baith ek duje se kuch naat karen Bhuli bisry yaado se dard k faoware uthte hain […]
मेघा आए रे आए रे, ऐसी पड़ी फुहार। भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया नीर गिरे भरमार। श्याम वर्ण के मेघा बरसे, खूब गिरी जल-धार। इतनी तो होली पर भी ना भीगी, जितनी भीगी बारिश में इस बार। […]
कर के आया था मजदूरी, था थकन से चूर। रूखा-सूखा खा कर सो गया, वह बूढ़ा मजदूर। ओढ़ी एक फटी थी चद्दर, उसके सूराख़ों से घुस गए मच्छर। हाथ पैर पटकता था, मच्छर भगाने को। […]
ईश्वर का पता कहाँ है मन ढूंढता रहा है, कोई कहे यहाँ है कोई कहे वहाँ है। मगर जब गौर से देखा मुझे ईश्वर दिखा उसमें कि था जब भूख से व्याकुल खिलाई रोटियाँ जिसने। […]
रोशनी कर दो ना जला दो बल्ब सारे, देखने हैं मुझे दिवस में चाँद तारे। अंधेरे से बहुत उकता गया हूँ, मन भरी पीड़ को लिखता गया हूँ। अब मुझे जूझना है, नया स्वर फूँकना […]
हर अवसर भुनाना होगा मौका मिलेगा तुझे भी एक दिन मुश्किल से उसे बस कस कर लपकना होगा। हो अगर कंटक युक्त झाड़ी तो बीच में फूल बनकर महक के साथ महकना होगा। उदासी फेंक […]
संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को है शत शत नमन जिन्होंने बढ़ाई देश की शान हम करते हैं उनका वंदन संविधान निर्माण किया और पालन करना सीख लाया भीमराव अंबेडकर ने संविधान का निर्माण कराया।।
तब आप कितने सुन्दर थे पापा देख पुरानी फोटो, देखता रह गया मैं। फौजी वर्दी चमकता चेहरा, फौलादी बाजू, सीधे लंबे से, जाने कब की है यह फ़ोटो, मुझे याद है आपकी कर्मठता की ठंडी […]
धन है धन्य धन का राज है सबके दिलों में। बिना धन जिन्दगी का पथ कठिन। न हो धन पास जिसके दूरियां रखते हैं उससे, ठुंसा हो जेब में जिसके खूब धन, भले वह एक […]
कविता- तरस आता है —————————————— हे गरीबी तुझ पर – तरस आता है, क्या बिगाड़ तू पाई इंसान का| चाहे तू और बर्बाद कर दे, चाहे तू और भिखारी कर दे, जो इच्छा हो तेरी […]
जन्म लेकर जब आए, इस दुनियाँ में हम पहली बार। जो भी दृश्य देखा, चकित हृदय हमारा था। बारिश की पहली बूॅंदों ने भी, चकित इतना कर डाला पानी ,पानी कहकर हमने, वो दृश्य सबको […]
उपवन में फूल खिले, महक आई सुबह सुबह की मारुत, उड़ा लाई। याद आया वह मुझे, नलिनी फूल, या नासिका से जुड़ी, यह है भूल। देख अनदेखा किया, जाते रहे ख्वाब में वो ख्वाब क्यों, […]
छोटी सी प्यारी गुड़िया रानी, पापा की राजकुमारी है । पापा की गोदी में खेले, पापा को सबसे प्यारी है। अपनी बातों से मन मोह ले, पापा भी हॅंसकर यूँ बोलें फूलों जैसी है कोमल […]
गोरी-चिट्टी, काली चमड़ी को रगड़ रगड़ क्यों धोता है। यह सब कुछ है नश्वर है जग में कर्मों का लेखा-जोखा होता है। कौन है गोरा कौन है काला यह ना रखता कोई याद, अच्छे व्यवहार […]
आँख में देखना कुछ नया भाव होगा, धड़कते दिल में कोई घाव होगा। वो पुराना हो या नया हो मगर रख हौसले से भरना होगा, मुकाबला समस्याओं से डटकर करना होगा। कुछ नए परिवर्तन को […]
आया है नव वर्ष सभी को खूब बधाई हो गए हम तो कृतार्थ घर नवदुर्गा आई घर नवदुर्गा आईं , लेकर छोटा रूप धूप, दीप, नैवेद्य और लेकर थोड़ी धूप मैया का वंदन किया मिला […]
हिंदू पंचांग के अनुसार आया नव वर्ष हमारा दुख बीते और सुख आये है यही संदेश हमारा है यही विनती हमारी मिट जाए सबके क्लेश प्रेम ही प्रेम दिखे चित ओर ना हो कोई द्वेष […]
नया वर्ष आया है मित्रों मनाओ इसको तन मन धन से मां दुर्गा का वंदन करके नतमस्तक कर दो सिर को चैत्र मास आरंभ हुआ आया है नवल प्रभात धन्य भारतीय संस्कृति धन्य है इसकी […]
आज आरती का लेकर थाल, दुर्गा माॅं की करूँ वन्दना। बीमार पड़ी है घर के अन्दर, मेरी जननी मेरी माँ। कोरोना ने कैसा सितम किया है, देखो कैसा जुल्म किया है। आज उसे देखन को […]
रम तू जा माँ के चरणन में घर में माता भूखी सोये, फिरे क्यों मन्दिरन में। छोड़ दिखावा मूरख प्राणी, गर्व न कर निज तन में। बूढ़ा होगा जब तेरा तन, तब रोयेगा मन में। […]
कविता -राम —————- राम तुम्हें फिर आना होगा आओ बाण उठाना होगा आतंकवाद से मुक्त बना भारत को आर्यावर्त बनाना होगा चाहे पाक के पाले आतंकी हों चाहे जम्मू के पत्थरबाज ही हों रोती है […]
तुम ही दुर्गा नव दुर्गा तुम नारी तुम ही नवदुर्गा हो। जननी हो तुम जन्म की दाता। सब कुछ तुम ही हो माता। तुम से ही संसार बना है, दया, प्रेम, चाहत, स्नेह, करुणा और […]
कविता- मोह छोड़ कर थप्पड़ मारो ——————————————— मां मुझको चलना सिखा दे, डगमग करते पैर मेरे अंगुली पकड़ के राह दिखा दे, बहुत बड़ी गलती किया हूं, सभ्यता संस्कारों को भूल गया हूं, आदर्शों से […]
सुना दे मन मीत एक कविता जिससे हो झंकार हृदय में, और बहे सुख सरिता। दूरी रख ले उलझन मुझसे, ऐसी कह दे कविता। भर दे थोड़ा सा आकर्षण, मुझे बना दे ललिता। बन जायें […]
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