चले चल मस्त राही मन नहीं काम है घबराना। जहाँ मिलती चुनौती हो उसी पथ में चले जाना। जहाँ हो प्रेम का डेरा वहाँ थोड़ा सा सुस्ताना जहाँ हरि भक्ति पाये तू जरा उस ओर […]
चले चल मस्त राही मन नहीं काम है घबराना। जहाँ मिलती चुनौती हो उसी पथ में चले जाना। जहाँ हो प्रेम का डेरा वहाँ थोड़ा सा सुस्ताना जहाँ हरि भक्ति पाये तू जरा उस ओर […]
जितना खुद से हो सके सेवा करनी चाहिए, कष्ट झेलते मानव की सेवा करनी चाहिए। इसी बात के लिए हमें मानव बोला जाता है, मानव हैं, मानवता का परिचय देना चाहिए। स्याह पड़े असहाय की […]
स्नेह कोई दे अगर तो स्नेह बढ़कर दीजिये जंग को ललकार दे तो जंग पथ पर कूदिये। सीधा सरल रहना है तब तक जब तलक समझे कोई अन्यथा चालाकियों में मन कड़ा सा कीजिये। गर […]
टूटे सपनों की सिसकियाँ, नहीं सुनता है ये ज़माना। इसलिए कर्म पथ पर, मुझको है कदम बढ़ाना। यदि मैं कभी भटक जाऊँ, चलने से, सच्ची राह पर तब तुम मेरा हाथ पकड़ कर, ले आना […]
हाथ में रेखा रेखा में जीवन जीवनt रेखा हाथ में। पर है जीवन और मरन एक ईश्वर के हाथ में।। हाथ मिलाने से पहले सोच लो एक बार। वायरस और बैक्टीरिया है बीमारी के आधार।। […]
दिखा लो तुम भी दम, कम नहीं हैं हम। अपने देश के लिए, हम भी जाॅं लुटा देंगे। चीन, पाक जैसे बैरी को, पल में ही मिटा देंगे। चीन ने कोरोना फैलाया, पाक ने आतंक […]
कोरोना बढ़ने लगा, रह सचेत इंसान, मास्क लगाकर रखना है कहना मेरा मान। कहना मेरा मान, बचा खुद के जीवन को, जागरूकता से ही, रक्षित कर जीवन को। आज वक्त की यही जरूरत सजग रहो, […]
गुस्सा तो कमजोर का, गुण होता है मान, गुस्से से इंसान का, कम होता सम्मान। कम होता सम्मान, कभी गुस्सा मत करना, बढ़ते जाना और, स्वयं मन स्थिर रखना। कहे लेखनी कहा, बुजुर्गों ने यह […]
कर्म के लिए कहां कोई करार बैठे हैं बेकार आलस की कतार बेजार की पगार सरकार की बुखार तंत्र में अरसे से सुधार की दरकार सुरक्षा की दीवार में है दरार अधिकारी दे रहे भ्रष्टों […]
सबसे गहरी यह बात है मन तूने स्थिर रहना होगा, कभी कहीं, कभी कहीं, ऐसे न तुझे बहना होगा। एक लीक एक धारा, एक मार्ग हो साधन एक एक नजर रख मंजिल पर ऐसे तुझको […]
नख नुकीले काट लूँगा मैं प्रेम को बाँट लूँगा मैं दूर कर के बुराई सब भलाई छाँट लूँगा मैं। मगर जो सत्य पथ है वह जकड़ रखना पड़ेगा ना, हाथ में लठ साफ सा रखना […]
ओ रोशनी! चली आ बीता तम हुआ सवेरा जगमग कर दे यह जग ओ प्रकाशपुंज ! भर प्रकाश जीवन में पुष्पों की लालिमा से महक उठे यौवन ओ रोशनी ! चली आ बीता तम हुआ […]
उठो जागो उठो जागो करो इस मुल्क को रोशन जगा लो देश का यौवन, लगा दो आज निज तन मन। सदा मस्तक रहे ऊंचा, नहीं हो देखना नीचा, हमारा देश यह भारत, रहे ऊंचा सदा […]
मेरे वाचन में हो सच्चाई व्यक्तित्व में हो अच्छाई हे देव ! मुझे ऐसा वर दो मुझको मानवता दे दिखलाई ना कभी किसी का दिल तोड़ूं किसी पर आई आंच को सिर ले लूं जब […]
कविता- खबर ले ले ————————- कोई तो हो खबर ले ले, कहां थे अब तक- यह सवाल पूछ ले, वक्त का हिसाब मांगे, साथ रहने का साथ मांगे, हो फोन जब व्यस्त मेरा, फोन पर […]
तान छेंड़ मुरली की गीत नया गा गया मेरी झुर्रियों भरे यौवन में कसाव आ गया पपीहे पीह-पीह बजने लगी जब कान बीच मृदंग बजे जीवन में यों उछाल आ गया मटकी धर सीस चली […]
कल अचानक ही तुम्हारी तस्वीर पर आकर ठहर गईं मेरी निगाहें… और मैं उलझकर रह गयी तुम्हारी आँखों के तिलिस्म में ..!! गहरी ख़ामोशी समेटे हुए सागर सी ये तुम्हारी आँखे, साक्षी हैं ज़िन्दगी के […]
बिल्ली की पूंछ ——————- रुकी कलम अगर भूत भविष्य बिखर जाएगा रखो न हाथ गिरवी, जमाना भूखे बच्चों को- व्रती बता जाएगा, जिन्हें शुद्ध पानी नसीब नहीं, उन्हें बोतल का- पानी पीने की सलाह दे […]
ज़रा सी बारिश के छींटों से, क्यारी में खिल गए गुलाब। सुहाना सा हुआ मौसम, बहने लगी शीतल पवन। मयूर नृत्य कर उठे बाग में, कोयल गाती मीठे राग। इन्द्रधनुष भी दिखे गगन में, मीठे […]
चिकित्सक डटे हुए हर बार, बीमारों का करें उद्धार। लगाकर दवा ज़ख़्म पर, कर रहे हैं उपचार। शत्-शत् नमन् है चिकित्सकों को, उनके सेवा भाव को प्रणाम। गंभीर व्याधि के मौसम में भी, एक सैनिक […]
हमें तो रोशनी की बात ही उठानी है, जहाँ हो दर्द वहां पर दवा लगानी है। छोड़ भीतर की गुनगुनाहट को, बात अब जोश से सुनानी है। छोड़ मन की समस्त टूटन को आस नवरूप […]
भूखे तक अन्न पहुंचाना होगा गरीब, असहाय, अनाथों को खोज खोज कर अपनाना होगा, भेदभाव की बातों को दफनाना होगा, मनुष्य हैं हम मनुष्यता को अपनाना होगा। यदि अंधेरे का भीषण जंगल हो, न कोई […]
जुबान से मेरी किसी का दिल न दुखे न कभी लेखनी यह, ठेस के भाव लिखे। न निशाना हो मेरा कहीं पर व्यक्तिगत सा न कोई बात बोलूं दिखूँ जो व्यक्तिगत सा। चाह इतनी रखूं […]
सच्चा साथी वही है, जो दुःख में भी साथ दे। हृदय में हो जब संताप, हाथ बढ़ाकर हाथ दे। अमावस सी काली रातों को, जो बना दे चाॅंद रात। ह्रदय में जब शूल चुभें, वो […]
विचार ही तो हैं जो व्यक्तित्व लिखते हैं मेरा, सदविचार उत्साहित कर बाग सींचते हैं मेरा। सकारात्मकता मुझे आशान्वित कर, चाह को मेरी पुष्पित कर पल्वित कर, एक लय देती है, प्रेममय करती है। मगर […]
कविता- भारत रत्न तथा नोबेल —————————————— मेरे बाद ख्वाब सजाएगा कौन, बुझते हुए दिए को जलाएगा कौन, सपना था , भारत रत्न नोबेल का, अब इसे जीतकर लाएगा कौन, अगर मेरा जीवन अधूरा रहा, मेरे […]
गुनगुनाते गीत मेरे जीवन से जुड़े लफ़्ज़ों में बुजुर्गों की दुआओं में, प्रेम की निगाहों में । ममता के अश्कों में, उमड़ते भावों में भर रहे घावों में टूटती चाहों में दर्द में आहों में। […]
जीवन में उत्साह हो मन नाचे बनकर मोर हे युवा ! तू परिश्रम कर सफलता मिलेगी घनघोर अभी तो तूने जीवन की बस एक दोपहरी देखी है अभी तो तूने सावन की बस पहली बारिश […]
दर्द से जियादा हमें दर्द मिला है इश्क किया है जी, हमने इश्क किया है कुछ मिली खुशी तो हमें गम भी मिला है इश्क किया है जी, हमने इश्क किया है
मगन हुआ मन आज है, उछल रहा उत्साह, जीवन जी लूँ खुश रहूँ, खुद पर रख विश्वास। खुद पर रख विश्वास, बढ़ूँ, प्रसन्न रहूँ मन, जो दे ईश उसी में हो संतोष मेरा धन। कहे […]
धन की बातों से बड़ी मन की बात होती है, तन की बातों से बड़ी मन की बात होती है। गरीब आंख में कुछ और बात हो या न हो उनकी आंखों में मगर ईश्वर […]
धन्य है किसान तू जो उगाता अन्न है, भाव है जो दान का उसमें तू ही सम्पन्न है। खोद कर माटी डाल कर के बीज उसमें तूने उगाया, खिलाया तू तो सचमुच धन्य है। रात […]
नाम…. यही तो है हमारी पहचान, हमारे व्यक्तित्व की शान। नाम केवल एक नाम ही नहीं है, एक विशेष शख्सियत है… जिसे जानते हैं हम उस “नाम” से, उसके आचरण से और उसके व्यवहार से। […]
कविता- फोन चोरी हुआ ——————————– सुनो भाई, कब तक गुजारोगे, जीवन में चोरी करके, मेरा या गैरों का- फोन चुरा करके, इस काम से क्या जीवन सुधर जाएगा, चोरी करके – धन से घर भर […]
कोरोना की फिर तेज़ हुई रफ्तार है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है। देश में कोरोना का विस्फोट, फ़िर से हो चुका है अब हम कितने तैयार हैं। वैकसीन भी आई है, कितनों ने लगवाई है?? […]
तलाश तेरी है मेरा पता चले ये नाम मेरा क्यूं अनजान लगे ये काम मेरा इक बोझसा लगे साथी जो बने टिक ना सके चाहा था जिन्हें कबके ओझल हुए दिन हो एकसा यही आस […]
पाकिस्तान दूसरों की बरबादी चाहते खुद बरबाद हो गया उसके राह पर चलने वाले का यही अंजाम होता है अच्छाई फैला कर अमर हो गया जो अदृश्य रहकर भी भलाई का पैगाम देता है देश […]
सिसक रही तन्हाई अब क्या साथी से होगा ? जब मन के घाव बने नासूर तब मरहम से क्या होगा ? हम तो अपने ही घर में हाँ, हो गये एक रोज पराये बन बैठे […]
हमारे परिपक्व बंधन पर था घोर अंधेरा छाया एक भंवरे ने आकर के तेरा हाल बताया तेरी बेचैनी पर मेरी आँख भर आई तेरी नादानी पर मुझको हँसी खूब है आई ये कैसा अल्हण पन […]
आशा भी न थी कि मिल पायेंगे बचपन के कई साल गुजारे साथ दशकों तक सिर्फ याद बन जायेंगे मीठे ख्वाब फिर कहीं गुम जाएगें बहस में पड़ने वाले कई होंगे सामंजस्य बिठाने वाले थोड़े […]
आलोचना का जिम्मा फिर से उठा लिया तूने चल अच्छा है ये काम संभाल लिया तूने साहित्य के मंच पर दूरियां अच्छी नहीं लगती जैसे-तैसे दिल को मना लिया तूने…
जी जला दूँ गीत गाकर फूंक डालूँ स्वर जलाकर भेदभावों को मिटा दूँ, प्रेम भावों को लुटा दूँ। आँसुओं को सब सुखा दूँ, सत्य पर नजरें झुका दूँ, भावनाओं में न बह कर, लेखनी अपनी […]
आओ चलो बिंदास बन निज राह को नवगीत दो, हो उलझनें जिस राह में उस राह को भी गीत दो। कर बांध मुट्ठी बांध लो यदि हो अमावस चाँद दो, रात कर दो दोपहर तुम […]
सुधा बरसे सदा वाणी से, ह्रदय में भी ना कोई गरल हो। कभी किसी का, दिल ना दुखाऊँ मैं मेरी वाणी मीठी और सरल हो। मदद कर सकूॅं पीड़ितों की, ऐसा भाव रहे सदा मन […]
ये दिल… वही क्यूॅं माॅंगता है!! जो अक्सर मिल ना पाए, लब वही क्यूॅं कहना चाहें!! जो अक्सर हम कह ना पाएं। काश!! दिल ही न होता, तो ये दर्द भी ना होता। हम दर्द […]
मेरे अश्क जो गिरे धरा पर, वो चमकीले ओस बने। मुस्कुरा दिए वो दूर से देखकर, मैं मोम सी पिघलती रही.. वो पाहन सम ठोस बने। मेरी सिसकियों में उनको, ठॅंडी पवन का एहसास हुआ […]
साहित्य साहित्य है न हार न जीत है, न जद्दोजहद है, न ही संघर्ष है। न दूसरे पर निशाना है, न कोई बहाना है, साहित्य साहित्य है, संघर्ष नहीं है। साहित्य दर्द है जीवन का […]
कोरोना का कहर हर गली हर शहर फिर से बढ़ रही है यह बीमारी जनता मरती जाती बेचारी आई है वैक्सीन नवेली तुम आज ही लगवाओ सहेली अपनी फिर से करो सुरक्षा फिर से ठप्प […]
यह साहित्य महज चंद लेखनियों का गुलाम नहीं हम जैसे कितने आएगे और कितने जाएगे हर कवि जोड़ेगा एक पन्ना और अनगिनत पाठक पढ़ते जाएगे कुछ ऐसा लिखेंगे हम और कुछ ऐसा कर जाएगे जो […]
स्वयं को निखारना पड़ेगा अभी और अग्नि में तपना पड़ेगा ऐ लेखनी ! अभी तो तुझे दूर तक जाना है पाठक के हृदय में उतरना पड़ेगा इस जिन्दगी के सफर में कोई तो हो आधार […]
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