बेटी घर की शान है, बेटी है अभिमान, बेटी का सम्मान कर, कहना मेरा मान, कहना मेरा मान, उसे भी पढ़ा-लिखा तू, अवसर देकर आज, उसे भी खूब बढ़ा तू, कहे लेखनी मान, उसे खुशियों […]

हो गया है उजाला अब मुझे भान हुआ जब खुली आँख तब सुबह का ज्ञान हुआ। इन चहकते हुए उड़गनों ने बताया, जाग जा अब तो तूने अंधेरा है बिताया, हो गई है सुबह साफ […]

अंधेरे का गीत लिखूं या सुबह की आस लिखूं नींद आ-जा रही है, और कुछ खास लिखूं। स्वप्न हैं पास खड़े इंतजार करते हैं, बन्द आँखों में ही, वे राज करते हैं। बात गम की […]

आंखे तेरी सब कह देती है हाले दिल बयां कर जाती है जो कह नही पाते हो जुबान से वही दर्द वो चुपके से बता जाती है संगी बिन जीना कितना मुश्किल दिल का आर्तनाद […]

पतंगे की कहानी:- ********************** शाम हुई लेकर तम को अपने संग आई, नहीं दिखा कुछ भी मुझको तो माचिस ले आई. जला दिया और गुनगुन करके गीत सुनाया तभी उधर से उड़कर एक पतंगा आया […]

पानी तूने धो दिये, बड़े बड़ों के दाग, तब भी हो पाया नहीं, मेरा मन बेदाग, मेरा मन बेदाग, नहीं कुछ साफ भाव हैं, जूते भीतर कीच, सने गंदले पांव हैं, कहे लेखनी खूब, रही […]

मन अस्थिर करता मुझे, कैसे हो संतोष, खाली खाली आ रहा, खुद ही खुद पर रोष, खुद ही खुद पर रोष, नहीं संतोष मुझे है, सौ ठोकर के बाद, नहीं फिर होश मुझे है, कहे […]

घिस-घिस कर चप्पल बना, जीवन का संघर्ष, खींच रहा पीछे मुझे, कैसे हो उत्कर्ष, कैसे हो उत्कर्ष, चुभ रहे कंटक पथ में, तुझे कहाँ महसूस, बात तू बैठा रथ में, कहे लेखनी चली, जिन्दगी यूँ […]

यक्षिणी की वेदना के शूल:- *********************** प्रश्न करेंगे खुदा से अभी हम क्यूं ना आया है चंदा रोज देखें गली हम… वो नादान है थोड़ा दिल का है नाजुक उसके रस्ते में गुलशन के माफिक […]

हड़बड़ी में कभी-कभी, हो जाती है गड़बड़ी। इसलिए जो भी करना है सोच समझ कर करना है। कोई हमें डराए तो, नहीं किसी से डरना है। सूझ-बूझ से काम करें हम, आए रौशनी मिटेंगे सारे […]

झड़ी लगा दूँगा यहाँ, लिख कर तुझ पर मीत, प्यार मुहब्बत ही नहीं, दर्द भरे भी गीत, दर्द भरे भी गीत, तुझे गाकर कह दूँगा, फूल तोड़कर आज, यहाँ खुशबू ला दूँगा। कहे लेखनी नई […]

खोज रहा है आदमी, अपने को ही आज, मगर नहीं हो पा रहा, होने का अहसास, होने का अहसास, स्वयं मानव होने का, लोभ लालसा हाय बनी कारण खोने का, कहे कलम बेचैन मत रह […]

यह जीवन है वरदान कभी यह जीवन है अभिशाप कभी… मिलते हैं सच्चे मित्र यहाँ तो बन जाते हैं शत्रु कभी… प्रज्ञा’ का जीवन बेमोल रहा तो बन बैठा उपहार कभी… बस रह जाता है […]

💞Women’s Day Special poetry💞 ************************************ महिलाओं की बात निराली, माँ, भगिनी हो या घरवाली …. इनसे ही संसार बसा है दिल में प्रेम अपार छुपा है…. सुंदर सबका रूप सजीला परिधान है इनका रंग-रंगीला…. ये […]

संसार द्वारा रचित तुम्हारी महानता के प्रतिमान वास्तव में षड्यंत्र हैं तुम्हारे विरुद्ध…!! तुम सदा उलझी रही स्वयं को उन प्रतिमानों के अनुरूप ढालने में और वंचित रही अपने सुखों से..!! सुनो वनिता! जब तक […]

होली के रंगों सी मुस्कुराए, दीवाली के दीपों सी जगमगाए, बेटी बनकर घर महकाती है, बहन बनकर लुटाती है स्नेह बनकर वनिता और वधू दूजे का घर अपनाती है। प्रयत्न करती है,सबको सुख देने का, […]

नारी ही तो मूल है, जीवन का आधार, नारी के बिन शून्य है, यह सारा संसार, यह सारा संसार, रचाया नारी ने ही, प्यार, मुहब्बत दया, उपजती नारी से ही, कहे लेखनी समझ, दूर कर […]

नारी तू कमजोर नहीं, तुझमें अलोकिक शक्ति है, भूमण्डल पर तुमसे ही, जीवों की होती उत्पत्ति है। प्रकृति की अनमोल मूरत, तू देवी जैसी लगती है, परिवार तुझी से है नारी, तू दिलमें ममता रखती […]

चुप रहना आता नहीं, बोलूँ कैसे बात, चावल पककर बन गया, गीला गीला भात, गीला गीला भात, हर तरफ पानी पानी, सूखे सूखे होंठ, और मन में नादानी, कहे लेखनी बात समझ मन तू जा […]

तीर न मारो बोल कर, उलाहना के बोल, भीतर बैठा दर्द है, देखो आंखें खोल, देखो आंखें खोल, सत्य स्वीकार करो तुम चुभने वाली बात न करके प्यार करो तुम, कहे लेखनी बोल में उपजे […]

स्वर्णिम किरणों के रेशमी तार मन सबके मनके जैसे वो हार कितना उसको है मुझसे लाड़ सुर संगीत लिए आता सबके द्वार सुनते हैं ऊज्ज्वलता का श्रोत वहीं श्रृष्टि की सुन्दरता का‌ वो ही रथी […]

यूं ही नहीं मिलता किसी का साथ ये तो जन्मों जन्मों की अधूरी आश खेल कूद कर संगी साथी के संग खबर न हुई कब बड़े हो गए कीमती उनकी यादों के तार ने सूने […]

काम होता अवश्य मन में हर्षित रहो सबको शीष नबा कर्म में रत रहो आशीर्वाद से ही जीना होता आसान बड़े सत्य वही जिन्हें छोटों का ध्यान खेल खेल में ही अचरज संभव‌ हुए प्रश्न […]

*एक अंश तुम्हारा मुझमें है, तुम शायद जान नही पाए। हर पल मैं तुममे दिखता हूँ, तुम शायद मान नहीं पाए।।* अब कैसे मैं तुमको दिखलाऊं ये सपना नहीं हकीकत है जीवन का हर एक […]

मैं भीष्म नहीं ना अर्जुन हूँ ना और कोई अंदाज़ मेरा तेरे जीवन पर न्यौछावर ये सपनो का संसार मेरा अब साथ नहीं तो लगता है जीवन को जान नहीं पाए *हर पल मैं तुममे […]

❤ गुलदावरी के पुष्प ❤ ++++++++++++++++++++ गुलदावरी के पुष्प खिलने लगे हैं हम तुमसे ख्वाबों में मिलने लगे हैं। तपती हुई धूप में बनकर ठंड का मौसम देह की मिट्टी पर ओस की बूंदों-से कुछ […]

अलबेली यह रात नवेली कुछ हमसे कहने आई है, मीठे-मीठे प्यारे-प्यारे संग में सपने लेकर आई है। मैं मूंदूँ और खोलूँ पलकें, नींद नहीं आती फिर भी जाने क्या खोया है मैंने ! और जाने […]

सुंदरता के प्रति हमारा उन्माद इतना अधिक रहा है कि हमनें तकनीकों का सहारा लेकर हर वस्तु को सुंदर बनाने का भरसक प्रयास किया…!! जबकि हमें बदलनी चाहिए थी अपनी दृष्टि जो रचती है भेद […]

जिन्दा रहते हैं मोहब्बत के एहसास, करते हैं सदैव हृदय में वास। महकते हैं गुल बनकर यादों में, नहीं मोहताज हैं किन्हीं वादों के। बहुत खास होते हैं ये एहसास, प्रिय के पास होने का […]

खाली क्यों हो सोचते, उल्टी बातें आप। चाहत को नफरत समझ, क्यों लेते हो पाप, क्यों लेते हो पाप, मुहब्बत पुण्य काम है, जो रखता है नेह, वही सच में महान है। कहे लेखनी आप, […]

प्रिय 2020 तेरी विदाई में अब क्या शब्द कहूं, हंगामेदार मौजूदगी की बातें किस मुंह से कहूं। कभी सुना और सोचा भी नहीं वो सब घट गया, तेरे काल में कोरोना का भारी आतंक मच […]

हद में रह ज्यादा न बोल फट जाए कहीं जैसे कोई ढोल बड़ा या छोटा समझ तो रख तूं है क्या निज को परख पिता हैं तेरे आंखें न‌ दिखा पुत्र तैयार खड़ा तेरा लौटाने […]

बड़े का नाम बहुत ही है दुनियां में छोटी चीजें पर खुशी का‌ है कारण नन्हीं नन्हीं चिड़िया जमी पर फुदकती हुई कितनों के मन को करती थी हरण आज उनके बिना सुबह सूनी लगती […]

अप्रमेय तथ्य है सदा से ही अविकल्प जीवन में शांति उन्हीं से पर है कायम प्रमाण सदन तो कुंठा से ही भरे हुए जीवन अवसाद का जो सदा बने कारण न्याय नाम से मची है […]

घर आया है रात का पंछी करने लाख सवाल होठों पर अनुपम हिंदी हाथों में है गुलाल। रंग डालेगा शायद मुझको मनसा उसकी लगती है गीली-गीली उसकी आंखें थोड़ा मुझको लगती है। बैठ गया है […]

मेरी नन्ही सी गुड़िया खिलौनों से खेलते खेलते न जाने कब बड़ी हो गई! आज जब देखी उसकी हाथों में चूड़ियां सिर पर लाल चुनर तो समझ में आया। जो आंगन में फुदकती रहती थी, […]

जाने क्यों कुछ अल्फाज सिसकते रहते हैं हम तुम्हारी यादों में महकते रहते हैं यूं तो हमारी मोहब्बत की पूजा करता है जमाना पर जब भी हम एक होना चाहते हैं तो लोग बेबुनियाद इल्जामों […]

❤ गुलदावरी के पुष्प ❤ ++++++++++++++++++++ गुलदावरी के पुष्प खिलने लगे हैं हम तुमसे ख्वाबों में मिलने लगे हैं। तपती हुई धूप में बनकर ठंड का मौसम देह की मिट्टी पर ओस की बूंदों-से कुछ […]

अलबेली यह रात नवेली कुछ हमसे कहने आई है, मीठे-मीठे प्यारे-प्यारे संग में सपने लेकर आई है। मैं मूंदूँ और खोलूँ पलकें, नींद नहीं आती फिर भी जाने क्या खोया है मैंने ! और जाने […]

मनु मनु तू दौड़ता रह निरंतर गलत, सही का कर अंतर ठोकरें मिलेंगी अनन्तर गिर, उठ फिर चल निरंतर मनु तू कौशिश कर निरंतर हार जीत में ना कर अंतर मौक़े और मिलेंगे अनन्तर हिम्मत […]

कुछ एहसास हैं जो आकर ठहर गये हैं ज़बान की नोंक पर… होंठो की सीमाएँ लाँघने को आतुर, बस उमड़ पड़ना चाहते हैं एक अंतर्नाद करते हुए…!! मगर उन एहसासों के पैर बंधे हुए हैं […]

यूं मोहब्बत की नुमाइश की नहीं जाती दिल की ख्वाहिश सरेआम की नहीं जाती. ********************************** समझता है बेशर्म ये सारा जमाना, इसी वाइस दिल की बातें बेपर्दा की नहीं जाती.

मैं दौड़ती ही जा रही थी, ज़िन्दगी की दौड़ में। कुछ अपने छूट गए इसी होड़ में। मैं मिली जब कुछ सपनों से, बिछड़ गई कुछ अपनों से। दौड़ती जा रही थी मैं, किसी मंज़िल […]

हिम्मत तो देखो ज़ुबान की, कैंची जैसी चलती है, बत्तीस दांतों घिरी होकर भी निडर हो मचलती है। बिना हड्डी की मांसल जीभ, कई कमाल करती है, फंसा दांत में तिनका, निकाल के ही दम […]

नेकी कर दरिया में डाल, यह कहावत बड़ी कमाल। आओ सुनाऊं एक कहानी, नेकी करने की उसने ठानी। उस ने नेकी कर दरिया में डाली, वह नेकी एक मछली ने खा ली। नेकी खाकर मछली […]

लाख समझाने पर भी, गली-बाजार में भीड़ करें, बिना मास्क खुल्लमखुल्ला सबसे वार्तालाप करें। सेनेटाइजर का इस्तेमाल, हाथ धोना भी बंद करें, आओ साथी हम भी मरें, औरों का इंतजाम करें।। बार-बार हाथ धो कर, […]

हवा में उड़ाओ पतंग, खुद को जमीं पे खड़ा रखो। दान धर्म करके बंधुवर, अपना दिल भी बड़ा रखो। घमण्ड रुपी पतंग कटवाकर, सपनों को बुलंद रखो। रंग-बिरंगी पतंगों जैसा , परचम अपना लहराए रखो। […]

बम लहरी, बम बम लहरी (शिव महोत्सव विशेष) शिव शम्भू जटाधारी, इसमें रही क्या मर्जी थारी, सर पे जटाएं, जटा में गंगा, हाथ रहे त्रिशूलधारी। गले से लिपटे नाग प्रभू, लगते हैं भारी विषधारी, असाधारण […]