जब मिलीं दो युगल आँखें अधर पर मुस्कान धर के। गा उठे टूटे हृदय के भ्रमर मधुरिम तान भर के। सर झुकाकर दासता स्वीकार की अधिपत्य ने। गर्मजोशी जब परोसी अतिथि को आतिथ्य ने। यूँ […]

मुस्कुरा कर बोलना, इन्सानियत का जेवर है। यूं तेवर न दिखलाया करो, हम करते रहते हैं इंतज़ार आपका, यू इंतजार न करवाया करो। माना गुस्से में लगते हो, बहुत ख़ूबसूरत तुम पर हर समय गुस्से […]

सब्र की जरूरत है, समय सब कुछ बदलता है। परिवर्तनशील इस संसार में, सांझ तक सूर्य भी ढलता है। जीवन में श्रेष्ठ कर्म करो, यह रामायण सिखाती है। द्वेष,बैर भाव और लालच को, महाभारत दर्शाती […]

एक युवती बन कर बेटी, मेरे घर आई है। अपने खेल खिलौने माँ के घर छोड़कर, हाथों में लगाकर मेहंदी और लाल चुनर ओढ़ कर मेरे घर आई है। छम छम घूमा करती होगी, माँ […]

मां बाप को बच्चों के भविष्य की चिन्ता, महंगे से स्कूल में एडमिशन की चिन्ता। स्कूल के साथ कोचिंग, ट्यूशन की चिन्ता, शहर से बाहर हाॅस्टल में भर्ती की चिन्ता।। जेईई, नीट, रीट कम्पीटीशन की […]

कान्हा ने बोला राधा से, तेरी ये अखियां कजरारी। मन मोह लेती हैं मेरा प्यारी, इठलाती फिर राधा बोली। मोहन तुम्हारी मीठी बोली, हर लेती है हिय को मेरे, भागी भागी आती हूं सुन, मीठी […]

क्रोध हर लेता है मति, करता है तन-मन की क्षति। क्रोध की ज्वाला में न जल, क्रोध तुझे खाएगा प्रति पल। क्रोध का विष मत पीना, मुश्किल हो जाए जीना। छवि नहीं देख पाता है […]

जब हर ओर निराशा हो, आशा की किरण दिखा देना। जब राहों में हो घोर निशा, दीपक बन कोई राह दिखा देना। कोई साथ दे ना दे, तुम अपना हाथ बढ़ा देना। दर्द में जब […]

जंगल का दोहन कर डाला, इन्सान तेरे लालच ने। कुदरत के बनाए पशु-पक्षी भी ना छोड़े, इन्सान तेरे लालच ने। हाथी के दांत तोड़े, मयूर के पंख न छोड़े मासूम से खरगोश की नर्म खाल […]

अरमानों से सींच बगिया, जाने तुम कहां गए। अंगुली पकड़ चलना सीखाकर, जाने तुम कहां गए।। सच्चाई के पथ हमको चलाकर, जाने तुम कहां गए। हमारे दिलों में घर बनाकर, जाने तुम कहां गए।। तुम […]

किस मोड़ पर मंज़िल कर रही है इन्तज़ार, क्या पता … किस राह में हो जाए दीदार-ए यार क्या पता… जीत एक रास्ता है, हार एक अनुभव है जीवन का। कल क्या हो, किसी को […]

भवन बनाए आलीशान, फ़िर भी उसके रहने को नहीं है उसका एक मकान। झोपड़पट्टी में रहने को मजबूर है हाँ, वह एक मज़दूर है। मेहनत करता है दिन रात, फ़िर भी खाली उसके हाथ। रूखी- […]

मानो तो मोती ,अनमोल है समय नहीं तो मिट्टी के मोल है समय कभी पाषाण सी कठोरता सा है समय कभी एकान्त नीरसता सा है समय समय किसी को नहीं छोड़ता किसी के आंसुओं से […]

आखिर इक दिन सबको जाना है यह जग चला चली का मेला है यहाँ किसी का नही ठिकाना है फिर किस बात का घबराना है बस इतना सा हमारा अफ़साना है आख़िर इक दिन सबको […]

हम भ्रम पाल लेते हैं, “मैंने ही उसे बनाया है”, कभी सोचा तूने, भू-मण्डल किसने बसाया है। भाई ये सब कर्मानुसार ही, ब्रह्मा की माया है, कोई सूरमा आज तक, अमर नहीं हो पाया है।।

सोंच अलग है याददाश्त विलग है अपनी चाहतों के लिए वो आज हमसे अलग हैं लाखों जमा कर दोस्तों ने सारी उम्र की कमाई गवांई शहर की छोटी जमी के लिए वहीं पे सारी सुविधाएं […]

ख़ुद पर ऐतवार कर पर भूलकर भी न किसी पर विश्वास कर। खुद के ही बल पर अपने जीवन की रूपरेखा तराश कर।। कब कोई अपना,अपनी अंगुली को घुमा,तोहमत तुझपे लगा देगा तेरी हर जायज़ […]

लफ़्ज़ों की कमी थी आज शायद या रूह में होने वाले एहसास की 💐💐💐💐💐💐💐💐 नही पता मुझको कहानी तेरी शायद बस इतना जानती हूं कि वजूद को तेरे 💐💐💐💐💐💐💐💐 तूझसे ज्यादा जानती हूं शायद ख्वाबबगाह […]

सुन्दर सपने देख रही थी, अपनी माँ की कोख में। मात-पिता का प्यार मिलेगा, भाई का भी स्नेह मिलेगा यह सब सुख से सोच रही थी, सहसा समझ में आया कि एक कैंची मुझको नोंच […]

अपनी माँ को छोड़ कर, वृद्धाश्रम के द्वार पर। जैसे ही वो बेटा अपनी कार में आया, माँ के कपड़ों का थैला, उसने वहीं पर पाया। कुछ सोचकर थैला उठाकर, वृद्धाश्रम के द्वार पर आया। […]

आतंकियों के ठिकाने बदल रहे हैं शिकारियों के पैमाने बदल रहें हैं छिप-छिप के करते थे कभी ठगी जो लालच के उनके आशियाने बदल रहे हैं भोले-भाले को ठगना ही जिनका काम चींटियों की तरह […]

सारे व्यापार को तेरा आधार संबंधों में भी तुझसे ही है प्यार तुझमें ही सब और सबमें प्रकट तूं फिर भी सब में क्यूं भरा मैं मैं व तूं तूं पल पल के मीत जाते […]

गांव गांव में मारी जाती, बेटी मां की कोख की, बेटी मां की कोख की, बेटी मां की कोख की।। जूही बेटी, चंपा बेटी, चन्द्रमा तक पहुंच गई, मत मारो बेटी को, जो गोल्ड मेडलिस्ट […]

सब फूलों ने मिलकर, महफ़िल एक सजाई। किस की सबसे सुन्दर रंगत, और किस की महक मन भायी। बेला चमेली और मोगरा ने महक कर, वेणी खूब सजाई। गेंदा और गुलाब ने, मन्दिर में धूम […]

सागर ने सरिता से पूछा, क्यों भाग-भाग कर आती हो। कितने जंगल वन-उपवन, तुम लांघ-लांघ कर आती हो। बस केवल खारा पानी हूं, तुमको भी खारा कर दूं। मीठे जल की तुम मीठी सी सरिता, […]

हे मानव तेरी फितरत निराली, उलट पुलट सब करता है, बंद कमरे में वीडियो बनाकर, जगजाहिर क्यों करता है? शादी पार्टी में खाना खाकर, भरपेट झकास हो जाता है, बाहर आकर उसी खाने की, कमियां […]

आज होली जल रही है मानवता के ढेर में। जनमानस भी भड़क रहा नासमझी के फेर में, हरे लाल पीले की अनजानी सी दौड़ है। देश के प्यारे रंगों में न जाने कैसी होड़ है।। […]

हवाओं ने मौसम का, रूख़ बदल डाला। बसन्त के आगमन का, हाल सुना डाला। नवल हरित पर्ण झूम-झूम लहराए। रंग-बिरंगे फूलों ने, वन-उपवन महकाए। बेला जूही गुलाब की, सुगंधि से हृदय हर्षित हुआ जाए। कोमल-कोमल […]

पारिजात के फूल झरे, तन-मन पाए आराम वहां। स्वर्ग से सीधे आए धरा पर, ऐसी मोहक सुगंधि और कहां। छोटी सी नारंगी डंडी, पंच पंखुड़ी श्वेत रंग की। सूर्य-किरण के प्रथम स्पर्श से, आलिंगन करते […]

जब कभी भी टूटे ये तंद्रा तुम्हारी, जब लगे कि हैं तुम्हारे हाथ खाली! जब न सूझे ज़िन्दगी में राह तुमको, जब लगे कि छलते आये हो स्वयं को! जब भरोसा उठने लगे संसार से […]

“बदली जो उनकी आंखें इरादा बदल गया। गुल जैसे चमचमाया कि, बुलबुल मसल गया। यह कहने से हवा की छेड़छाड़ थी मगर खिलकर सुगंध से किसी का, दिल बहल गया।” सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की, […]

किसी की सिसकियां सुनती थी अक्सर, कोई दिखाई ना देता था। देखा करती थी इधर-उधर, व्याकुल हो उठती थी मैं, लगता था थोड़ा सा डर। एक दिन मेरा मन मुझसे बोला.. पहचान मुझे मैं ही […]

कहती है निशा तुम सो जाओ, मीठे ख्वाबों में खो जाओ। खो जाओ किसी के सपने में, क्या रखा है दिन-रात तड़पने में। मुझे सुलाने की कोशिश में, जागे रात भर तारे। चाँद भी आकर […]

दर्द बनके आँखो के किनारों से बहती है! बनकर दुआ के फूल होंठो से झरती है!! देती है तू सुकून मुझे माँ के आँचल सा! बनके क़भी फुहार सी दिल पे बरसती है!! खुशियाँ ज़ाहिर […]

मूसलाधार बारिश से जब, बर्बाद हुई फ़सल किसान की बदहाली मत पूछो उसकी, बहुत बुरी हालत है भगवन्, धरती-पुत्र महान की। भ्रष्टाचार खूब फैल रहा, काले धन की भी चिंता है। मगर किसी को क्यों […]

मनचले ने रुपसी पर, तंज कुछ ऐसा गढ़ा, काश जुल्फ़ों की छांव में, पड़ा रहूं मैं सदा। रुपसी ने विग उतार, उसे ही पकड़ा दिया, ले रखले जुल्फ़ों को तू, पड़ा रह सदा सदा।। फेसबुक […]

वह पढ़ना चाहता है जीवन से लड़ना चाहता है। आगे बढ़ना चाहता है किंतु क्या रोक रहा उसको, कोई टोक रहा उसको बाप कहे कुछ कर मजदूरी, ऐसी भी क्या है मजबूरी चंद सिक्कों की […]

वो बूढ़ी थी, गरीब थी भीख नहीं मांगी थी उसने, पैन बेच रही थी राहों में मेहनत का खाने की ठानी, मेहनत का ही खाती खाना मेहनत का ही पीती पानी। कहती थी यह पैन […]

काँव काँव मत करना कौवे आँगन के पेड़ों में बैठ तेरा झूठ समझता हूं मैं सच में है भीतर तक पैठ। खाली-मूली मुझे ठगाकर इंतज़ार करवाता है, आता कोई नहीं कभी तू बस आंखें भरवाता […]

मनुष्य हो तुम मनुष्यता सदैव पास रखो पाशविक वृत्तियों को पास आने न दो। दया का भाव रखो प्रेम की चाह रखो ठेस दूँ दूसरे को भाव आने न दो। दया पहचान है कि आप […]

इतना अच्छा या बुरा नहीं हूँ, जितना कि दुनिया कहती है । मैं कैसा हूँ, ये सिर्फ व सिर्फ मैं जानता हूँ ।। ———————————————– मैं खूद के सवालों के कठघड़े में सदा खड़ा रहता हूँ […]

प्रकृति की शोभा से बढ़के कोई शोभा न होता रब तेरे जैसा यार जहां में कोई ना होता ।। ————————————————– हरिश्चन्द्र की शोभा, तु सत्य बनके आया राम बनके तुमने, सुग्रीव को उबारा सुदामा की […]

मेरा कुछ भी नहीं है, मुझमें राम सब-कुछ तेरा ही तेरा है राम बस देना साथ हमें सदा राम हम हैं तुम्हारे, तुम हो हमारे राम ।।1।। ——————————————— एक तेरा ही रूप फैला है कण-कण […]

अंधा ना कहो आँखों वालों, मुझे नेत्रहीन ही रहने दो। आँख नहीं ग़म का सागर है, कुछ खारा पानी बहने दो। तुम क्या समझो आँखों का न होना, एक छड़ी सहारे चलता हूं। अपने ही […]

फूलों के बिस्तर पर जन्मा पला बढ़ा उल्लासों में । जिसको प्रचुर मिली सुविधाएं डूबा भोग विलासों में । है भूमिका भाग्य की लेकिन अथक परिश्रम किए बिना, कोई नहीं महान बना है अब तक […]

26 जनवरी, 15 अगस्त, देश भक्ति जगाओ, झण्डे फहराओ, बलिदान पर “उनके”, तुम इतराओ, फिर भूल जाओ भूल जाओ।। नारी दिवस, बालिका दिवस, कविता सुनाओ, मंच सजाओ, मौका मिले तो दानव बन जाओ, फिर भूल […]

आज फ़िर चाँद परेशान है, प्रदूषण में धुंधली हुई चाँदनी तारे भी दिखते नहीं ठीक से, आज आसमान क्यों वीरान है। आज फिर चाँद परेशान है। प्रदूषण का असर, चाँदनी पर हुआ चाँदनी हो रही […]

अन्न उपजाऊं फिर खाना खाऊं, जन्म ले लिया किसान के देश कहे अन्नदाता मुझको, बैठा हूं सड़कों पर शान से। दिल्ली के बॉर्डर पर पड़ा हूं, अपने हक की खातिर मैं खेत छोड़ बॉर्डर पर […]

पर्वतों की गोद से निकल, झरने का जल बह चला। मिलन करूं मैं धरा से, यह कह कर चला। मिलन हुआ धरा से, पर उस मिलन में, घना ताप सहकर जल बना वाष्प,बने मेघ और […]