असम्भव है तुम्हें परिभाषा के दायरे में बांधना.. तुम हो वो सागर, जिसमें विलीन होता है व्याकुलता का दरिया.. या निष्प्राण मन के भीतर बसी नीरवता को चीर के उपजी स्नेहमय अनुगूँज..!! एक बजंर हृदय […]
असम्भव है तुम्हें परिभाषा के दायरे में बांधना.. तुम हो वो सागर, जिसमें विलीन होता है व्याकुलता का दरिया.. या निष्प्राण मन के भीतर बसी नीरवता को चीर के उपजी स्नेहमय अनुगूँज..!! एक बजंर हृदय […]
फ़ागुन में एक गीत सुनाऊँ, आओ तुम्हे मन-मीत सुनाऊँ। दिल में है जो प्रीत सुनाऊँ साँझ हो चली दीप जलाऊँ। चादर ओढ़े लालिमा की, साँझ सुहानी जाने लगी है। दीपक की रौशन लौ से, एक […]
गजल – इस पार या उस पार | जो चाहो वो मिल जाये ऐसा होता नहीं | हार कर भी कोई लड़ता मगर रोता नहीं | मिल जाती मंजिल यूं ही पा लेते सभी | […]
आज की नारी, सीमित नहीं है घर की चार दिवारी तक। तन से कोमल मन से सशक्त है नारी … निभाए दोहरी ज़िम्मेदारी। शिक्षा, चिकित्सा का क्षेत्र हो, या हो फिर विज्ञान। आज की नारी […]
प्री बोर्ड की परीक्षा का, परिणाम जब आया उसने अपेक्षा से कम ही अंकों को पाया। “क्यों अंक अच्छे नहीं आए हैं तेरे” वह खाता था डाँट पिता से साँझ और सवेरे। रोज़-रोज़ की डाँट […]
नैना मूंद मूंद जा सोना नहीं वे सोना नहीं काटे जग बैरी तो रोना नहीं वे रोना नहीं किस जहाँ में ले आ गयी है हवाएँ इस जहाँ में होते हैं अपने पराये मतलब की […]
सब कुछ सिखा देगा इंटरनेट मगर संस्कार तो घर से ही सीखने होंगे, छोटे बच्चों को खेल लगाना, उनकी चाहत को पहचानना, उनकी भूख-प्यास का अहसास ये सब तो सीखने ही होंगे। बुजुर्गों का अदब, […]
खिल गई है सुबह जाग जा अब पथिक हाथ-मुँह धो ले, न कर आलस अधिक। काम पर लग गई है दुनिया चींटीं से लेकर हाथी तक अपना चुके हैं, मेहनत का पथ। उड़गन भी नित्यकर्म […]
जो दान भूखे को दे सकेगा असल में सच्चा धनी वही है, जमा किया बस जमा किया तो वो सच में कुछ भी धनी नहीं है। कमाओ लाखों करोड़ों चाहे, जरा सा उसमें से दान […]
दर्पण कब खुद सजता है, दर्पण के आगे हम सजें। चाँद रहता है गगन में, पर मुझे लगे उतरे मेरे आँगन में हर रात को जब मैं सो जाऊं, वो रजत छिड़कने आ जाए तारों […]
तू रंग कैसा लगा गया है मुझ में तो मधुमास सा आ गया है। ये पीले-पीले व लाल फूलों से मेरा तन-मन सजा गया है। खिला के भीतर के फूल मेरे रंगों का उपवन सजा […]
अगर मैं रूठूँ मुझे मनाना, अगर मैं टूटूँ मुझे उठाना, सहारा मेरा बने मैं तेरा, यही तो जीवन का है फ़साना। अगर है दूरी तो पास लाना, जरा सा मनुहार से बुलाना, मीठी सी लोरी […]
जो राह सच्ची चलेगा मित्रों भले ही गाली वो लाख खाये मगर है ईश्वर का न्याय ऐसा, हमेशा सच ही सैल्यूट पाये। कभी भी जीवन में तुम किसी का बुरा न करना, बढ़े ही जाना, […]
तू टिमटिमा मत चमकते तारे बिना रुके रोशनी दिखा दे, अंधेरा घनघोर सा घिरे जब तू कर उजाला मुझे सिखा दे। चलूँगा कैसे अंधेरी राहें, मुझे तू सारी कला सिखा दे, मनाने प्रीतम को क्या […]
ये गुनगुनाहट कहाँ हुई है जो लेखनी ने बयान की है, जो ध्वनि सुनी थी कभी मुहोब्बत की आज फिर से सुनाई दी है। निगाहों से मिलने को निगाहें पलक झपकते मिला ही दी हैं। […]
पता नहीं कहाँ खो गई, वह छोटी सी प्यारी सी चिरैया। फिर से खेलने, फुदकने को, आँगन में आओ प्यारी गौरैया। किस की बुरी नजर है तुम पर, यह हमको बतलाओ। चीं-चीं चूँ-चूँ करने को, […]
इतना आसान नहीं होता किसी अपने से बिछड़ जाना जलाना हर रोज दिल को पड़ता है। याद आती है उसकी रह-रह कर फिर भी भूल जाना पड़ता है। भूल जाने की जद्दोजहद में दिल के […]
आज आसमान छूने को जी चाहता है मेरा, मगर यह दिल रोक लेता है। क्योंकि आसमान पाने की ख्वाहिश में कुछ अपने छूट जाएंगे।।
गौरैया, जाने कहाँ उड़ गई तुम अपने मखमली परों में बाँध के वो सुबहें, जो शुरू होती थी तुम्हारी चहचहाहटों के साथ और वो शामें, जब आकाश आच्छादित होता था तुम्हारे घोसलों में लौटने की […]
बाजार में प्रविष्ट करते ही छोटे-छोटे बच्चे पीछे लग जाते थे, बाबू जी दे दो, माताजी दे दो, भैया जी दे दो, दीदी जी दे दो। स्कूल का समय होता लेकिन वे माँग रहे होते। […]
अभिलाषा और ईर्श्या में, रात-दिन सा अंतर जानो तुम। अभिलाषा मजबूत रखो, ईर्श्या से दिल ना जलाओ तुम।। चादर जितने पांव पसारो, पांव अपने ना कटाओ तुम।। अपनी मेहनत से चांद पकड़ो, उसे नीचे ना […]
बिम्ब बनाना चाहता हूँ तेरा आकाश, मगर कहाँ से शुरू करूँ सोच रहा विश्वास। सोच रहा विश्वास, इस कदर विस्तृत है तू आदि अंत का नहीं पता बस विस्तृत है तू। कहे लेखनी भानु, चमकता […]
नींद आये अगर आपकी आंख में तब समझना कि संतोष जीवन में है, नींद उड़ जाये तब सोचना आप यह, मन के भीतर भरा कोई बोझ है, या किसी बात भर गया सोच है, कहीं […]
कौन सुनाए गीत मुझे मन भाए बहुत संगीत। गुन गुन करते भँवरे ने बोला चूँ चूँ करती चिड़िया ने चहका, मन के भीतर पुष्प सा महका, जब आया मेरा मीत, मुझे मन भाये बहुत संगीत […]
ठेस न दे मुझे आली तेरी यह रंग भरी पिचकारी। श्वेत पहनकर, निकला था घर से तूने निशाना दे मारी, रंग भरी पिचकारी। मन गीला कर, तन गीला कर वसन सभी रंगों से तर कर […]
गाऊँ गीत, भरूँ रंग मन में होली मनाऊँ, प्रीतम संग में। लाल रंगाऊँ प्रीति की चोली पीत-हरे से खेल लूँ होली। रंग उड़ाओ मारो न बोली आओ ना हम संग खेलो होली। तन मन रंगों […]
ख़ामोशी की तह में, छिपा कर रखते हैं हम, अपने सारे ग़म। क्योंकि कर के कोलाहल, दिखाकर दुःख दर्द अपने नहीं मिटेंगे अन्धेरे ज़िन्दगी के। पीना ही पड़ता है, ख़ामोशी का हलाहल ज़िन्दगी के कुछ […]
नफ़रतों के बीज बोकर, प्रेम की फ़सलें उगाना। कैसे सम्भव हो सकेगा, यह जरा हमको बताना। शूल बो कर शूल उगेंगे, फूल बो कर फूल उगेंगे। यह तो प्रकृति का नियम है, इसमें कैसा है […]
वो दिन भर मेहनत करते हैं, रात को सड़कों पर शयन करते हैं। ऊपर से पाला पड़ता है, नीचे से शीत लगती है, मेहनतकश की जिंदगी, कठिन गीत लिखती है। सपने में गुनगुनाता है, रोकर […]
जीवन यापन के लिए बहुधा व्यक्ति को वो सब कुछ करना पड़ता है , जिसे उसकी आत्मा सही नहीं समझती, सही नहीं मानती । फिर भी भौतिक प्रगति की दौड़ में स्वयं के विरुद्ध अनैतिक […]
ऐसी सुना दे पंक्तियाँ जो मधुर रस सींच दें, रंग के त्यौहार में रंगीनियों को सींच दें। अश्क सारे सूख जायें होंठ गीले से रहें, नैन में काजल लगा हो खूब नीले से लगें। गाल […]
बात केवल सच की हो, सच का हो सम्मान, झूठ त्याग दे आज ही, बात समझ इंसान। बात समझ इंसान, राह सच की अपना ले, सच पर चल कर राह स्वयं की आज बना ले, […]
करो परिश्रम कठिनाई से, जब तक पास तुम्हारे तन है । लहरों से तुम हार मत मानो, ये बात सीखो त जब मँक्षियारा नाव चलाता, विचलित नहीं होता वह विपरित धाराओं से । लाख सुनामी […]
नींद में इस कदर न खो जाओ ओ युवा! श्रम करके बढ़ जाओ, छोड़ आलस्य की सभी बातें, कर्म करने की ओर लग जाओ। भूख मेहनत की आज सोने न दे, हौसला एक पल भी […]
नींद तू रात को सताना मत, ऐसे सपनों को तू दिखाना मत, टूट कर गम मुझे बहा जाये, दर्द ऐसा हो जो सहा जाये, बोल ऐसा हो जो मैं कह पाऊं, रोल ऐसा हो जो […]
ज़िन्दगी की राहें, सदा कुछ सिखाती ही जाएँ। कुछ लोग हाथ पकड़ कर, काम निकाल, छोड़ दें झटक कर। पकड़ कर राह सच्चाई की, कुछ निभाएँ साथ भी। रंग-बिरंगी दुनिया है यह, रंग सभी दिखलाते […]
कठपुतली तो देखी होगी ना…. हाँ, वही काठ की गुड़िया। जिसकी डोर रहती है सूत्रधार के हाथों में, वह अपनी उँगलियों से जैसे चाहे, उसे नचाता है…. दर्शकों को भी आनन्द आता है। लगता है […]
राशिफल पढ़ते रहे हम उम्र भर खुद ब खुद कुछ भी नहीं हो पाया है, जो मिला मेहनत का फल था दोस्तो !! बिन किये कुछ भी नहीं हो पाया है। मन की आशाएँ धरी […]
सामने बोल भी नहीं पाये आँख हम खोल भी नहीं पाये था वजन बात में भरा कितना उसको हम तोल भी नहीं पाये। आँख चुँधिया गई थी जब अपनी धूल औरों में झोंक कर आये, […]
जल बरसा आकाश से, तृप्त हो गई भूमि, पौधे फिर से जी उठे, हरी हो गई भूमि। हरी हो गई भूमि, आज रौनक प्यारी लिख, उग आई खुशहाली लेकर सुन्दर नख-शिख। कहे लेखनी रंग भरे […]
गरम चाय पीने से ताजगी आती है, तुम्हारे व्यक्तित्व की सादगी भाती है। सवेरा भी जरूर होता है राह दिखाने को अंधेरा भी मिटता है, रात भी जाती है। मेहनत का फल जरूर मिलता है, […]
कैसे जिया जाए यह जीवन नीरस-नीरस लगता जीवन | बह जाती है सांस कहीं तो बह जाती है धड़कन | रूठ जाएं कभी सारे अपने बन जाएं कभी गैर भी अपने | उपजे मन में […]
मैं तुम्हें फिर मिलूंगी किसी टूटे दिल के अनगिनत टुकड़ो में, किसी गरीब की फटी हुई झोली की सच्चाई में, एक कटी पतंग की बेसहारा होती उम्मीदों में मैं तुम्हें फिर मिलूंगी…. कांच के उन […]
विश्वसनीयता *************** आज डायरी के अथाह पन्ने पलटने के बाद मिला मुझे एक ऐसा शब्द जिसके मायने ढूंढने, समझने और समझाने में जमाने गुजर गये विश्वसनीयता’ क्या है ?? किसमें है ?? किस पर है […]
ओह !! कितनी मेहनत करनी पड़ती होगी तुम्हें यह सब करने में ! कितना वक्त जाया होता होगा ! सच में मैंने तुम्हारी जिंदगी में दस्तक देकर, तुम्हारी आसान राहों को कितना मुश्किल बना दिया… […]
कुछ सिसकिंयाँ सिमट कर बिखर गईं फिर से तुम्हारी याद आ गई जब रोया करते थे तुम्हारे कंधे पर सिर रखकर वो पल अब कहाँ खो गये ?? बेशुमार दौलत है अपने पास आज पर […]
मुस्कान आपकी खिले फूल जैसी, भुलाने सक्षम है गम हमारे। वाणी में इतना मीठा भरा है, विरोधी भी हो जाते हैं तुम्हारे। चमकता हुआ बल्ब बोलूँ न बोलूँ, मगर इस अंधेरे में हो तुम दुलारे। […]
अब ना ढूंढना कभी मुझे मन के उजालों में अंधकार की ओर बस एक कदम बढ़ा लेना बिखरें हों जहाँ कंटक बेशुमार बस वही पर मेरा निशान मिलेगा… अब ना ढूंढना कभी मोतियों की चादर […]
क्यों अपनों के बीच अपनेपन का एहसास नहीं होता क्यों वो हर एहसास खास नहीं होता कुछ तो कमी होगी मेरे ही अन्दर, जो कोई अपना होकर भी साथ नहीं देता….
धर्म आंतरिक जागृति है संवेदना का अहसास है अंतर्मन अगर साफ है मजहब हमेशा पास है शांति संदेश के लिए समूह प्रेम का एकल स्वतंत्र विचार है जीवन सरल सीमित सबका भंडारण के लिए आचार […]
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