पलकों पर सजे थे सपनें मैं थी नींद के आगोश में, वो आया सपनों में मेरे बोला मुझसे हौले से; पी लो रानी! प्रेम का प्याला मैं चाँद निचोड़ के लाया हूँ तेरी खातिर आसमान […]

नाखूनों से नोंच जमीं मैंने बोया है मेहनत का बीज हलधर हूँ कहलाता चाहे कह लो पीर-फकीर पीता हूँ कुआं खोदकर पानी बीती निर्धनता में जवानी पर अपनी मेहनत से भरता हूँ मैं सबका पेट […]

तुम्हारी मौजूदगी को नजरंदाज करता है दिल बड़ी मुश्किल से संभलता है दिल साँसों से ज्यादा तेरी धड़कन में हूँ यही आजकल महसूस करता है दिल जब तू होता करीब तो थमती हैं साँसें और […]

आज अपनी बात करो मेरी बात रहने दो नींद नहीं है आती एक अर्से से मुझे जुल्फों में सुला लो तहकीकात रहने दो मुलाकातों के गुल खिला लेंगे किसी और दिन मुझे अपने ख्वाबों में […]

आवारगी में हम क्या से क्या कर गये ! देते रहे मोहब्बत और हम बेवफा हो गये, जाने कैसे डूबा तेरी आँखों में मैं ! सपने सारे टूटे, हम जुदा हो गये अब डर नहीं […]

फूलों ने पंखुड़ियों का हार बना कर पहना है प्रकृति की हरियाली का आज यही बस कहना है परियों के गहनों में सोने के बूटे पड़े हैं हम पत्तों के हारों में ओस मोती जड़ें […]

मन उड़ान तेरी पंखों बिना चलती रही, उस तरफ फिर इस तरफ सब तरफ बहती रही। चैन आया हो कहीं ऐसा नहीं संभव हुआ, एक स्थल पर न टिक पाया फिरा विस्मित हुआ। आज मीठा […]

आंसुओं को अमृत समझ के पी गए हम, तुम्हारी जुदाई में इस तरह जी गए हम तुम्हारे आने की आस पलती रही, तुम्हारी कमी सदा खलती रही कभी मन का मकरंद उड़ा, कभी दिल की […]

दिन अगर बदल सकते पुनः अपने बचपन में लौट पाते । फिर से पापा की नन्हीं परी बन चार पैसे की नेमचुस खरीद लाते। घर की चौखट पे बैठे, बाट देखती चाचू की, पटाखो के […]

सर्दी ने शीतलहर का थामा हाथ, सुहाने लगा कंबल का साथ दिन में भी धुंध है छाई, सूरज भी नहीं दे दिखाई अदरक वाली चाय सुहाए, गरम परांठे मन को भाएं आइसक्रीम से टूटा नाता, […]

सर्दी की धूप बड़ी सुहानी सेवन कर प्राणी सुखदाई । चेतन जीव की क्या कहिये सुख जड़ जात भी पाई।। ठण्ड हरे नित जीव जगत के अमराई नित भोजन पावै। विनयचंद विटामिन डी से अश्थि […]

कड़कती बिजली की तरह चमचमाती हुई आती हो और सर्द हवा सी छू के निकल जाती हो | इंतज़ार करते हुए तेरा मैं अक्सर ठिठुर जाता हूं संदेशा जो न आए तेरा तो व्याकुल हो […]

लो फिर आ गई है सर्दी पूरे लाव -लश्कर के साथ में। हवा भी ठण्ढी सूरज मद्धिम घना कुहासा दिन और रात में।। बिन बादल के बारिश जैसी गीलापन हर डाल -डाल व पात में। […]

सुबह-सुबह की लालिमा बिखरी हुई है सब तरफ ओस की बूंद मोती सी बिखरी हुई है सब तरफ। भानु का नूर है आलोक चारों ओर फैला, धरा-आकाश मानो बन गए मजनूँ व लैला। स्वच्छ पावन […]

दर्द जीवन में है जो रख सरोकार उससे, किसी को ठेस मत दे कर ले प्यार सबसे। पोछ ले अश्क सबके कष्ट मत दे किसी को, भाव समभाव के रख कद्र दे दे सभी को। […]

आज उठाई कलम है मैंने वीरों की तलवारों-सी पंक्ति है मेरी इतनी पैनी नैनों की तेज कटारी-सी चलती है जब कलम हमारी स्याही कम पड़ी जाती है लफ्ज हैं इतने भावुक मेरे कलम भी रोने […]

अवसाद के बादल घिरे पर तुम न आये प्रिये यह तिमिर बढ़ती जा रही बुझे हर उजास के दिये । आक्रोश है या ग्लानि इसे नाम दू कैसे खुद ही मौत का दामन थाम लूँ […]

हाथ पकड़ा दो कलम मैं लिखती जाऊं हर लफ्ज को तेरे हर एहसास को, मेरी हर एक पीर को आवाज दूं गर तुम सुनो ! मैं गायिका बन जाऊंगी तुम्हारी इक मुस्कान पर मैं सौ […]

हमें बस जीवंत बोध की दरकार है नहीं मुझे खुद पर, हाँ तुझपर एतवार है हम सजग प्राणी भले हैं पर स्वार्थ से सना अपना प्यार है । स्वार्थ से रचा-बसा राब्ता यह बस नाम […]

निम्नकोटि की कवि हूँ मैं !! हाँ, थोड़ी पागल हूँ मैं जाने कितनी खामियां मुझमें फिर भी सब कहते हैं अच्छी हूँ मैं ! मैं ना लिखती गज़ल कभी ना लिख पाती नज्म, रुबाई पद […]

हो जाए जो तेरी मेहर तो चमक उठेगी किस्मत मेरी पड़ा तम में स्वप्न जो दीप्तिमान हो जायेगा इस गरीब की कुटिया में आशा का दीपक टिमटिमायेगा पर तू ऐसा कहाँ करेगा ! भरा है […]

भार्या ********** मैं तुम्हारी भार्या हूँ संगिनी पथ की रहूंगी कष्ट ना होगा तुम्हें सारे दुःख मैं खुद सहूंगी बोलता है मन ये मेरा तुम व्यथित हो आजकल डूबते सपनें तुम्हारे तैरते हैं पलकों पर […]

सुबह सवेरे द्वार पे मेरे, एक निर्धन ने पुकारा एक बालक था गोद में उसकी, ठंड से कांप रहा बेचारा मैंने झटपट एक स्वेटर लाया और उस बालक को पहनाया करुण भाव उपजा था मन […]

रोशनी में चमकता कांच नहीं अंधेरे में जले, आप वो चिराग बनो मिटा तमस को, चमक फैलाओ भटकते हुए की पनाह बनो। बेसहारा, अनाथ हैं जो भी उन्हें सहारा दो, हो सके तो एक तिनके […]

प्रिय की प्रियतमा बनकर आनंदमय जीवन का सूत्रधार बनो अशोविता हो एक सशक्त जीवन एक ऐसा ही तुम सार बनो संलग्न कर जीवन तुम अपना करो पथिक का पूरा सपना जीवन जिसका तुम संग बीता […]

सफलता और असफलता के कयी पङाव देखे हैं हमने हार और जीत के कयी अनुभवों को जीये हैं हमने । फैसले लेने के मुकाम पर साहस दिखाने का हौसला सही निर्णय लेने की जद्दोजहद में […]

आंखों में शर्म पलकों में हया लब पर मोहब्बत की दास्तां है आपके दिल से शुरू मेरा सफर आपकी बाहों में ही खत्म मेरा रास्ता है जी ना पाएंगे हम आपके सांसो के बिना आपकी […]

मम्मी की मैं रानी बिटिया पापा कहते सयानी बिटिया धमा चौकड़ी भागम – भाग कूद – कूद कर करती बात कहती मम्मी कहो कहानी जिसमें हो राजा और रानी हाथी घोड़ा शेर भी हो और […]

जब-जब चलना सीखा हमने लोगों ने रोड़े ही लगाये खुशी के आँसू निकल ना पाए दुःख ही दुःख हमने अपनाए जाने क्या है भाग्य में मेरे जो मैं करती सबकुछ उल्टा पीर-फकीर सा मेरा जीवन […]

सिलसिले वार दम टूटता गया उम्मीदों का अब क्या करेंगे हम सुनहरे सपनों का अब तो अपना जीवन भी किराये का लगता है क्या करेंगे अब हौसलों के पंखों का ???

बाँसुरी की तान पर राधा दीवानी हो गई मीरा दीवानी हो गई प्रज्ञा’ दीवानी हो गई छेंड़ता मुझको है नटखट नंदबाबा का दुलारा छोंड़े ना मोरी कलाई ब्रज की गोपिन का है प्यारा प्रज्ञा लिखकर […]

बेजान हुए पत्तों-सा जीवन भूमि पर आकर बिखर गया वृक्ष की डाली रही अकेली पत्ता भी पीला पड़ गया यह सब देख के वृक्ष ने बोला- ओ डाली ! तू क्यूं इतना संताप करे रोज […]

हर तरुवर दे केवल फल, यह ज़रूरी नहीं ज़िन्दगी में किसी वृक्ष की छाया भी, सुकून बहुत देती ज़िन्दगी में जिसने झेली हो तपिश ज़िन्दगी की, वही सुकूं का सुख जानते हैं जिनकी फल पर […]

छोटी-छोटी खुशियां हैं छोटे-छोटे बच्चों की, छोटी सी खुशी में वे सहज मुस्काते हैं। प्यार के जरा से बोल प्रीति कर दिल खोल, आप मुस्काओ तो सहज मुस्काते हैं । द्वेष, बैर, नफरत घृणा से […]

जल जाती हूं ज्वाला सी, जब अरमान मेरे जलते हैं लेकिन तुम्हारी नेह-वर्षा से, वो धीरे-धीरे फलते हैं मीठे-मीठे बोल बोल कर, दुनिया वाले छलते हैं लेकिन तुम्हारी नेह-वर्षा से, वो जख्म भी ढ़लते हैं […]

तर्क हैं वितर्क हैं पक्ष के भी विपक्ष के भी देख रहा हूँ टकटकी लगाये, कुछ फायदे की बात मेरे लिए भी हो। अब पाला पड़ने लगा है छतरहित घर में मेरे तीन शेड का […]

मेरे ख्वाब ही शायद ठीक है और ना जगा खुदगर्ज़ इस दुनिया की फिदरत देखो सोचा कभी बदलेंगे दुनिया पर हर घड़ी यह बदलता है अपनों से दूर किए जाता है।

इबादत है तू मेरे सांसों में समाई खो ना जाना रूठ ना जाना सह ना पाऊँगा ज़िन्दगी में जिस चीज़ को चाहा है वो दूर हो जाती है कमी शायद मुझमें ही है पता नहीं […]

ओ! कविता के सृजनकर्ता, उठा कलम व जोश जगा। घिर से गए निराशा में जो, उनकी चिंता दूर भगा। यदि लिखना तू बंद करेगा, कैसे लहर चलाएगा डगमग पग धरते तरुण को, कैसे राह दिखाएगा। […]

कविता -फेल रिजल्ट —————————- आज सारे, ख्वाब टूट गए, कभी सोचते थें, जो बैठ टहल कर, वो आज सारे ख्वाब टूट गए, मत भरोसा करो, इतना किसी पर, काम पूरा ना होगा, तो जमाना हसे […]

कविता- धोखेबाज दोस्त ——————————– हजार झूठे स्वार्थी दोस्त से अच्छा, एक सच्चा परम मित्र हो, नाज किया समय पैसा बर्बाद किया, वही दोस्त आइना दिखा जाते, डूबते हुए इंसान से- किनारे होकर भी, मुंह फेर […]

बेतार का तार भी क्या अजब खेल दिखाता है किसी हेलो पर चेहरा खिलखिलाता है तो किसी हेलो पर मुरझा जाता है हर एक कॉल की अलग कहानी है किसी में घुटन भरी छटपटाहट किसी […]

यह जख्म कोई नया तो नहीं फिर दर्द का अहसास इतना गहरा क्यूँ ? कयी सितम अपनों ने किये पर उफ ना आज तक हमने किये अबतलक जो बेधते लब्ज़ असर कर न सके तेरे […]

ज्योति जल अंधेरा मिटा दे, न घबरा हवा की बातों से कितना बुझायेगी तुझे, कब तक रुलायेगी तुझे। ध्यान न दे बस रोशनी फैला, अंधेरा मिटा, सच को दिखा। आ दिये में तेल बनकर रुई […]

उलझा हुआ कलमकार हूँ, तमाम विषयों से घिरा चयन की छटपटाहट में लय से भटका हुआ हूँ। शब्द में निःशब्द भर मौन में गुंजायमान ला अंकित करने में असफल रहा हूँ। ठिठुरते बचपन की व्यथा […]

छोटी- छोटी पंक्तियाँ हैं ये जो शायरी की मेरी, इन्हीं में तुम्हारी सब खूबसूरती है भरी। उपमान नए औऱ पुराने मिला जुला के, वर्णन जैसा भी किया सच सच किया है। देर रात चाँद आया […]

जीवन की आड़ी-सीधी रेखाएं बनती और बिगड़ती रहती हैं… देख के कर्मों की गति ये कभी हँसतीं तो कभी रुवासी रहती हैं… पथ पर अपने चलने को आतुर रहती हैं समय की गति से सौदेबाजी […]