ऐ काश! कोई तो होता जो बांहों में ले लेता कहता मुझसे दो बातें सबकुछ मेरा ले लेता मुझ बिन ना कटती रातें मुझ बिन ना सवेरा होता.. कभी रोती तो रोने ना देता सारे […]

बहक ना जाएं कहीं कदम हमारे डरते हैं इसी बात से हम क्योंकि गुजरते हैं हर रोज हम भी मैखानें के करीब से। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

मौत के बाद क्या है किसी ने जाना नहीं है प्रकृति को क्यों किसी ने पहचाना नहीं है आखिर मृत्यु के रहस्य को ईश्वर ने क्यों छिपाया इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं […]

जब मां की कोख में मेरी जिंदगी पल रही थी मेरे बाप की चिता भी श्मशान में जल रही थी जब हमने इस दुनिया में अपनी आंखें खोली देखी खून की होली सुनी बंदूकों की […]

जरूरी है नहीं हर फूल की खुशबू मेरी ही हो, मुझे मेरी जरूरत का मिले बाकी सभी का हो। हमेशा जिद कहाँ तक पूर्ण हो नादान मन की इस, हमेशा की जलन इसमें कभी चन्दन […]

चाँद तुम रात भर चले, चमके, न जाने कब से सिलसिला ये चला । अब तक चल रहा है, चलते ही जा रहा है। कोई जा रहा है, कोई आ रहा है, लेकिन तुम्हारा सिलसिला […]

तीन दिसम्बर अठारह सौ चौरासी का पावन दिवस मनोहर था। घर-घर मंगल गान गुंजते बजे बधाईयाँ संग सोहर था।। आसमान से टपक सितारा आया बिहार के एक गांव में। सारण उर्फ सीवान जिले के जीरादेई […]

ओज कविता- शिकार किया करते है | पीठ पीछे से वार सदा सियार किया करते है | हिन्द के जवान मुंह सदा हुंकार किया करते है | नापाक दुशमनों तुम हमे क्या आजमाओगे | सामने […]

बढ़ रही ठंड में गुनगुनी धूप सी तुम जिन्दगी में सुगंध फैलाती मनोहर धूप सी तुम। मुस्कुराहट इस तरह की नाजुक सी, ठोस के साथ में घुलती जरा सा भावुक सी। कभी आलिम कभी हो […]

हाय रे ! कितनी लोभी दुनिया हाय रे ! कितनी लोभी… अपनी इज्जत बाजारू कर घर की चलती रोटी… हाय रे ! कितनी लोभी दुनिया हाय रे ! कितनी लोभी…. बेंचकर अपने बाप का कफन […]

क्यूं इतना वैमनस्य बढ़ा है ?? दिल में बम-बारूद भरा है.. मुँह से तो बोले मीठा-मीठा मन में कितना पाप भरा है लुटा दी हमनें प्रेम की गागर फिर क्यों मन में जहर भरा है […]

बिटियारानी ! अब तो आओ कहां छुपी हो ये तो बताओ ढूंढ नहीं पाऊंगी अब तो नहीं सताओ सामने आओ लुका-छिपी अब बहुत हुई तेरी माँ बहुत थक गई कुछ तो खा लो कुछ तो […]

रोटी की लालसा में भटकते रहते हैं दर-दर की ठोकरें खाते रहते हैं रोटी की कीमत क्या होती है यह सिर्फ हम ही समझते हैं दिन भर उठाते हैं बोझा तब रात को दो निवालों […]

अश्कों का समन्दर है अँखियों में मेरी एक कागज की किश्ती कहाँ से चलेगी। है ये बदनाम बस्ती हमारी सनम इश्क की फिर कलियाँ कहाँ से खिलेगी।। रोकड़े में खरीदे सभी प्यार आकर प्यार की […]

मेरी जान तुम्हारे जान का सौगात माँगता है। ये जान लिया, जब जान मेरी , ले जान हथेली दिन-रात माँगता है। । लाँघ नफ़रत की दरिया मुश्कत से इश्क का एक सरोवर आबाद माँगता है। […]

खोजती रहती है दुनिया चैन मिलता ही नहीं, यह सही है वह सही है मन कहीं टिकता नहीं। आजकल की बात ही कुछ अलग सी हो गई असलियत के रंग का खून भी दिखता नहीं।

बहुत गमगीन हो रही ज़िन्दगी मुस्कुराने की दवा चाहिए। मर्ज बनकर खड़ी है नफरते प्यार की एक हवा चाहिए।। चाहते हैं सभी सेकना रोटियाँ तप्त-सा कोई तवा चाहिए। इन्सान बनकर रहे सर्वदा बनने को ना […]

एक छोटी -सी डब्बी में नाचती हैं सूईयाँ बेशक बन्द होकर। पर नचाती है सारी दुनिया को अपनी हीं नोंक पर।। न ठहरती है कभी न कभी ठहरने देती है। ये तो घड़ी है ‘विनयचंद […]

सामने बैठे हो सब कुछ बयान कर दो ना चाहना है अगर इजहार कर दो ना। उड़ा के नींद ऐसे बेखबर से सोते हो रखनी हैं दूरियां गर दिल्लगी क्यों बोते हो। बोल दो जो […]

आँखों को खोल दे जो ऐसी ही ताजगी हो तुम तो सुबह की चाय सी मीठी सी ताजगी हो। बाहर निकल के देखा पौधों में ओस सी हो, तुम ही तो जिन्दगी में सचमुच के […]

गीत एक लिख देना संगीत उसे दे देना, जब कहोगे गा दूँगा बस मुझे बता देना। नेह है या दूरी है जानना जरूरी है, मौन रह बता देना, हाल सब सुना देना। बोलना नहीं कुछ […]

इधर चुनावों की हलचल है और कुर्सियों की टक्कर उधर बुझ रहे माँ के दीपक ,जलते जलते सरहद पर क्या होगा ऐसी कुर्सी का जनता की मातमपुर्सी का सत्ता के इन भूंखे प्यासों को अब […]

जिम्मेदारी के बोझ तले दबा रहता है जीवन जाने किन खयालों में खोया रहता है जीवन उठकर तलाशती हूँ मैं जमीं अपनी आसमां जाने क्या ढूंढा करता है जीवन…

मेरे हर प्रश्न का जवाब है मां मेरे हर दर्द का इलाज है मां भीड़ में भी जो पहचान लेती है अपने बच्चों की हर एक आहट ऐसी अनपढ़ी, अनलिखी एक किताब है मां मेरे […]

विजय श्री का तिलक तभी तो लगेगा जब बन के चट्टान अग्नि पथ पर चलेगा कमजोर खुद को समझना है भूल कीचड़ में भी तो खिलता है फूल प्रश्न चिन्ह की मुद्रा से तुम ना […]

आज विश्व एड्स दिवस है जो HIV के संक्रमण से जागरुकता हेतु मनाया जाता है… यह आठ सरकारी स्वास्थ्य दिवसों में से एक कहलाया जाता है…. सबसे पहले १९८७ में जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस […]

ऐ वतन ! तुझ पर हम अपनी जान लुटा देंगे तेरे कदमों में आसमां भी झुका देंगे गर आबरू पर तेरी आँच आई कभी दुश्मन को हम चीर-फाड़ देंगे है जुनून हमको तेरी मोहब्बत का […]

तुम्हारा वो sorry वाला मैसेज पढ़कर जाने क्यूं आँख में आँसू आ गये ! सुनने में तो बहुत अच्छा लगा कि तुम्हें अपनी गलती का एहसास तो हुआ ! पर जाने क्यूं एक टीस-सी उठी […]

क्या करना है मुझे यहां ठिकाना बनाकर मन चंचल है लगता है कहाँ एक ही जगह पर बदलकर फिर आऊंगा वेश मैं अपना घायल परिंदा हूँ गिरा हूँ धरा पर फिर उठूंगा, चलूंगा बनाऊंगा आसमां […]

नई सुबह की पहली किरण ने मुझे जगाया हिलोरे देकर चांदनी रात ने था सुलाया हटाये पर्दे जब माँ ने खिड़कियों से धूप की चमकती किरणों ने मुझे सहलाया…

समवेत स्वर में जय हिंद बोल दो कभी प्यार के पट खोल दो कभी ये मुल्क तुम्हारा ही है दोस्त! इसे प्यार और सम्मान से देख तो कभी… *****************************

मेरा गम तेरे दर्द से ज्यादा है मेरी आँख में आँसू तुझसे ज्यादा है एक बार देकर प्यार की थपकी सुला दे साथी ! मेरे दिल में जख्म़ तुझसे ज्यादा है…

एक था राजा एक थी रानी सुनो सुनाऊं एक कहानी खुशी खुशी दोनों रहते थे गीत खुशी के गाते थे प्यार बहुत था दोनों में एक दूजे पर जान लुटाते थे फिर एक दिन आया […]

वो ऐसा सोंच भी कैसे सकते हैं मेरे देश के ही दुधमुहे बच्चे हैं पर करें भी तो हम क्या करें वह दहशत गर्दों के सम्पर्क में रहते हैं पथ्थर फेंकते हैं सेना के ऊपर […]

बेटी हुई पराई देखो बेटी हुई पराई, यह कैसी ऋतु आई देखो बेटी हुई पराई मेरे आंगन के पौधे की डाली बड़ी ही नाजुक नाजुक सी वह थोड़ी नखरेवाली, मेरे आंगन में जब वह आई […]

मंगलसूत्र को सुहाग का प्रतीक माना जाता है जाने क्यों ऐसा कहा जाता है?? बचपन से यही सोंचती थी मैं पर आज देख भी लिया अपनी आँखों से; एक विधवा स्त्री के सामने आने पर […]

दहेज प्रथा एक अभिशाप ********************** बूढ़ा बाप अपनी पगड़ी तक निकालकर दे देता है और माँ अपने कलेजे का टुकड़ा पर फिर भी नहीं भरता लोभियों का मन जाने क्या लेना चाहे वो ? समझते […]

चलने की कोशिश तो करो, मंजिल भी मिलेगी राहों में मुश्किल है तो, मुश्किल भी हटेगी अंधियारे से ना डरना, दुआओं से पथ तेरा रौशन रहेगा *****✍️गीता

शत्रु को तोड़ कर लेटा, तिरंगा ओढ़ कर बेटा भारत मां की हर मां का , सीना फटता जाता है जब किसी का लाल तिरंगा , ओढ़ के आता है बूढ़े बाप ने देखा जब, […]

आ गई मैं मंदिर में, धोकर अपने हाथ पैर ताकि संग मेरे ना आए, कोई कपट कोई बैर घंटा बजाकर सुना मधुर स्वर, उसकी तरंगों से धार्मिक हुए विचार धूप दीप नैवेद्य चढ़ाकर, करूं वंदना […]