‘वो हादसा के सलीके से जिसका ज़िक्र नही, और कुछ लोग थे जो सुर्खियों में आते रहे.. मदद के वास्ते लाज़िम थे कई हाथ मगर, वो सारे हाथ फकत वीडियो बनाते रहे..’ – प्रयाग मायने […]
‘वो हादसा के सलीके से जिसका ज़िक्र नही, और कुछ लोग थे जो सुर्खियों में आते रहे.. मदद के वास्ते लाज़िम थे कई हाथ मगर, वो सारे हाथ फकत वीडियो बनाते रहे..’ – प्रयाग मायने […]
प्रथम मौलिक जन-जन के गुरु प्रबंधन के पुरोधा,नवाचार की शुरू आस्था के आकाश पर सूर्य से बिराजमान हैं धर्म के धरातल पर रचे कृतिमान हैं मातृभक्ति की वज़ह से पिता की भी की अवहेलना पिता […]
कुछ पाना हमारा मकसद न हो देने की लत खुद को लगाते चलें जीवन हमारा यह रहे न रहे दूसरों का जहाँ चलो बसाते चले । हमने देखा दुनिया की भीड़ में भी हम अकेले […]
यह शहर अनजान सा लगने लगा है तू नहीं तोह बेगाना सा लगने लगा है वह चाय की टपरी वह गालिया आज भी भरे है तू नहीं तोह सब कुछ बेजान सा लगने लगा है […]
आपके लिए तो केवल वो शब्द थे, जो निकल गए जुबान से, मगर जो आघात हुए हैं हृदय से, उनकी खता तो बताइए ,जनाब!
साक्षात्कार था मेरा उस दिन, चिंता से था हृदय धड़कता। एक दस का नोट पड़ा जेब में, ऑफिस तक की भी बस कैसे पकड़ता। दो सौ रुपयों की दरकार थी, ज़िन्दगी से मेरी तकरार थी। […]
आज तू हंस ले , खुलकर मुझ पर, मगर ,थोड़ा सा सब्र कर; अरी; सुन ! मेरी अभागी क़िस्मत! मैं सीख तुम्हें सीखलाऊंगा, मेहनत की जंजीरों से जकड़कर, मुलाजिम तुम्हें बनाऊंगा। मुलाजिम, तुम्हें बनाऊंगा! ——मोहन […]
महामारी का दौर यह कैसा आया , वक़्त ने सबको बेबस बनाया , कुदरत ने इस धरती को बहुत खूबसूरत बनाया , पर इन्सान इस नेमत को सम्भाल ना पाया , तो महामारी ने आकर […]
‘फितरत-ओ-आदत की बात है के मोहब्बत, उनसे की न गई, हमसे भुलाई न गई..’ – प्रयाग मायने : फितरत ओ आदत – फितरत और आदत
अनजान बन कर चैन से जीने वाले । तू क्या जाने कौन गोरा कौन काले।।
संवेदनाएं कहाँ रहती हैं आज-कल, मैं यह जानती नहीं.. लोग क्यों जलाते हैं नफरत के चिराग मैं यह जानती नहीं.. ऊब चुकी हूँ जिन्दगी से अपनी, साँसों की डोर कब टूटेगी मैं यह जानती नहीं… […]
मुद्दत बाद आज ही नहाया हू़ँ अपने अश्क ए तालाब में। कहीं कोई काली नैनो़ से देखा तो नहीं मुझे नहाते हुए।।
पागल पुकारो आवारा पुकारो या तुम दीवाना पुकारो। जो भी पुकारो जरा प्यार से अपना कह कर पुकारो।।
‘निकलती है नेक मकसद को, मुकम्मल वो दुआ होती है, नही होती दुआ अकेली कभी, साथ क़ुव्वते-दुआ होती है..’ – प्रयाग मायने : मुकम्मल – पूरी क़ुव्वते दुआ – दुआ की ताकत
कितनी प्यारी होती हैं बेटियाँ, प्रेम की मूरत होती हैं बेटियाँ.. आती है जब परिवार पर आँच कोई, सबसे आगे खड़ी होती हैं बेटियाँ… प्यार के पालने में झूलती हैं, माँ के आँचल में पल्लवित […]
बुद्धि विनायक पार्वतीनंदन ,मंगलकारी हे गजबंदन वक्रकुंड तुम महाकाय तुम ,करता हूँ तेरा अभिनंदन कंचन -कंचन काया तेरी ,मुखमंडल पर तेज समाया है मूषक वाहन करो सवारी ,मोदक तुमको प्यारा है भक्ति भाव में तेरी […]
‘दिल में छिपाए रखोगे, जज़्बात कब तलक, इतनी ही हुई बात बस नज़रों से अब तलक..’ – प्रयाग
निजी कामों के बीच हमारे हाथ से भी देश लिए कुछ योगदान हो जाये, मेरे भारत में अमन -चैन रहे, खुदा मेहरबान हो जाये।
‘मेरे इज़हार पर कुछ यूँ लगा तू हाँ की मुहर, दुनियाँ देखे कि इकरार किसे कहते हैं.. तेरे सिवा मुझे उस पर भी यकीं है ऐ खुदा, हूँ मुतमईन के ऐतबार किसे कहते हैं.. किसी […]
‘देर न लगी मेरी हकीकत के मायने बदलने में, मैं दरिया था कभी मोहब्बत का, आज दिल्लगी का ज़रिया हूँ..’ – प्रयाग मायने : ज़रिया – साधन
चलो ‘मैं’ को, ‘मैं’ से लड़ाते हैं! जीतकर , फिर ‘मैं’ से ‘हम’ बनाते हैं। विशेष–> यमक अलंकार का प्रयोग एक “मैं ” अपने आप के लिए दूसरा ” मैं ” अहंकार के लिए
कर्म अपने हाथ में है और बाकी कुछ नहीं, एक ईश्वर की है सत्ता और बाकी सच नहीं। जो मुझे यह दिख रहा है अपने चारों ओर का, एक सपना सा है यह सब और […]
‘चारागरों, हम में से किसी एक का इलाज करो, आज़ार उन्हें नफरत का है, तो हमें मोहब्बत का..’ – प्रयाग मायने : चारागर – डॉक्टर आज़ार – रोग
पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाकर प्रेम दिखाती है बिन मांगे अपनी झोली हमेशा ही भरा पाती है हर चीज समय से जुड़ी है प्रत्येक जगह यहां जलीय चक्रीय प्रवृति से भरा है सारा ही जहां […]
वो ना जाने कहाँ रहते हैं आज कल, हमें उनके दीदार का इन्तजार है… बड़ा मीठा बोलतें हैं वो, हमें उनकी हाँ का इन्तजार है..
मेरे इश्क के बीमार नजर आ रहे हैं.. बड़े सीधे सरकार नजर आ रहे हैं..
आँखों से हुई थी अश्कों की बरसात। याद है मुझे वो थी बरसात की रात ।।
कोपलें फूटी अनेकों पेड़ बन पाये नहीं, झाड़ियां उग आई मन में बेर लग पाये नहीं । स्वाद था मीठा सभी में जीभ में परतें जमीं थी इसलिए मीठी नजर महसूस कर पाये नहीं। इस […]
‘छोड़ गए थे इसी जगह, अब चलना मुनासिब नही, वो लौट आए तो मेरी जुस्तजू में परेशां होंगें..’ – प्रयाग मायने : जुस्तजू : तलाश
बीती रात अंधेरे की अब नई रोशनी आई है, मेरी कलम मेरे आगे इक नया विधेयक लाई है। कहती है अपनी वाणी से ऐसी कविताएं लिखना जिसने नव उत्साह जगे, बस ठेस किसी को मत […]
प्रातः की सुंदर बेला में सबसे पहले ईश्वर को धन्यवाद करना है जिसने नया सवेरा दिखलाया । फिर माता व पिता के चरणों को छूकर प्रणाम करें, जिन्होंने जीवन देकर के यह संसार हमें दिखलाया […]
शिकवा है मुझे उससे, जिसने लिखी हैं अधूरी कहानियां, क्यों कराया था मिलन, गर परवान- ए- मोहब्बत की औकात ना थी। AK
ख़्वाबों का क्या है आ ही जाते हो तुम बेशक़ रातों को जगा जाते हो तुम वह प्यार ही क्या जिसमे तड़प ना हो वह आग ही क्या जिसमे तपन ना हो अब तोह आग […]
O my ganesh ji Your glory is infinite … Today we all need your blessings very much… Hey Ganesh! All your troubles … All the troubles from the world Erase and Bless us .. I […]
शीर्षक:- पिता:-बरगद का वृक्ष पिता वह बरगद का वृक्ष है जिसकी छांव में हमें प्रेम, स्नेह तथा सुरक्षा मिलती है.. पिता नारियल का वह फल है जो ऊपर से सख्त परन्तु अन्दर से सुकोमल होता […]
चला जा रहा हूँ अंजान से एक सफर में साथ न कोई साथी किसी मंजिल का एक साये के पीछे न जाने किसकी तलाश में एक चेहरा ढूंढता हूँ न जाने किसकी आस में कभी […]
किसी ने कहा है कि प्रेम की कोई जात नहीं होती, कोई मजहब नहीं होता ।मगर हर किसी की समझ में कहां आती है ये बातें। कुछ लोगों के लिए समाज में इज्जत से […]
गणेश वंदना – श्री गणेश वंदन | गौरी नंन्द्न शंकर सूत करे सब श्री गणेश वंदन | हाथी मस्तक मंगल दस्तक तेरा सत अभिनंदन | मूषक वाहन लड्डु भोग करते सदा भक्त निरोग | धूप […]
बहुत आ रहे हैं लोग ; आजकल ,पास तुम्हारे ! पहले तो नहीं आते थे , सच बताओ ये रजा क्यों है, डॉक्टर हो शायद ,स्वार्थ के! सच तो बताओ , वजह क्या हैं?
माना शराफत भली हैं ,इंसानियत के लिए, मगर, हे मानुष ! ज्यादा युधिष्ठिर ना बन, तेरे आस-पास सुगनी बहुत रहते हैं।
इंसान इंसान से डरने लगा अदृश्य जीवों से मरने लगा, ज़िन्दगी महकती थी जिन लोगों से कभी, उनसे मिलने से मुकरने लगा। वो दौर ना रहा, ये दौर भी जाएगा, गया वक्त फिर लौट के […]
‘ऐ मेरी याद-ए-उल्फत सुन, तू इतना काम कर देना, जो उसको भूलना चाहूँ, मुझे नाकाम कर देना.. सुबह का वास्ता किससे, सहर की राह किसको है, तू उसकी ज़ुल्फ़ के साये मे मेरी शाम कर […]
हे नियंता! दैव! प्रकृति! मानव जाति विकट विपदा में है, चारों तरफ रोग फैला है, इससे निजात दिला। चीन के वुहान से निकल कर पूरी दुनियां को चपेट में ले लिया, जिंदगी ठप्प कर दी, […]
कुछ देर पहले तक बातें कर रहे थे वे, कुछ ही पल बाद, उखड़ गई सांसें। हल्की सी उल्टी, का बहाना था, गायब हो गई धड़कन। शून्य शून्य शून्य शून्य में विलीन हो गए। यही […]
शंका ना थी कोई भी,वो समाधान करने बैठ गए। हम तो बात करना चाहते थे,वो व्याख्यान करने बैठ गए।
जिंदगी कितनी सुलझी हुई है, अगर हम माहिर हो उसे सुलझाने में।
मेरे दिल ने एक सवाल किया.. आज लखनऊ का मौसम कैसा है? हूबहू मेरे महबूब जैसा है..
है बुद्धिदाता,बुद्धि का सबको दान करो। है चिंताहरण,संसार की सब चिंता हरो। है विघ्नहर्ता ,सृष्टि के सब विघ्न हरो। है पापहर्ता ,नर नारी के सब पाप हरो। है वक्रतुंड,निर्विघ्न सब मेरे काज करो। है सूर्यकोटि,दूर […]
गीता का सार जिसने भी समझ लिया संसार में उसी ने औरों से कुछ अलग किया तेरा मेरा अपना पराया माया मोह से जो दूर हुआ उसी को मिला मोक्ष का द्वार वही हर आंखों […]
हम वो शख्स नहीं जो, गड़े मुर्दे को भी कब्र में सोने न दे। मुद्दत बाद नींद आयी है कम से कम कुछ पल सोने तो दे।।
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