‘छोड़ गए थे इसी जगह, अब चलना मुनासिब नही, वो लौट आए तो मेरी जुस्तजू में परेशां होंगें..’ – प्रयाग मायने : जुस्तजू : तलाश
‘छोड़ गए थे इसी जगह, अब चलना मुनासिब नही, वो लौट आए तो मेरी जुस्तजू में परेशां होंगें..’ – प्रयाग मायने : जुस्तजू : तलाश
बीती रात अंधेरे की अब नई रोशनी आई है, मेरी कलम मेरे आगे इक नया विधेयक लाई है। कहती है अपनी वाणी से ऐसी कविताएं लिखना जिसने नव उत्साह जगे, बस ठेस किसी को मत […]
प्रातः की सुंदर बेला में सबसे पहले ईश्वर को धन्यवाद करना है जिसने नया सवेरा दिखलाया । फिर माता व पिता के चरणों को छूकर प्रणाम करें, जिन्होंने जीवन देकर के यह संसार हमें दिखलाया […]
शिकवा है मुझे उससे, जिसने लिखी हैं अधूरी कहानियां, क्यों कराया था मिलन, गर परवान- ए- मोहब्बत की औकात ना थी। AK
ख़्वाबों का क्या है आ ही जाते हो तुम बेशक़ रातों को जगा जाते हो तुम वह प्यार ही क्या जिसमे तड़प ना हो वह आग ही क्या जिसमे तपन ना हो अब तोह आग […]
O my ganesh ji Your glory is infinite … Today we all need your blessings very much… Hey Ganesh! All your troubles … All the troubles from the world Erase and Bless us .. I […]
शीर्षक:- पिता:-बरगद का वृक्ष पिता वह बरगद का वृक्ष है जिसकी छांव में हमें प्रेम, स्नेह तथा सुरक्षा मिलती है.. पिता नारियल का वह फल है जो ऊपर से सख्त परन्तु अन्दर से सुकोमल होता […]
चला जा रहा हूँ अंजान से एक सफर में साथ न कोई साथी किसी मंजिल का एक साये के पीछे न जाने किसकी तलाश में एक चेहरा ढूंढता हूँ न जाने किसकी आस में कभी […]
किसी ने कहा है कि प्रेम की कोई जात नहीं होती, कोई मजहब नहीं होता ।मगर हर किसी की समझ में कहां आती है ये बातें। कुछ लोगों के लिए समाज में इज्जत से […]
गणेश वंदना – श्री गणेश वंदन | गौरी नंन्द्न शंकर सूत करे सब श्री गणेश वंदन | हाथी मस्तक मंगल दस्तक तेरा सत अभिनंदन | मूषक वाहन लड्डु भोग करते सदा भक्त निरोग | धूप […]
बहुत आ रहे हैं लोग ; आजकल ,पास तुम्हारे ! पहले तो नहीं आते थे , सच बताओ ये रजा क्यों है, डॉक्टर हो शायद ,स्वार्थ के! सच तो बताओ , वजह क्या हैं?
माना शराफत भली हैं ,इंसानियत के लिए, मगर, हे मानुष ! ज्यादा युधिष्ठिर ना बन, तेरे आस-पास सुगनी बहुत रहते हैं।
इंसान इंसान से डरने लगा अदृश्य जीवों से मरने लगा, ज़िन्दगी महकती थी जिन लोगों से कभी, उनसे मिलने से मुकरने लगा। वो दौर ना रहा, ये दौर भी जाएगा, गया वक्त फिर लौट के […]
‘ऐ मेरी याद-ए-उल्फत सुन, तू इतना काम कर देना, जो उसको भूलना चाहूँ, मुझे नाकाम कर देना.. सुबह का वास्ता किससे, सहर की राह किसको है, तू उसकी ज़ुल्फ़ के साये मे मेरी शाम कर […]
हे नियंता! दैव! प्रकृति! मानव जाति विकट विपदा में है, चारों तरफ रोग फैला है, इससे निजात दिला। चीन के वुहान से निकल कर पूरी दुनियां को चपेट में ले लिया, जिंदगी ठप्प कर दी, […]
कुछ देर पहले तक बातें कर रहे थे वे, कुछ ही पल बाद, उखड़ गई सांसें। हल्की सी उल्टी, का बहाना था, गायब हो गई धड़कन। शून्य शून्य शून्य शून्य में विलीन हो गए। यही […]
शंका ना थी कोई भी,वो समाधान करने बैठ गए। हम तो बात करना चाहते थे,वो व्याख्यान करने बैठ गए।
जिंदगी कितनी सुलझी हुई है, अगर हम माहिर हो उसे सुलझाने में।
मेरे दिल ने एक सवाल किया.. आज लखनऊ का मौसम कैसा है? हूबहू मेरे महबूब जैसा है..
है बुद्धिदाता,बुद्धि का सबको दान करो। है चिंताहरण,संसार की सब चिंता हरो। है विघ्नहर्ता ,सृष्टि के सब विघ्न हरो। है पापहर्ता ,नर नारी के सब पाप हरो। है वक्रतुंड,निर्विघ्न सब मेरे काज करो। है सूर्यकोटि,दूर […]
गीता का सार जिसने भी समझ लिया संसार में उसी ने औरों से कुछ अलग किया तेरा मेरा अपना पराया माया मोह से जो दूर हुआ उसी को मिला मोक्ष का द्वार वही हर आंखों […]
हम वो शख्स नहीं जो, गड़े मुर्दे को भी कब्र में सोने न दे। मुद्दत बाद नींद आयी है कम से कम कुछ पल सोने तो दे।।
पपीहे की आस जैसी खुशी बच्चे के पैदा होने पर होती हैं ,शायद उससे भी ज्यादा खुशी किसान को बारिश होने पर होती हैं यही खुशी प्यारेलाल की आंखों में दिख रही है, आज बसंत […]
हमने दर्द को दावत दे दिया अपनी गुलिस्ताँ में। देखें क्या रंग लाती है इन अमीरों के अंजुमन में।।
दिखाईं देता है, तुझे अपना दुःख, और तकलीफें भी, और नज़र आ जाती है, अपनी अच्छाईयां भी, मगर मानुष! तू बहुत लालची, दिखावे के लिए तुने, क्या-क्या नहीं किया, फिर दिखाई देती है, तुम्हें अपनी […]
जो कभी दुश्मन था मेरा, वो आज मुझसे हमदर्दी रखता, ये मेरा दर्द ही अब मुझे , आजकल तसल्ली देता है।
आ सनम तुझे मैं आज, अपनी इन गेसूओं में छुपा लूं। ए आँखें बंद होने से पहले, मैं तुझे आँखों में बसा लूं।।
जिसने परखा औरत के दर्द। वही कहलाया जवां एक मर्द।। भाई ताक़त से नहीं जाना जाता। उसे उसका हक़ दो तो ही मर्द।। हुकूमत की चक्की में पीसने वाले। क्यों कहलाते हो तुम जवां एक […]
हे गणपति देव! चतुर्थी पर, प्रणाम आपके चरणों में, कृपा दृष्टि बनी रहे प्रणाम आपके चरणों में, मैं गिरा हुआ अज्ञानी हूँ, सच्ची राह मुझे देना, मेरी वाणी से कभी किसी को ठेस न लगे […]
जितना रोकूं उतना ही बहते , दर्द का किस्सा पल में कहते, आंसू मेरे बड़े ही मनमाने-से, जरा सी बात पर बहते रहते।
‘ये रब करे कि मोहब्बत मेरी असर कर ले, वो दिल को भेज दे, दिल को ही नामाबर कर ले..’ – प्रयाग मायने : नामाबर – डाकिया
इम्तिहां की हद हो गई वक़्त भी बेवफ़ा बन आया जिनके दम पर चलते थे सबसे पहले उनसे विसराया खुद कहा `दूर रहो मुझसे ʼ प्रेम की भिन्न परिभाषा से परिचित करवाया यह कोरोना काल […]
छह मास हो गए पिताजी को गए, छठा मासिक श्राद्ध भी आज हो गया, दिन बीतते से जा रहे हैं, सब कुछ कहीं खो गया। जाने कहाँ चले जाती है आत्मा, कहाँ विलीन हो जाती […]
गणेश – चतुर्थी के शुभ अवसर पर —- गणपति आज हमारे घर आए, खुशियां बहुत साथ वो लाए। साथ रहेंगे कुछ दिन हमारे, हम भी खाएंगे लड्डू ,मोदक उनके सहारे। उनके आने से घर महका […]
रोने वाले पापा मुकुल कितना भी गुस्सा हो ,मगर जब भी वह अपनी बेटी से मिलता हमेशा खुश और जिंदादिली दिखाता । दिनभर की उसकी सारी थकान एक ही सेकंड में फुर हो जाती […]
शरीफों की सभा लगी फिर लुटती रही क्यों द्रौपदी? दु:शासन के दुराचार पर संवेदना क्यों मर गई? यही पूँछे द्रौपदी हर सड़क और हर गली… देवताओं का दाग अहिल्या के दामन जा लगा.. वह नारी […]
नारी है वह यह मत समझ वह तो हुनर की रात है… एक बीमारी से वह लड़ रही है बस यही दु:ख की बात है…
उम्र में एक छोटे जीव के पीछे बड़े दिग्गज पड़े हैं. और कहते हैं हम रिश्ते में उनके करीबी ही रहे हैं…
अगर दर्द समझता तू तो अपनी हरकतों पर शर्मिन्दा होता.. अलग-अलग पहचान से यूँ ताने ना मार रहा होता…
दिल दुखाने की बात ना कर तो अच्छा है एक दिन तुझे सब छोड़ जाएगे.. रह जाएगा बस तेरा ही निशान बाकी तो सब तेरी बातों से ही मर जाएगे..
खाली कविता नहीं करते हैं दर्द भी समझते हैं, दूसरों को दिया हुआ भी, दूसरों से लिया हुआ भी।
अपने दिल का हाल हमें न सुनाओ, हम तो मजाक बना देंगे, बेदर्द राही हैं हम तुम्हारे दर्द पर कविता बना देंगे।
सामने थी, मगर कुछ न कह पाये हम बिन कहे अपने दिल की न रह पाये हम। कुछ न बोले मगर कह दिया हाल सब, आंसुओं में सने से दिखे गाल तब।
‘तू करले जितना अपने दिल पे इख़्तियार मगर, निगाह जानती है उसकी, अपना वार मगर.. ये भी मुमकिन है आज पहली दफा बच जाए, मगर बचेगा कहाँ और कितनी बार मगर..’ – प्रयाग मायने : […]
हम तुम्हारी गली में कहां आ गए हम तो गुस्ताख़ हैं जो यहां आ गए, अब मुहोब्बत हुई है यहां से हमें जाने का मन नहीं है यहां से हमें। दिल दुखाकर भगा दो, तभी […]
खुद को उत्साह में रख न हो मन दुखी, तू बढ़े जा, बढ़े जा न हो मन दुखी। यह तो संसार है, इसमें संघर्ष है, जो बढ़ेगा उसी का ही उत्कर्ष है। तेरे कदमों की […]
सावन की बदरी सी बरसी जो तेरे जुल्फो से बूंदे, कच्चे मकां सा मेरा ये दिल ढह गया।। मदिरा के जाम सी छलकी जो तेरी आंखों से मस्ती, शराबी सा बदन मेरा ये झूमता ही […]
एक था जिम और एक थी डैला, दोनों लंदन में रहते थे। कहानी ये बिल्कुल सच्ची है, मेरे दादा कहते थे। डैला थी बहुत ही सुन्दर, बाल सुनहरी थे उसके जिम भी बांका युवक था, […]
ज़रा सी बात पर चिढ़ना दूसरों को बुरा कहना ये आदत छोड़ दो ना जी उल्टी बात शुरुआत तुमने ही करी थी ना, मिला उत्तर तो चिढ बैठे ये आदत छोड़ दो ना जी
एक दर्द ,अनकहा सा साल में कितने सारे मौसम आते हैं और चले भी जाते हैं, मगर जब भी वसंत और बारिश का मौसम आता है, काव्या का वो दर्द फिर से हरा हो […]
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