रिश्तों के बाजार में अब तो नाते बिकते हैं । मात-पिता को छोड़ अब वह सुत प्यारा, अब तो सास श्वसुर के पास रहते हैं । रिश्तों के बाजार में अब तो नाते बिकते हैं […]
रिश्तों के बाजार में अब तो नाते बिकते हैं । मात-पिता को छोड़ अब वह सुत प्यारा, अब तो सास श्वसुर के पास रहते हैं । रिश्तों के बाजार में अब तो नाते बिकते हैं […]
अपनी अदा देखाकर हुश्न के बाजार में मेरा भाव लगाया तुमने। मिल गया कोई रईसजादा तो इस मुफलिस गरीब को ठुकराया तुमने।। मेरी मुफलिसी का औकात दिखाया तुमने । रईसों के महफिल में मेरा मजाक […]
नये लोग, नयी शहर, नयी जहां मुबारक हो तुम्हें । जहां की सारी खुशियाँ झुके तेरे कदम,ये दुआ है मेरे ।। नये लोग, नयी शहर, नयी जहां मुबारक हो तुम्हें ।।1।। लगे तेरे नसीब की […]
अर्थ जगत का सार नही, प्रेम जगत का सार है । प्रेम से ही टिकी हुई, धरती, गगन, भुवन है ।। अर्थ जगत का सार नही, प्रेम जगत का सार है । अर्थ के कारण […]
ख्याब टूटी, दुनिया लूटी, बिखड़े सभी सहारे । अपनों ने गैर कहा, और गैरों ने अपने । । यहीं है, जहां की दस्तुर पुरानी, बची है कुछ आसें ।।1।। टूटे के बिखड़ जाते, सभी मतलब […]
स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे! माँग की गई वस्तु ही तो कहलाते है दहेज रे! स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे! मात-पिता के द्वारा दी गई वस्तु कहलाते […]
चाहे हिन्दू हो या मुसलमान। गीता पढ़ो,चाहें पढ़ो कुरान। दिलों में जिंदा रखना अपने हिंदुस्तान।। चाहे मन्दिरों में गाओ आरती। या मस्ज़िद में गाओ अज़ान।। दिलों में जिन्दा रखना अपने हिंदुस्तान।। चाहे करो इबादत अल्लाह […]
हंसी ख़ुशी कहीं ,गम की वादियों में खो गयी आज देखो दुनिया क्या से क्या हो गयी दूसरों की सफलता पर ,जो बजती थी तालियाँ वो तालियाँ अब कहीं चिरनिद्रा में सो गयी दूसरों की […]
भारत के युवा जो एक दिन भगत,आजाद बनना चाहते थे । आज वो युवा कौन-से देश की शोभा बढ़ा रही है । वो वीरांगनी झाँसी जिस पे हमे गर्व होता था । आज वो वीरांगनी […]
परतंत्रता की बेड़ियाँ जो थी, वो हमारे महान क्रान्तकारी तोड़ गये । स्वतंत्रता की नीब को जो खाक़ में मिलाना चाहता था, वो खूद ही जमीं में सिमट गये । बाकी जो हिन्द को अधीन […]
मनमोहक छवि मनमोहन की और मनहर है हर लीला उनकी। आनन्दकन्द आनन्द सबन हित घर-घर चोरी की माखन की।।
स्वतंत्रता की जश्न मनाऊँ या परतंत्रता की दास्तां सुनाउँ मैं । मैं भारत की धरती हूँ । क्या-क्या बताऊँ मैं? कुछ लोग जहां मे हमारी पूजन करते है, तो कुछ जहां में हमारी खण्ड को […]
कान्हा देख आगे से ऐसे माखन चोरी मत करना बता दे रही हूँ कह दूंगी मैया से फिर मत कहना।
चलो महाज्ञानी के जीवन से प्रेरणा लेते हैं, जिनकी गाथा मन में नई प्रेरणा जगा दे, जिनकी वाणी हतोत्साह में उत्साह जगा दे , जिनकी वाणी मुर्दों में जान डाल दे, अज्ञानता से ज्ञान की […]
बारिश मूसलाधार है, मुम्बई की थमी रफ्तार है। हर जगह है जलभराव, रेल की पटरी पर चले है नाव। हवाएं भी बहुत तेज़ चली, आती रही बारिश ,मुसीबत ना टली। जल भर गया है, हर […]
मोहक छवि है कैसी, मनभावन कान्हा चितचोर की। माखनचोरी की लीला करते ब्रिज के माखनचोर की।। वसुदेव के सुत, जो वासुदेव कहाते थे नन्द बाबा के घर में नित दृश्य नया दिखाते थे यशोदानन्दन नामथा […]
भ्रम हुआ है तुमको, मैया ! भोला तेरा कृष्ण कन्हैया, माखन नहीं चुरायों है। लांछन लगाएं ब्रजबाला, ग्वालिन बड़ी ही सयानी चपला, मुझको बहुत नचायों हैं, ना नाचूं तो चोर बताएं! और मुख पर माखन […]
ब्रज की एक सखी के घर माखन चोरी करते गिरधर, पकड़ लिए हैं रंगे हाथ फिर भी करते हैं मधुर बात। बोली ग्वालिन यूँ कान खींच मन ही मन में रस प्रेम सींच, बोलो क्यों […]
हम वो राह छोड़ दिए ” ग़ालिब “, जिस राह पे हम कभी चला करते थे। वह डायरी हम आज फाड़ दिए, जिस डायरी पे हम कभी, किसी के लिए ग़ज़ल लिखा करते थे।।
कहे नटवर मैया से, मैं कब माखन खाया। झूठ के गगरी, समस्त ब्रजवासी है लाया।। मैं तो था ,अपने भैया बलराम के संग। अब आप ही बताए, मै कैसे माखन खाया।।
यशोदा पूछ रही कान्हा से, “लल्ला, मटकी से रोज़ – रोज़ माखन कौन चुराता है”। लाड लड़ा के बोले कान्हा, डाल के गलबैयां मां के, ” मैं क्या जानूं , मैं हूं नन्हा बालक ,तू […]
जय जय जय जय जय श्री राम मर्यादा के दुसरे नाम, जय जय…. वन वासी भये तज के राज इस जीवन के तुम कृपा निधान जय जय…. मानवता के सूत्र पिरोये, तुम शौर्य, तेज, सूरज […]
जय जय जय जय जय श्री राम मर्यादा के दुसरे नाम, जय जय…. वन वासी भये तज के राज इस जीवन के तुम कृपा निधान जय जय…. मानवता के सूत्र पिरोये, तुम शौर्य, तेज, सूरज […]
आजकल का यह जमाना है, सबको बेवकूफ बनाना है। समझदारी की कोई कदर नहीं, बस शानो-शौकत दिखाना है। नियमों को कोई यहां तोड़े, नियमों को कोई वहां तोड़े, बस एक दूसरे पे इल्जाम लगाना है। […]
पहली मुलाक़ात अनजाने में कुछ यूं टकराए, किताबे भी हमसे दूर गई। दो मासूम दिलो की ऐसी, वो पहली मुलाक़ात हुई।। सॉरी जो हमने बोला तो, एक ओर सॉरी की आवाज हुई। किताबो को समेटने […]
भव्य मंदिर बना, राम लला का ना ही कोई उपमा है, ना कोई तोड़ इसकी कला का सोचा था, चाहा था, उम्मीद थी लगाई, आशा हुई है पूरी, देखो शुभ घड़ी है आई। सदियों से […]
कोई जब जीवन से चला जाता है, टूटता नहीं फ़िर भी नाता है। बेबस से हो जाते हैं सब, ग़म उसका हरदम सताता है। उजड़ ही जाती है, दुनियां किसी की, जब कोई अपना इस […]
साँवला सलोना चला, माखन चुराने को। मैया ने देख लिया, रंगे हाथ गिरधारी को। कान पकड़ के मैया, कहती हैं नंद से। क्यों चुराए है तू?, माखन यूँ मटकी से। इतने में बोलते हैं, कन्हैया […]
पर्यावरण है जीवन हम सब का ,आओ इसका सम्मान करें क्यों बिगड़ रहे हालात ,इस बात का ध्यान करें हरियाली क्यों ख़त्म हो रही ,धधक रही क्यों सूर्य की ज्वाला बढ़ता प्रदूषण बना रहा ,हिम […]
प्रियतमे तेरे स्वरूप का कैसे वर्णन करूँ अब मैं, सब उपमान सुंदरता के आ गए पूर्व की कविता में। काले बादल से सुन्दर बाल, कमल की पंखुड़ियों से गाल, झील सी आंख, शुक की सी […]
जीवन क्या है? क्या है जीवन! लकड़ी का कोई फट्टा-सा, पेड़ का कोई पत्ता-सा कब टुट जाएं कुछ पता नहीं, मानो कोई गुब्बारा-सा तैरता मटका बेचारा-सा कब फूट जाए पता नहीं।
मां मैं तुमसे कुछ आज कहूँ। जग से प्यारी तुम मेरी मइया, नंदबाबा का मै अनमोल कन्हैया, फिर क्यू दाऊ है मुझे चिढाए , मैं काला मां तू क्यू गोरी, नंद मुझे क्या मोल के […]
ओ कर्मनिष्ठ! तू दुःखी न हो खुद की क्षमता की कर पहचान दुनियां जो कहती, कहने दे उसकी बातों को मत दे कान।
महान तपस्वियों का देश रहा है हमारा भारत वर्ष, आओ फिर से तपस्या करें। कैसी तपस्या, कुछ दूसरे तरह की, तपस्या। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की तपस्या। भ्रष्टाचार के समूल नाश की तपस्या। जरुरतमंद […]
मन को छोटा न कर दुःख दर्द तो मेहमान हैं, आते हैं जाते हैं ये गम स्थाई नहीं हैं ये मेहमान हैं।। न घबरा दुःखों से ये तेरी परीक्षाएं हैं, ये तो तेरे कार्य की […]
अज्ञानता ही ज्ञान का पहला मार्ग है l अज्ञानता से हीन भाव रखना, अपने आप में मूर्खता है l अल्प ज्ञान भी ज्ञान है, जब तक अहम का वास नहीं है l महाज्ञानी भी अज्ञानी […]
रामलला ******* खत्म हुआ वनवास रामलला का शुरू हुआ निर्माण भव्य मन्दिर का पुत्र भाई तात नृप सखा का स्वरूप निभाते तभी तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं जो राम कहाते मानवता प्रेम मित्रता सद्भाव का पाठ […]
नहीं आँचल कभी खिसकने दी वो अपने माथ से। आज देख रहे हैं सब उसको होकर यूं अनाथ से।।
आज न सुन रही थी न हीं पढ़ रही थी वो केवल लेटी थी। मेरी कविताओं को पढ़कर खुश होनेवाली बहू नहीं वो बेटी थी।।
एक बहना चली बांधने राखी अपने भाई के हाथ में। क्रूर काल ने बदल दिया इसे आखिरी मुलाकात में।।
वो मेरे सिर्फ अपने की अपनी थी। महसूस न होने दिया पराएपन को फिर मैं कैसे कहूँ नहीं अपनी थी।
एक बात भी न कर गई वो जाते हुए। हम सब को जग में छोड़ गई रुलाते हुए।।
कैसे दूं हिसाब अपनी बेहिसाब मोहब्बत का वो पूछ बैठे जो आज कि कितनी मोहब्बत है मुझे
इक खुशी की चाह में , कितने गमों को गले लगाया हैं, सुकून तो मिला ही नहीं, अब दर्द से ही काम चलाया है!
कोई गरीबी का मारा , कोई बदनसीबी का मारा , कोई वक्त से परेशान हैं , कोई अपनों का मारा । मगर वो बेपरवाह सा, मगन अपने दर्द में, जो है इश्क का मारा।
बस यही सोचकर रोता हूँ मैं मौन -मौन। सबके हार गीले हैं आंसूओं से मेरी आँखों को पोछेगा आखिर कौन।।
श्यामल रूप है,नंद को लाल है। मोर मुकुट संग, पायल झंकायो है। नटखट अठखेलियों से, गोपियाँ रिझायो है। माखन खायो है, रास रचायो है। यमुना नदी किनारे, बंसी बजायो है। मटकियाँ फोड़त है, गौये चरायो […]
श्री राम का जहां जन्म हुआ मंदिर वहीं बनाएंगे। दुश्मनों के सीने पर हम ध्वज भगवा फहराएंगे।। बचपन बीता जहां आराध्य का वहीं पूजन उनका कराएंगे। मान रखा जहां पिता वचन का मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा […]
चुरा के माखन खाए नटवर नागर नंदा। कान पकड़ के खींचीआज मैया यशोदा ।। माखन चोर है, मैया यशोदा के नंद लाला। तभी तो शिकायत कर गयी समस्त ब्रजबाला ।। घर 🏡 घर में मटकी […]
मात हमारी यशोदा प्यारी,सुनले मोहे कहे गिरिधारी नहीं माखन मैनु निरखत है,झूठ कहत हैं ग्वालननारी। मैं तेरो भोला लला हूँ माता,मुझे कहाँ चुरवन है आत बस वही मै सब खाता, तेरे हाथों का माखन है […]
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