पहली मुलाक़ात अनजाने में कुछ यूं टकराए, किताबे भी हमसे दूर गई। दो मासूम दिलो की ऐसी, वो पहली मुलाक़ात हुई।। सॉरी जो हमने बोला तो, एक ओर सॉरी की आवाज हुई। किताबो को समेटने […]
पहली मुलाक़ात अनजाने में कुछ यूं टकराए, किताबे भी हमसे दूर गई। दो मासूम दिलो की ऐसी, वो पहली मुलाक़ात हुई।। सॉरी जो हमने बोला तो, एक ओर सॉरी की आवाज हुई। किताबो को समेटने […]
भव्य मंदिर बना, राम लला का ना ही कोई उपमा है, ना कोई तोड़ इसकी कला का सोचा था, चाहा था, उम्मीद थी लगाई, आशा हुई है पूरी, देखो शुभ घड़ी है आई। सदियों से […]
कोई जब जीवन से चला जाता है, टूटता नहीं फ़िर भी नाता है। बेबस से हो जाते हैं सब, ग़म उसका हरदम सताता है। उजड़ ही जाती है, दुनियां किसी की, जब कोई अपना इस […]
साँवला सलोना चला, माखन चुराने को। मैया ने देख लिया, रंगे हाथ गिरधारी को। कान पकड़ के मैया, कहती हैं नंद से। क्यों चुराए है तू?, माखन यूँ मटकी से। इतने में बोलते हैं, कन्हैया […]
पर्यावरण है जीवन हम सब का ,आओ इसका सम्मान करें क्यों बिगड़ रहे हालात ,इस बात का ध्यान करें हरियाली क्यों ख़त्म हो रही ,धधक रही क्यों सूर्य की ज्वाला बढ़ता प्रदूषण बना रहा ,हिम […]
प्रियतमे तेरे स्वरूप का कैसे वर्णन करूँ अब मैं, सब उपमान सुंदरता के आ गए पूर्व की कविता में। काले बादल से सुन्दर बाल, कमल की पंखुड़ियों से गाल, झील सी आंख, शुक की सी […]
जीवन क्या है? क्या है जीवन! लकड़ी का कोई फट्टा-सा, पेड़ का कोई पत्ता-सा कब टुट जाएं कुछ पता नहीं, मानो कोई गुब्बारा-सा तैरता मटका बेचारा-सा कब फूट जाए पता नहीं।
मां मैं तुमसे कुछ आज कहूँ। जग से प्यारी तुम मेरी मइया, नंदबाबा का मै अनमोल कन्हैया, फिर क्यू दाऊ है मुझे चिढाए , मैं काला मां तू क्यू गोरी, नंद मुझे क्या मोल के […]
ओ कर्मनिष्ठ! तू दुःखी न हो खुद की क्षमता की कर पहचान दुनियां जो कहती, कहने दे उसकी बातों को मत दे कान।
महान तपस्वियों का देश रहा है हमारा भारत वर्ष, आओ फिर से तपस्या करें। कैसी तपस्या, कुछ दूसरे तरह की, तपस्या। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की तपस्या। भ्रष्टाचार के समूल नाश की तपस्या। जरुरतमंद […]
मन को छोटा न कर दुःख दर्द तो मेहमान हैं, आते हैं जाते हैं ये गम स्थाई नहीं हैं ये मेहमान हैं।। न घबरा दुःखों से ये तेरी परीक्षाएं हैं, ये तो तेरे कार्य की […]
अज्ञानता ही ज्ञान का पहला मार्ग है l अज्ञानता से हीन भाव रखना, अपने आप में मूर्खता है l अल्प ज्ञान भी ज्ञान है, जब तक अहम का वास नहीं है l महाज्ञानी भी अज्ञानी […]
रामलला ******* खत्म हुआ वनवास रामलला का शुरू हुआ निर्माण भव्य मन्दिर का पुत्र भाई तात नृप सखा का स्वरूप निभाते तभी तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं जो राम कहाते मानवता प्रेम मित्रता सद्भाव का पाठ […]
नहीं आँचल कभी खिसकने दी वो अपने माथ से। आज देख रहे हैं सब उसको होकर यूं अनाथ से।।
आज न सुन रही थी न हीं पढ़ रही थी वो केवल लेटी थी। मेरी कविताओं को पढ़कर खुश होनेवाली बहू नहीं वो बेटी थी।।
एक बहना चली बांधने राखी अपने भाई के हाथ में। क्रूर काल ने बदल दिया इसे आखिरी मुलाकात में।।
वो मेरे सिर्फ अपने की अपनी थी। महसूस न होने दिया पराएपन को फिर मैं कैसे कहूँ नहीं अपनी थी।
एक बात भी न कर गई वो जाते हुए। हम सब को जग में छोड़ गई रुलाते हुए।।
कैसे दूं हिसाब अपनी बेहिसाब मोहब्बत का वो पूछ बैठे जो आज कि कितनी मोहब्बत है मुझे
इक खुशी की चाह में , कितने गमों को गले लगाया हैं, सुकून तो मिला ही नहीं, अब दर्द से ही काम चलाया है!
कोई गरीबी का मारा , कोई बदनसीबी का मारा , कोई वक्त से परेशान हैं , कोई अपनों का मारा । मगर वो बेपरवाह सा, मगन अपने दर्द में, जो है इश्क का मारा।
बस यही सोचकर रोता हूँ मैं मौन -मौन। सबके हार गीले हैं आंसूओं से मेरी आँखों को पोछेगा आखिर कौन।।
श्यामल रूप है,नंद को लाल है। मोर मुकुट संग, पायल झंकायो है। नटखट अठखेलियों से, गोपियाँ रिझायो है। माखन खायो है, रास रचायो है। यमुना नदी किनारे, बंसी बजायो है। मटकियाँ फोड़त है, गौये चरायो […]
श्री राम का जहां जन्म हुआ मंदिर वहीं बनाएंगे। दुश्मनों के सीने पर हम ध्वज भगवा फहराएंगे।। बचपन बीता जहां आराध्य का वहीं पूजन उनका कराएंगे। मान रखा जहां पिता वचन का मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा […]
चुरा के माखन खाए नटवर नागर नंदा। कान पकड़ के खींचीआज मैया यशोदा ।। माखन चोर है, मैया यशोदा के नंद लाला। तभी तो शिकायत कर गयी समस्त ब्रजबाला ।। घर 🏡 घर में मटकी […]
मात हमारी यशोदा प्यारी,सुनले मोहे कहे गिरिधारी नहीं माखन मैनु निरखत है,झूठ कहत हैं ग्वालननारी। मैं तेरो भोला लला हूँ माता,मुझे कहाँ चुरवन है आत बस वही मै सब खाता, तेरे हाथों का माखन है […]
ओ कान्हा तूने फ़िर से माखन खाया , तोड़ दी हांडी , सारा माखन भी गिराया….. क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे…. थक जाती हूं […]
Aasan nahi hota hai Kavita yoon hi likhana Dil ke jakhm fir se Hare karne padate hain.
माखन चोर माखन चोर। ब्रज में मचा है यही शोर ।। सब से नजरे बचा के देखो। कैसे भागे माखन चोर।। कहीं मटकी फूटी , कहीं माखन बिखरे । पकड़ो पकड़ो दौड़ो दौड़ो, व्रज में […]
लगाव नहीं जिस देश के युवाओं को राजनीति व अर्थशास्त्र के क्षेत्र में । वो कैसे जानेंगे हम किस व्यवस्था में जी रहे हैं और कैसी स्थिति है हमारी देश की? वो कैसे बदलेंगे कुव्यवस्था […]
जिस नर को अपनी धरा पे अपनी भोग की वस्तु उपलब्ध न हो ।। वह नर नहीं वह तो निज धरा की बोझ है । अगर उन्हें निज धरणी से प्यार नहीं । तो क्या […]
हम भारत के वासी है, संस्कृति हमारी पहचान है । सारी जहां में फैली हुई, हमारी मान-सम्मान है । सादगी है हमारी सबसे निराली, अजब न्यारी है संस्कृति हमारी । प्रशंसक है सारी दुनिया हमारी, […]
रोती धरती चिखता अम्बर, सारा जहां है सोता-सा । आज भी धरती रोती अपने पुत्रों के इच्छाओं पे । मारुत भी आज दुषित हो चुका है, मानव के व्यवहारों से । मानव अब मानव बनने […]
मैं कवि हूँ, मैं फौलाद नहीं, सच कहता हूं, सच बात यही। जो सच से डरते हैं केवल कुढ़ते हैं वे सच बात यही।
रात भर के अंधेरे को जिस तरह सूर्य ने आकर , भगाया एक ही क्षण में, उस तरह आस का सूरज उगाओ आप भी मन में। भगाओ दूर चिंता को नजर रख लक्ष्य पर अपनी […]
हम उस देश के प्रहरी है जिस देश में तिरंगा लहराता है। बुलंदी वाले छत्रपति शिवाजी के चर्चे शत्रु भी करता है।। पंजाबी गुजराती मराठी गोरखा मद्रासी और मुसलमान। सभी देश पे आज भी अपनी […]
अहिल्या पत्थर बनायी जाती है —————******—————— करनी किसी की भी हो,सतायी नारी जाती है । हवस हो इन्द्र की,अहिल्या पत्थर बनायी जाती है ।। युग युगांतर से यही,बस होता आया है अहम तुष्टि हो नर […]
इल्म भी नहीं हुआ तेरे जाने का आज भी कही बसती हो मेरे दिल मे इन बारिस की शामों मे अक्सर याद आती हो हा तेरा घरौंदा छोड़ उड़ गई पर देखो आज भी संभाल […]
Kavi man bahut hi komal hai. Hans kar jeena iska hal hai.
Chota sa dil hai toot hi jaata hai. Par koi nahi ye duniya hai. Yahan aisa ho jaata hai. Aawaz uthaane ki himmat hai Tujhame pagali. Rote nahi hain aise noor chala jaata. Just for […]
मेरा भारत कमजोर नहीं मेरा भारत कमजोर नहीं तू चाइना आँख दिखाना मत, औरों के कंधे पर रखकर हमको बन्दूक दिखाना मत। हम तेरी गीदड़ भभकी का उत्तर देने में सक्षम हैं, जल-थल- नभ में […]
ब्रह्मचर्य, हाँ ठीक है कहना, लेकिन क्या भारतमाता के सभी पुत्र ब्रह्मचारी बन सृजन से दूर चले जाएँ। नहीं – नहीं नयी पीढ़ी का सृजन युवा रक्त से हो, इसलिए विरक्ति की नहीं जरुरत सृजन […]
रक्षा का त्योहार है, ये बंधन नहीं है, प्यार है। मूल्य ना आंको भेंट का, यह प्रेम का उपहार है। दुरियां- नजदिकीयां, ये भृम का जंजाल है। भाव बिना हैं तीर्थ क्या, प्रेम हो तो […]
तू ठेस देने वालों से न घबरा तेरे में हुनर बहुत है, तेरी लेखनी की धार में खनक बहुत है। हवाएं तो आती रहेंगी जाती रहेंगी, आँख में रेत का कण डालकर रुलाती रहेंगी, लेकिन […]
कवियों की नगरी में भी दिल दुखाने लगें हैं लोग ना चाहते हुए भी पास आने लगे हैं लोग। आम जिंदगी से परेशान होकर जी लेते हैं हम कल्पना में, वहाँ भी हलचल मचाने लगे […]
लोगों की नज़रों का क्या कहना झटपट रंग जमाते हैं झूँठे-मूँठे रिश्ते खूब बनाते हैं। माँ को कुछ समझते ही नहीं हर गलियारों में शोर मचाते हैं। बहन को माँ कहने लगे हैं लोग लोगों […]
कभी तुम झगड़ती हो, तो कभी रुठ जाती हो। फिर कभी चाय का कप लेकर, मुझे मनाती हो। पल-पल गुजरती जिन्दगी, रेत सी फिसलती जाती है। ओर तुम सारा दिन, मकां को घर बनाती हो। […]
दिल में कुछ ,जबान पर कुछ नजर आता है अपनों में भी ,शत्रु नजर आता है कुछ पलों की मुलाकात से ,पहचान नहीं सकते किसी के ह्रदय में क्या है ,जान नहीं सकते हर चेहरे […]
एक रात की बात बताऊं मित्रों , मेरे घर पर आए चोर । थी मैं अकेली उस दिन घर पर, मुझ पर आज़माने लग गए ज़ोर । “पैसे देदो, ज़ेवर देदो”, उनकी मांगों का ना […]
ये कैसी है रीति ये कैसी है नीति? निज राष्ट्र की जनता भूख से हैं मरती । ये अन्न स्वयं उगाती फिर भी ये अन्न को क्यूँ तरसती? ये कर भी देती राष्ट्र को फिर […]
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