” अपहरण “हाथों में तख्ती, गाड़ी पर लाउडस्पीकर, हट्टे -कट्टे, मोटे -पतले, नर- नारी, नौजवानों- बूढ़े लोगों  की भीड़, कुछ पैदल और कुछ दो पहिया वाहन से, नारा लगाते  चिल्लाते उसी  कुछ झण्डा  चमकाते दलगत राजनीति […]

परिश्रम की अग्नि में तपकर सफलता का रंग बिखरता है काटों का भी संग देखो ,फूलों को नहीं अखरता है इस दुनिया में कुछ करके दिखाओ दिन जल्दी जल्दी ढलता है बीज भी तो मिट्टी […]

पप्पू परधानी मा खड़ा हयिन जनता के गोडे मा पड़ा हयिन जनता ताई वय लड़ा हयिन जनता ताई वय खड़ा हयिन जितय ताई वय हैरान हयिन पूर्व परधान से परेशान हयिन भावी परधान लिखाए लिहिन […]

बहुत ढूंढा, बहुत कोशिश की, बहुत आवाज लगाई। लेकिन वह वापस ना आया, वह बचपन था मेरे भाई। गांव की गलियों में खेलना, कूदना, दौड़ना, भागना, गलती छुपाने के लिए हर बात पर, मां की […]

बारह बरस की कोमल कली थी, अपने ही घर पर, पर, अकेली थी। जाने कहां से आए थे दानव, दानव ही थे वो, बस दिखते थे मानव। कोयल सी बोली थी, दिखने में भोली थी, […]

यह संसार बदलाव का है और पल पल बदलता रहा है कोई मिलता है कोई बिछुड़ता, चक्र ऐसा ही चलता रहा है। वश किसी का रहा है न इसमें वश किसी न इसमें रहेगा, जिंदगी […]

जो सोचते हैं कि उन्होंने सच को भागने पर मजबूर कर दिया अब झूठ के सहारे फिर बुलंदियों पर चढ़ जायेंगे वो भूल जाते हैं कि सच सच है सच की ही सत्ता है, एक […]

तू है माखनचोर। कान्हा तुम आ जाते छुपके खा जाते हो माखन चुपके, तड़के आँगन सखियाँ करतीं शोर तू है माखनचोर। दही मगन खा मटकी तोड़ी करते नहीं शरारत थोड़ी, गाँव में अब चर्चा है […]

दानव तो है, यूं ही बदनाम ग्रंथ-पुराणों में , मैंने देखा है,शैतान! इंसानों में। रूह कांप जाए; हृदय फट जाए, हैवानियत की हदें पैर फैलाए‌। शर्मसार होती है मानवता ; सुर्ख़ियों के गलियारों में, मैंने […]

आयो कान्हा देखि मोहे तोरे संगी साथी कुछ भाग चलत, कुछ ले परदे कि आड़ छुप खम्ब कि ओट देखत मोहे कि आज मेरो पकड़ में आयो कान्हा जब यह आया चुपके से माखन खाने को […]

नटखट, ओ लल्ला मोरे तू काहें मोहे खिझायों। संग सखा तू पुनि-पुनि मटकी पर नज़र लगायो।। सब ग्वालन से मिलकर झटपट माखन खायो। नटखट ओ लल्ला मोरे तू काहें मोहे खिझायों।। मैया, ओ प्यारी मैया […]

छूप छूप के खाये माखन है ये माखन चोर बड़ा नटखट है प्यारा नंद किशोर घुसे घर में मित्रो के संग देखी माखन की मटकी देखा खूब सारा माखन सबकी नज़र उसी पे अटकी खाये […]

ढूंढता हु आज भी सुकून के कुछ पल बचपन की यादों को टटोल के देखा तोह जी चूका हु वह पल मानता हु पैसे नहीं थे उतने पर मज़ा तोह खूब किया दादी माँ के […]

ए वतन ए वतन तेरी सरफ़रोशी मे खो जाए मेरा तन बदन ए वतन ए वतन तेरी परस्तिश मे जी जाऊ मै सारा जीवन वैसे तोह वासुदेव कुटुम्बकम का देश है पर सोच जो दुश्मन […]

चलो कुछ नया करते हैं, लहरों के अनुकूल सभी तैरते, चलो हम लहरों के प्रतिकूल तैरते हैं , लहरों में आशियाना बनाते हैं, किसी की डूबती नैया पार लगाते हैं l चलो कुछ नया करते […]

पहली मुलाक़ात थी अधूरी सी दूजी को हम तरस रहे, भूल ना रहे उन लम्हों को बादल प्रेम के उमड़ रहे।। भूखे- प्यासे हम भटक रहे आंखों में उनकी तस्वीर लिए,, उनका नाम, न ठिकाना […]

सावन में ए सखी, खनके क्यों कँगना। कोयलिया गीत सुनाए ,क्यों मेरे घर अँगना।। बार बार दिल धड़काए, प्यास जगाए। जाने क्या करेगी, मेरी नादान ए कँगना।। जब सुनती हूँ, “ए शोभा पियु कहाँ ” […]

सावन में ए सखी, खनके क्यों कँगना। कोयलिया गीत सुनाए ,क्यों मेरे घर अँगना।। बार बार दिल धड़काए, प्यास जगाए। जाने क्या करेगी, मेरी नादान ए कँगना।। जब सुनती हूँ, “ए शोभा पियु कहाँ ” […]

भीड़ में जब कभी तुम खुद को तन्हा पाओगे, तब हमें याद करना, दिल में हमें पाओगे। प्यार हो , इस तरह से छोड़ कर न जाओ तुम प्यार हम से अधिक दूजे से नहीं […]

गरीबी एक एहसास है, इसमें एक मीठी सी दर्द है, रोज़ की दर्द में भी संतोष छिपी है, फकीरी में अमीरी का एहसास है, शायद यही गरीबी है l मुर्गे की बांग  से सुबह जग […]

शीर्षक भार्इ- बन्धु हे भ्रातृ लिखे हो जो छंद मुझे, पढ़कर मैं बहुत प्रसन्न हुआ । उत्तर में लिखा सवैया हूं, जैसा मन में उत्पन्न हुआ ।। जो कुछ त्रुटियां होगी उसमें, तुम ध्यान नहीं […]

कमाल है कवि आज के । पंडित है शब्द साधक खुद को कहते है । दूसरों को शब्दों से पीड़ा पहुँचाते है । खूद को ग्यानी, सर्वश्रेष्ठ कवि कहते है । कमाल है कवि आज […]

मेरा वजूद भी तेरा ———***——- मेरा वजूद भी कहाँ रहा मेरा इसपर चढ़ा हर रंग तुम्हारा है । छूटे माँ पापा, कहाँ मैका अब मेरा तेरा घर ही अपना बसेरा है ।। मैं ही नहीं,कहाँ […]

दूर चले गये राही आ अब लौट आ, कब तक रहेगा रूठा-रूठा तेरे बिना मैं भी तो रहता हूँ टूटा-टूटा। अपने दो बोल सुना जा अब तो आ जा। जिद न कर, लौट आ घर। […]

कविता- माखन ———————— नटखट लाला नयनो के तारा, छोड़ दे तू सब काम निराला| मैं सह लूंगी बात तुम्हारी, आए शिकायत रोज तुम्हारी| सुन सुन के मै हार गयी हू, गगरी फोरा सब की सारी, […]

जब भी मनमोहन, श्याम सलोना, बंशीधर मुरली बजाने लगा, ह्रदय तल के धरातल पे वो प्रेम की ज्योति जलाने लगा, कभी गैयों और ग्वालों का प्यारा कन्हिया गोपियों संग रास रचाने लगा, कभी माँ जसोदा […]

वो वक़्त जब कॉलेज में थे, तुम मिलने आया करते थे। कहते थे बस दोस्त रहेंगे, कॉफी साथ पिया करते थे। कहते थे तुम प्यार मत करना बातें रातभर किया करते थे। दोस्तों को अक्सर […]

मैया यशोदा से लिपट के, हँस के बोले नंदलाला। माखन कहाँ खाया है, तेरा सबसे दुलारा नंदलाला ।। दोष लगाना कान खिंचवाना, यही सभी को भाता है। बाल सखा से पूछ ले मैया, कहाँ था […]

39: बहना की मुराद ************* बहना की मुराद हुई पूरी भाई का आना था जरूरी बरसों से चाह थी उस सावन की जिसकी पूर्णमासी को भाई की सूनी कलाई पे, होगी मंगल कामना की रेशम […]

कुछ ऐसा लिखो कि लोग तुम्हें पढ़ें पढ़कर मन के भीतर नयी चेतना के बीज उगें। कुछ ऐसा लिखो कि सार्थक हो, शुद्ध हो तभी कविता कहेगी कि तुम प्रबुद्ध हो। पहले साहित्य पढ़ो तब […]

माखन निकाल रही यशोदा मैया ध्यान में है सिर्फ श्याम कन्हैया भूखे जब होंगे बाल गोपाल तब दूंगी उन्हें माखन निकाल अभी रख देती हूं इसे संभाल मन में है हरदम उन्हीं का ख्याल हरि […]

यदि हम कवि हैं या स्वयं को कवि मानते हैं तो हमें उस भाषा की गरिमा रखनी ही होगी, जिस भाषा का हम स्वयं को कवि मानते हैं , यदि हम इंसान हैं या स्वयं […]

मेरे ख्वाबों में है एक तस्वीर दिल पर लिखा है एक नाम अनदेखी नज़रें मिलने को हैं बेकरार जिनमें होगा बस प्यार ही प्यार दूर से ही कदमों की आहट सुनाई देती है और दिल […]

मैं संविधान की धारा हूँ, निकली पीछे के दरवाजे से थी l रोक ना पाया मुझे कोई, मेरे से विका था कोई l अहंकार से चूर घर आया,कश्मीरियों पर अपना धौंस जमाया l इतने में […]

पकड़ मत कान री मैया कसम कुण्डल की खाऊँ मैं। शिकायत कर रही झूठी कहानी सच की बताऊँ मैं ।। करूँ क्यों मैं भला चोरी घर में हैं बहुत माखन। नचाती नाच छछिया पे चखूँ […]

46: अरमान ———***—– विभिन्न धर्मों की मिली-जुली गूंज सदियों से हमारी माटी के कण-कण में विद्यमान है । हमसब के मन-मन्दिर में बसते, जन-गण के नायक बस श्रीराम हैं ।। जहाँ मन्दिरों के घंटे,मस्जिदों की […]

होत धन के तीन चरणः- दान प्रथम अतिउत्तम है । द्वितीय भोग स्वयं बचाव है । विनाश तृतीय चरण है । होत धन के तीन चरण ।। यदि धन का व्यय मौलिक आवश्यकता पर हो,तो […]

प्रभु जी मेरो उध्दार तो करो जन्म-जन्म की पापीनी मैं मेरा निस्तार तो करो । प्रभु जी मेरो उध्दार तो करो ।। अहल्या तो तुमने तारा, ग्यान दियो तुमने तारा को । मंदोदरी है भक्त […]

मैंने व्यर्थ ही जिन्दगी गँवायो रे! कभी राम नाम लिया तो नहीं । मैंने व्यर्थ ही जिन्दगी गँवायो रे! नर तन लेकर इस जहां में आया नारायण को पाने को । भोग-विलास में रमा रहा […]

कपड़े बदले, वेश बदला, बदला घर-संसारा । माया-मोह में फँसा रहा तु नर पर बदल सका न अपना व्यवहार । रे! क्या-क्या बदला तु इंसान-2 तन को धोया नित-नित दिन तु, पर मन को धोया […]

कौसल्या का आँख का तारा, दशरथ राम दुलारा । कैकयी सुमित्रा का है तु सबसे प्यारा आजा-2 मेरे राम दुलारा ।। उर में तेरा भरत का वासा, संग में रहते लक्ष्मण न्यारा । शत्रुघ्न है […]

कुछ तो शर्म करो, लाज रखो निज राष्ट्र की कुछ तो शर्म करो, लाज रखो निज राष्ट्र की मर्यादा राम की इस भू पे सीता की इस पवित्र जमीं पे कुछ तो सम्मान करो निज […]

एक शानदार टिप्पणी करने को जी चाहता है । आपकी बातों को जिन्दगी में उतारने को जी चाहता है । कमबख्त! जिन्दगी किस रूख पे आकर खड़ी है । उसे लौटाने को जी चाहता है […]

वह रहने वाली महलों में, मैं लड़का फुटपाथ का । उसकी हर एक अदा पे मरना यही मेरा जज्बात था । वह रखने वाली टच मोबाईल, मैं लड़का कीपैड वाला । उसकी हर एक अदा […]

ठहरो-ठहरो इनको रोको, ये तो बहसी-दरिन्दें हैं । अगर इसे अभी छोड़ डालोगे. तो आगे इसका परिणाम बुरा भुगतोगे ।। ठहरो-ठहरो इनको रोको, ये तो बहसी-दरिन्दें हैं । बहसी-दरिन्दें को बख्सना देश हित में ठीक […]

पत्थर को पूजते-पूजते थक गये हम कई वर्षों से । पर क्या खाक मिला हमें, तुझसे ओ बेवफा मुहब्बत करने से ।। पत्थर को पूजते-पूजते थक गये हम कई वर्षों से । उनको मुहब्बत मिले […]