दूर चले गये राही आ अब लौट आ, कब तक रहेगा रूठा-रूठा तेरे बिना मैं भी तो रहता हूँ टूटा-टूटा। अपने दो बोल सुना जा अब तो आ जा। जिद न कर, लौट आ घर। […]

कविता- माखन ———————— नटखट लाला नयनो के तारा, छोड़ दे तू सब काम निराला| मैं सह लूंगी बात तुम्हारी, आए शिकायत रोज तुम्हारी| सुन सुन के मै हार गयी हू, गगरी फोरा सब की सारी, […]

जब भी मनमोहन, श्याम सलोना, बंशीधर मुरली बजाने लगा, ह्रदय तल के धरातल पे वो प्रेम की ज्योति जलाने लगा, कभी गैयों और ग्वालों का प्यारा कन्हिया गोपियों संग रास रचाने लगा, कभी माँ जसोदा […]

वो वक़्त जब कॉलेज में थे, तुम मिलने आया करते थे। कहते थे बस दोस्त रहेंगे, कॉफी साथ पिया करते थे। कहते थे तुम प्यार मत करना बातें रातभर किया करते थे। दोस्तों को अक्सर […]

मैया यशोदा से लिपट के, हँस के बोले नंदलाला। माखन कहाँ खाया है, तेरा सबसे दुलारा नंदलाला ।। दोष लगाना कान खिंचवाना, यही सभी को भाता है। बाल सखा से पूछ ले मैया, कहाँ था […]

39: बहना की मुराद ************* बहना की मुराद हुई पूरी भाई का आना था जरूरी बरसों से चाह थी उस सावन की जिसकी पूर्णमासी को भाई की सूनी कलाई पे, होगी मंगल कामना की रेशम […]

कुछ ऐसा लिखो कि लोग तुम्हें पढ़ें पढ़कर मन के भीतर नयी चेतना के बीज उगें। कुछ ऐसा लिखो कि सार्थक हो, शुद्ध हो तभी कविता कहेगी कि तुम प्रबुद्ध हो। पहले साहित्य पढ़ो तब […]

माखन निकाल रही यशोदा मैया ध्यान में है सिर्फ श्याम कन्हैया भूखे जब होंगे बाल गोपाल तब दूंगी उन्हें माखन निकाल अभी रख देती हूं इसे संभाल मन में है हरदम उन्हीं का ख्याल हरि […]

यदि हम कवि हैं या स्वयं को कवि मानते हैं तो हमें उस भाषा की गरिमा रखनी ही होगी, जिस भाषा का हम स्वयं को कवि मानते हैं , यदि हम इंसान हैं या स्वयं […]

मेरे ख्वाबों में है एक तस्वीर दिल पर लिखा है एक नाम अनदेखी नज़रें मिलने को हैं बेकरार जिनमें होगा बस प्यार ही प्यार दूर से ही कदमों की आहट सुनाई देती है और दिल […]

मैं संविधान की धारा हूँ, निकली पीछे के दरवाजे से थी l रोक ना पाया मुझे कोई, मेरे से विका था कोई l अहंकार से चूर घर आया,कश्मीरियों पर अपना धौंस जमाया l इतने में […]

पकड़ मत कान री मैया कसम कुण्डल की खाऊँ मैं। शिकायत कर रही झूठी कहानी सच की बताऊँ मैं ।। करूँ क्यों मैं भला चोरी घर में हैं बहुत माखन। नचाती नाच छछिया पे चखूँ […]

46: अरमान ———***—– विभिन्न धर्मों की मिली-जुली गूंज सदियों से हमारी माटी के कण-कण में विद्यमान है । हमसब के मन-मन्दिर में बसते, जन-गण के नायक बस श्रीराम हैं ।। जहाँ मन्दिरों के घंटे,मस्जिदों की […]

होत धन के तीन चरणः- दान प्रथम अतिउत्तम है । द्वितीय भोग स्वयं बचाव है । विनाश तृतीय चरण है । होत धन के तीन चरण ।। यदि धन का व्यय मौलिक आवश्यकता पर हो,तो […]

प्रभु जी मेरो उध्दार तो करो जन्म-जन्म की पापीनी मैं मेरा निस्तार तो करो । प्रभु जी मेरो उध्दार तो करो ।। अहल्या तो तुमने तारा, ग्यान दियो तुमने तारा को । मंदोदरी है भक्त […]

मैंने व्यर्थ ही जिन्दगी गँवायो रे! कभी राम नाम लिया तो नहीं । मैंने व्यर्थ ही जिन्दगी गँवायो रे! नर तन लेकर इस जहां में आया नारायण को पाने को । भोग-विलास में रमा रहा […]

कपड़े बदले, वेश बदला, बदला घर-संसारा । माया-मोह में फँसा रहा तु नर पर बदल सका न अपना व्यवहार । रे! क्या-क्या बदला तु इंसान-2 तन को धोया नित-नित दिन तु, पर मन को धोया […]

कौसल्या का आँख का तारा, दशरथ राम दुलारा । कैकयी सुमित्रा का है तु सबसे प्यारा आजा-2 मेरे राम दुलारा ।। उर में तेरा भरत का वासा, संग में रहते लक्ष्मण न्यारा । शत्रुघ्न है […]

कुछ तो शर्म करो, लाज रखो निज राष्ट्र की कुछ तो शर्म करो, लाज रखो निज राष्ट्र की मर्यादा राम की इस भू पे सीता की इस पवित्र जमीं पे कुछ तो सम्मान करो निज […]

एक शानदार टिप्पणी करने को जी चाहता है । आपकी बातों को जिन्दगी में उतारने को जी चाहता है । कमबख्त! जिन्दगी किस रूख पे आकर खड़ी है । उसे लौटाने को जी चाहता है […]

वह रहने वाली महलों में, मैं लड़का फुटपाथ का । उसकी हर एक अदा पे मरना यही मेरा जज्बात था । वह रखने वाली टच मोबाईल, मैं लड़का कीपैड वाला । उसकी हर एक अदा […]

ठहरो-ठहरो इनको रोको, ये तो बहसी-दरिन्दें हैं । अगर इसे अभी छोड़ डालोगे. तो आगे इसका परिणाम बुरा भुगतोगे ।। ठहरो-ठहरो इनको रोको, ये तो बहसी-दरिन्दें हैं । बहसी-दरिन्दें को बख्सना देश हित में ठीक […]

पत्थर को पूजते-पूजते थक गये हम कई वर्षों से । पर क्या खाक मिला हमें, तुझसे ओ बेवफा मुहब्बत करने से ।। पत्थर को पूजते-पूजते थक गये हम कई वर्षों से । उनको मुहब्बत मिले […]

रिश्तों के बाजार में अब तो नाते बिकते हैं । मात-पिता को छोड़ अब वह सुत प्यारा, अब तो सास श्वसुर के पास रहते हैं । रिश्तों के बाजार में अब तो नाते बिकते हैं […]

अपनी अदा देखाकर हुश्न के बाजार में मेरा भाव लगाया तुमने। मिल गया कोई रईसजादा तो इस मुफलिस गरीब को ठुकराया तुमने।। मेरी मुफलिसी का औकात दिखाया तुमने । रईसों के महफिल में मेरा मजाक […]

नये लोग, नयी शहर, नयी जहां मुबारक हो तुम्हें । जहां की सारी खुशियाँ झुके तेरे कदम,ये दुआ है मेरे ।। नये लोग, नयी शहर, नयी जहां मुबारक हो तुम्हें ।।1।। लगे तेरे नसीब की […]

ख्याब टूटी, दुनिया लूटी, बिखड़े सभी सहारे । अपनों ने गैर कहा, और गैरों ने अपने । । यहीं है, जहां की दस्तुर पुरानी, बची है कुछ आसें ।।1।। टूटे के बिखड़ जाते, सभी मतलब […]

स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे! माँग की गई वस्तु ही तो कहलाते है दहेज रे! स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे! मात-पिता के द्वारा दी गई वस्तु कहलाते […]

चाहे हिन्दू हो या मुसलमान। गीता पढ़ो,चाहें पढ़ो कुरान। दिलों में जिंदा रखना अपने हिंदुस्तान।। चाहे मन्दिरों में गाओ आरती। या मस्ज़िद में गाओ अज़ान।। दिलों में जिन्दा रखना अपने हिंदुस्तान।। चाहे करो इबादत अल्लाह […]

हंसी ख़ुशी कहीं ,गम की वादियों में खो गयी आज देखो दुनिया क्या से क्या हो गयी दूसरों की सफलता पर ,जो बजती थी तालियाँ वो तालियाँ अब कहीं चिरनिद्रा में सो गयी दूसरों की […]

भारत के युवा जो एक दिन भगत,आजाद बनना चाहते थे । आज वो युवा कौन-से देश की शोभा बढ़ा रही है । वो वीरांगनी झाँसी जिस पे हमे गर्व होता था । आज वो वीरांगनी […]

परतंत्रता की बेड़ियाँ जो थी, वो हमारे महान क्रान्तकारी तोड़ गये । स्वतंत्रता की नीब को जो खाक़ में मिलाना चाहता था, वो खूद ही जमीं में सिमट गये । बाकी जो हिन्द को अधीन […]

स्वतंत्रता की जश्न मनाऊँ या परतंत्रता की दास्तां सुनाउँ मैं । मैं भारत की धरती हूँ । क्या-क्या बताऊँ मैं? कुछ लोग जहां मे हमारी पूजन करते है, तो कुछ जहां में हमारी खण्ड को […]

चलो महाज्ञानी के जीवन से प्रेरणा लेते हैं, जिनकी गाथा मन में नई प्रेरणा जगा दे, जिनकी वाणी हतोत्साह में उत्साह जगा दे , जिनकी वाणी मुर्दों में जान डाल दे, अज्ञानता से ज्ञान की […]

बारिश मूसलाधार है, मुम्बई की थमी रफ्तार है। हर जगह है जलभराव, रेल की पटरी पर चले है नाव। हवाएं भी बहुत तेज़ चली, आती रही बारिश ,मुसीबत ना टली। जल भर गया है, हर […]

मोहक छवि है कैसी, मनभावन कान्हा चितचोर की। माखनचोरी की लीला करते ब्रिज के माखनचोर की।। वसुदेव के सुत, जो वासुदेव कहाते थे नन्द बाबा के घर में नित दृश्य नया दिखाते थे यशोदानन्दन नामथा […]

भ्रम हुआ है तुमको, मैया ! भोला तेरा कृष्ण कन्हैया, माखन नहीं चुरायों है। लांछन लगाएं ब्रजबाला, ग्वालिन बड़ी ही सयानी चपला, मुझको बहुत नचायों हैं, ना नाचूं तो चोर बताएं! और मुख पर माखन […]

ब्रज की एक सखी के घर माखन चोरी करते गिरधर, पकड़ लिए हैं रंगे हाथ फिर भी करते हैं मधुर बात। बोली ग्वालिन यूँ कान खींच मन ही मन में रस प्रेम सींच, बोलो क्यों […]

कहे नटवर मैया से, मैं कब माखन खाया। झूठ के गगरी, समस्त ब्रजवासी है लाया।। मैं तो था ,अपने भैया बलराम के संग। अब आप ही बताए, मै कैसे माखन खाया।।

यशोदा पूछ रही कान्हा से, “लल्ला, मटकी से रोज़ – रोज़ माखन कौन चुराता है”। लाड लड़ा के बोले कान्हा, डाल के गलबैयां मां के, ” मैं क्या जानूं , मैं हूं नन्हा बालक ,तू […]

जय जय जय जय जय श्री राम मर्यादा के दुसरे नाम, जय जय…. वन वासी भये तज के राज इस जीवन के तुम कृपा निधान जय जय…. मानवता के सूत्र पिरोये, तुम शौर्य, तेज, सूरज […]

जय जय जय जय जय श्री राम मर्यादा के दुसरे नाम, जय जय…. वन वासी भये तज के राज इस जीवन के तुम कृपा निधान जय जय…. मानवता के सूत्र पिरोये, तुम शौर्य, तेज, सूरज […]

आजकल का यह जमाना है, सबको बेवकूफ बनाना है। समझदारी की कोई कदर नहीं, बस शानो-शौकत दिखाना है। नियमों को कोई यहां तोड़े, नियमों को कोई वहां तोड़े, बस एक दूसरे पे इल्जाम लगाना है। […]