चिख-चिल्लाकर ही देशभक्ति दिखाई जा सकती है क्या?
जो मौन है कुछ बोलते नही, क्या वह देशभक्त नहीं है क्या है?
जो चीखते है हम भगत है, वह भगत सिंह को जानते है क्या?
कवि वीररस के हो या श्रृंगार-रस के सबके उर में होते निजी स्वार्थ ।
पर जो कलम के जोर से हटा दे देश से कुव्यवस्था और स्थापित करवा दें
सच्चे वीर हिन्दुस्तानी क्रान्तिकारियों के तरह देश में सुव्यवस्था ।
वह है सच्चे हिन्दुस्तानी, वीरसिपाही भगत सिंह जैसे वीर सपुत कवि सच में महान ।।1।।
भक्त कबीर जैसे समाज-सुधारक है, ऐसे ही कवि विश्व का दर्पण व समाज का आईना है ।
ऐसे ही राष्ट्र का धरोहर व समस्त जनों को मार्गदर्शक है ।
कबीर की वाणी गागर में सागर है, पढें जो इनकी उक्ति और नहीं होवे
अगर वह सज्जन तो वह व्यक्ति दुर्जनों का संगति का मारा है ।।2।।
वर्तमान समय में खूब बातें हो रही है प्रजाहित के लिए ।
पर प्रजा को ही क्यूँ शोषित किया जा रहा है प्रजा कल्याण के लिए ।
सुनो सिंहासनपति तुम, देश की जनता तुम्हारे सुत समान है ।
अगर तुम इस ठुकराओ, धिक्कारोगे, रूलाओगे तो तुम्हारी धरा भी तुम्हें धिक्कारेंगी ।
ऐ! जरा राजा तुम सकल धरा के तुम पूर्ण स्वामी हो ।
तुम्हारी धरा भी तुमसे मुख मोड़ेगी, अरे! मूढ! राजा इससे बड़ी शर्म की बात और क्या होगी?
चीख-चिल्लाकर ही देशभक्ति दिखाई जा सकती है क्या ?
कवि विकास कुमार
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