किसी को मत गिराया करो लंगड़ी देकर, किसी को मत रोका करो टंगड़ी दे कर। दुनिया में तो कैसे कैसे पहलवान हैं, कमजोर को मत डराया करो धमकी देकर।
किसी को मत गिराया करो लंगड़ी देकर, किसी को मत रोका करो टंगड़ी दे कर। दुनिया में तो कैसे कैसे पहलवान हैं, कमजोर को मत डराया करो धमकी देकर।
तूम सागर हो तो , हम लहर है तुम्हारी। तुम वजा हो; उसकी , जो लगी है हमें बीमारी। शायद ही कोई लम्हा हो, जब आए ना याद तुम्हारी। अब ख़ुदा ही जाने , क्या […]
हंसता चहरा रो दिया, आचंल पूरा भीगो दिया, आज पहली बार। बन्जर है अब दिल की जमीं, शायद कुछ थी हम में ही कमी, मायूस दिल है रो दिया, लगता कुछ है खो दिया, आज […]
मंजिल तक पहुँचने में कठिनाइयां न आएं तो मजा नहीं आता, कोई बेवजह दर्द दे तो सहा नहीं जाता।
करते रहो संघर्ष तुम संघर्ष से ही पा सकोगे, बस संघर्ष झगडे सा नहीं बल्कि मेहनत से आगे बढ़ने का हो, कुछ अच्छा करने का हो।
थोड़ी मोहलत मांगता हु रब बस एक बार उनका दीदार हो जाए फासले जो फैसलों की वजह से थे बस उस पर सुलह हो जाए यूँ रूठना भी कुछ होता है क्या एक बार मुरना […]
मेरे भारत की शान निराली, सुंदरता के क्या कहने देखो कश्मीर, हिमालय के ऊँचे – ऊँचे निर्मल पर्वत, सुंदरता से हैं भरे हुए भारत माँ के हैं गहने । कश्मीर स्वर्ग धरती का है, औ […]
झूठ की दुकान खूब चली, “सच”, सच बोलता रहा उसकी ना चलनी थी, ना चली, पर ये ज्यादा लंबा चलने वाला ना था काठ की हांडी में एक बार तो पका लिया, फिर दोबारा चढ़ी, […]
ओ !! प्रियतम मेरे तू ही बता, मेरा मन इतना विचलित क्यों ? मैं सच के पथ से विचलित क्यों ? जो दर्द उठाता कल तक आवाज उठाता था कल तक वह दर्द उठाना छोड़ा […]
3: इन्सानियत कहाँ जिनसे जीवन के गुल खिले, मरते ही शूल हो गये जिन्दगी जीने की चाह में क्यूँ, मशगूल हो गये ।। यह ऐसी महामारी है जिसने इन्सानियत में सेंध लगाई है अमानवीय बन […]
आज हम कहाँ और कहाँ है हमारी संवेदना भूल गयें अपनों को,कहाँ कैसी है वेदना ।। भूल बैठे उन भावनाओं को जब किसी मृत के शव पर लिपटकर रोया करते थे देते अंतिम विदाई, सुध […]
मत समझना कि नादान कवि हूँ बहकी बहकी सी कविता कहूंगा जिस तरफ बह रही हो हवा धूल सा उस दिशा को बहूँगा। राज दरबार का कवि नहीं हूँ आम जनता बातें कहूंगा सो न […]
लम्बे- लम्बे हो गए दिन , रात समुन्दर जैसी हैं , तेरे बिन; इश्क के मंजर में, हालत बंजर जैसी हैं । किया है तूमने जादू हम पर, तेरी आंखों में मदहोशी है, कैसे ना […]
समय पतंग की डोर जैसी l मांजा बड़ी तेज है l किसकी पतंग काट जाए विश्वास नहीं l कभी राजा संग कभी रंक संग l पल में तेरा पल में मेरा हो जाए l कब […]
बहन बुला लो घर में रक्षाबंधन आया है, पुआ बना लो घर में रक्षाबंधन आया है। रंग-बिरंगे रेशम धागे सजी कलाई भाई की मुंह मीठा करवालो रक्षाबंधन आया है।
जमाना अब तो बदला है कहाँ अब कोई दूरी है बेटा और बेटी- दोनों का, होना जरूरी है बिना इनके ना जिन्दगी, ना जिन्दगी हाँ जिन्दगी अधूरी है ।। बेटी की थाली में,ना राखी हो […]
जिसको बोल कर, मन हो जाए प्रसन्न , ऐसी मेरी यह भाषा है । भाव को मेरे बना दे दर्पण , करती है शब्दों का समर्पण , ऐसी मेरी यह भाषा है। जैसा चाहूं वो […]
हमको गैरों से भी मोहब्बत है, अकेला तुमसे होता,तो मर जाते। घर से दूर हैं घर के वास्ते, वरना हम भी सोचते हैं ,काश घर जाते। हम खड़े हैं हमने माज़ी से सबक लिया, वक़्त […]
सूना जाए राखी का त्यौहार, राखी भेजी है, डाक से इस बार ना भैया मिलें, ना भाभी मिलें, ना मिले मां पापा का प्यार। ना भतीजी, भतीजे के मुख पे खुशियां मै देखूं, ना कर […]
रोज मिलने के वादे तोड़ते हो जो तुम बात तेरी ये मुझको गवारा नहीं। बात ही बात पे रूठते हो जो तुम जानते हो तेरे बिन गुजारा नहीं। रोज अपनी गली देखते हो मुझे आशिक […]
टूटते क्यों नहीं सत्ता के पाषाण ह्रदय तटबंध उन आँसुओं के सैलाब से जो बहते है गुमसुम बच्चों की खाली थाली देखकर जब चीख उठते हैं पैरों के बड़े बड़े लहूलुहान चीरे फटे कंधे साहस […]
रंगों से ही समा बांधे जाते हैं, रंगों से ही ये ज़मीं आसमां जाने जाते हैं। जनाब पर अब तो रंग भी धर्म के नाम पर बाँट दिये जाते हैं, और ये रंग गुरूर की […]
पार्थ! तुम भटक रहे हो क्या? उस धर्म के मार्ग से जिस मार्ग का अनुसरण करने का पाठ आप पढ़ाते रहे हैं वनवास के समय अपने प्रवचनों में … वो रण वांकुरे, जिन्होंने तुम्हारा वनवास […]
कौन कहता है कि मेरे सगे भाई नहीं हैं इसलिए राखी पर रोऊँगी। वे लाखों वीर सिपाही मेरे ही तो भाई हैं जो भारत मां की रक्षा को निडर खड़े हैं सीमा पर, उनको मैं […]
मैंने राखी भेजी है राखी पर अपने भैया को भैया इस बार पहन लेना पिछली बार की तरह इसे साइड पर को मत रख देना थोड़ी सी देर पहन लेना।
ओ डाकिये!! मेरी राखी पहुंचा देना राखी तक उन तक जो देश की रक्षा करने को सीमा में डटे हुए हैं।
केवल धागे की रीत न हो असली का रक्षाबंधन हो जब बंधे कलाई पर राखी सच्ची रक्षा संकल्पित हो। पावन धागा जब बहन बांधती है भाई के हाथों में, रक्षा की जिम्मेदारी आ जाती है […]
अजब-गजब से लोग हैं! ना जाने क्यों इंसानियत से इतना जलते लोग हैं कुछ होश में हैं तो कुछ बेहोश हैं। मगर कुछ मगरूर होकर अपनी ही धुन में बेहोश हैं।
तेरी चालबाजी सब जानता हूँ मैं न जाने फिर भी क्यों इतना तुझे मानता हूँ मैं। —————————————- दिल बहुत बार दुखाया तूने पर तुझे देख कर यही एहसास होता है कि सदियों से तुझे जानता […]
दूरियां कितनी भी हों मिटाता चला जाऊंगा तेरे दिल में कितनी भी कड़वाहट हो मैं अपने व्यवहार से तेरे दिल में जगह बनाऊंगा तू कितनी भी कोशिश कर ले तुझे भी हो जाएगा मेरी वफाओं […]
आज पुष्प सुगंध फैला जा कल मंदिर में चढ़ना है अरे तुझे इस बाग़ में अपनी छाप छोड़कर जाना है, ताकि विदाई के मौके पर अन्तस् से निकले आंसू रोक न पाए खोटी कविता धरा […]
प्यार जताने की बात वह करते हैं जो अक्सर दिल जलाया करते हैं। होठों पर रखते हैं गुलाब और हाथों में जहर का प्याला लिए रहते हैं।
सिसकते जज्बात हँसने लगे तुम्हें देखकर न जाने ऐसा क्या था तुममें! जो मेरी बिखरी जिंदगी को तुमने दो पल में ही समेट लिया। और ऐसा समेटा कि मैं कभी फिर बिखर ना सका। टूटा […]
जहां गंगा पवित्र है , वही पवित्र तो नाला भी होता था कभी, अगर गंगा पाप धोती है ! तो नाला पापों को समेटता है अपने में। पर नाले को कौन पूजेगा, पर कभी नाला […]
बैरन हुई है दुनिया जब से तुम से नजर मिली तेरे प्रेम जाल में फंस कर ही यह आत्मा स्वतंत्र हुई।
इतना न दूसरे से परेशान होइए प्यार कीजिये, मनुहार कीजिये रूठे हुए दिलों को मनाने के वास्ते मनुहार कीजिये इजहार कीजिये
दर्द की भी भावुकता देखो, दर्द से मेरे वो पिंघल गया। काश तुम्हें वो मिल जाए, इतनी सी दुआ, वो भी कर गया।
कुछ इधर से खाया कुछ उधर से मोटे पेट हो गए रात भर नकली नोट छापे सुबह सेठ हो गए
हुक्के सी हैं लत्त तुम्हारी, लगी जो ; हम से छुट्टे ना । और रेशम-सा हैं विश्वास हमारा कभी जो तुमसे टूटे ना ।………
बारिश की बूँदों से डरना कैसा। बिन पतछड़ का चमन कैसा।
अपना शीश चढ़ा देते हैं जो भारत के कदमों पर उन्हें वीर कहते हैं हम उन्हें सलाम करते हैं हम. सरहद पर सीना ताने बन्दूक लिए हैं कन्धों पर उन्हें वीर कहते हैं हम उन्हें […]
दोस्तो ! मेहनत मे दिन- रात देखा नही जाता। मंजिल हो करीब तो मैदान छोड़ा नही जाता।।
दूसरे को आगे बढ़ते देख वे ऐसे दुखी हुए रात भर सोये नहीं सुबह सुखी हुए
जाओ न इस तरह से बरसात की ऋतु है, रूठो न इस तरह से बरसात की ऋतु है। छोटी सी जिंदगी है दूरी में मत बिताओ, तन्हा रहो न ऐसे बरसात की ऋतु है। बाहर […]
क्या कहने उस दिन के जब गुरूजी हुआ करते थे। घर में हो या पाठशाला में तन-मन से बच्चे पढ़ते थे।। एक आदर था सबके दिल में ग्रंथ गुरू और ज्ञान प्रति। होकर उत्तीर्ण कक्षा […]
आये है आप तो स्वागत हम करेंगे। मेहमान नवाज़ी का फ़र्ज अदा करेंगे।।
चलो फिर से एक- दूजे से बिछड़कर देखते है, प्रेम मे वियोग की पराकाष्ठा को हम देखते है।
रियासत है मेरी यह याद रखना, तहजीब का चलन बरकार रखना।
उनके शहर में, हम बेकार आ गए, उनका खरीदा था शहर, हम बेकार आ गए।
1: रक्षाबंधन रक्षासूत्र सिर्फ एक धागा नहीं, अटूट स्नेह प्यार विश्वास समर्पण का व्यवहार । रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट स्नेह का त्यौहार ।। भरोसा उस विश्वास का भाई हरहाल में रहेगा बनकर ढाल विश्वास […]
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