घर अँधेरे में अब ना किसी का रहे । चार सू रंग यूँ रौशनी का रहे । जगमगायें यहाँ सब महल झोपड़ी पर्व सबका ये दीपावली का रहे ।   घर ,मुहल्ले ,शहर खिल उठें […]

बिन माँ और पिता का एक बच्चा इसके सिवा सोचेगा भी तो क्या, कोई बेचे तो मैं हँसी खरीद लूँ खरीद लूँ वो गुड्डे गुड़िया जिनकी बंद आँखे भी हँसी देती है और खरीद लूँ […]

टूटता हूं फिर से जुड जाता हूं मैं पानी का आईना हूं घर से लिये हूं रात का सूरज कहने को मिट्टी का दीया हूं गले गले है पानी लेकिन धान की सूरत लहराता हूं […]

मिलती गर इज़ाज़त, थोड़ी सी मोहलत मांग लेता | पिंजरे की दाल छोड़कर, आसमानों की भांग लेता || चल पड़ता जहाँ बढ़ते कदम, मुड़ता बस नज़र की ओर | उतार देता थैला काँधे से , […]

चले जाओगे तुम ये सोच नहीं था हो जाएगें तनहा हम ये सोचा नहीं था हंसते हंसते बितायी थी जिंदगी हमने गम में ढ़ल जाएगी जिंदगी ये सोचा नहीं था तेरी आंखो के नशे मे […]

दीये जलने दो जरा कूछ उजाला हो जाए वैसे तो अंधेरे की आदत है आज कुछ अलग हो जाए जिंदगी गुजरी है सीधी सी आज रोकेट को कुछ टेडा कर के छोड देते है शायद […]

ए – ख़ुदा ….. जरा तू रौनक – ए – बाज़ार देख….   हर इंसान के चेहरे पर ….. मुस्कराहट का कारवाँ सिलसिलेवार देख …..   जरा एक निगाह , फ़लक पर डाल ….. नजारा […]

मय में भी नशा है…. लेकिन उस रुख़ – ए – रोशन की ख़ूबसूरती से कम नहीं…   हूँ जब  आज , मुस्कुराहट के आगोश में …. तो दिल कहे , अब कोई गम नहीं […]

  ग़ैरों की बस्ती में , अपना भी एक घर होता.. अपने आप चल पड़ते कदम य़ु तन्हा ना य़े सफर होता…. वक्त बिताने को आवाज देती दीवारे साथ छुटने का ना कोई  ड़र होता….   गैरों की बस्ती मे अपना भी एक […]

गायब हर मंजर मेरा ढूढ़े परिंदा घर मेरा जंगल में गुम फ़स्ल मेरी नदी में गुम पत्थर मेरा दुआ मेरी गुम सर सर में भंवर में गुम महवर मेरा नाफ़ में गुम सब ख्वाब मेरे […]

तेरी सदा का है सदयों से इन्तेजार मुझे तेरे लहू के समंदर जरा पुकार मुझे मैं अपने घर को बुलंदी पे चढ के क्या देखूं उरूजे फन! मेरी देहलीज पर उतार मुझे उबलते देखी है […]

पुरानी जिंदगी कभी कभी जाग उठती है यादें आ जाती है याद बेवजह खारी लकीरें छोडकर रुखसारों पर न जाने कहां खो जाते है जज्बात मेरे लफ़्ज जो कभी जुबां पर आ ना पाये जो […]

वो जो मुह फेर कर गुजर जाए हश्र का भी नशा उतर जाए अब तो ले ले जिन्दगी यारब क्यों ये तोहमत भी अपने सर जाए आज उठी इस तरह निगाहें करम जैसे शबनम से […]

एक और इंतजार सर्दियों के दिन कितने मासूम से दिखते हैं छोटे बच्चे की तरह ऊनी कपडे में लिपटे हुए तुम्हारे आने के दिन थे वो मैं देर तक पटरियों पर बैठे इंतज़ार सेंका करती […]

गाये जा गीत मिलन के तू अपनी लगन के सजन घर जाना हैं काहे छलके नैनों की गगरी, काहे बरसे जल तुझ बिन सूनी साजन की नगरी, परदेसिया घर चल प्यासे हैं दीप गगन के […]

उठाये जा उन के सितम और जिये जा युंही मुस्कुराये जा, आँसू पिये जा यही है मुहब्बत का दस्तूर, ऐ दिल वो ग़म दें तुझे, तू दुआएं दिये जा कभी वो नज़र जो समायी थी […]

यूं तेरी रह गुज़र से दीवाना-वार गुजरे कांधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुजरे बैठे रहे रस्ते में , दिल का खंडहर सजा कर शायद इसी तरफ से एक दिन बहार गुजरे बहती हुई […]

हमने जफ़ा न सीखी उनको वफ़ा न आई पत्थर से दिल लगाया और दिल पे है चोट खाई अपने ही दिल के हाथों बरबाद हो गए हम किसके करें शिकायत अब किसकी दें दुहाई दुनिया […]

“क्या मैं तुम्हें चूम लूँ?” डल झील. पूरे चाँद की रात. उसने डरते हुए पूछा। “हश्श्, नाव डूब जाएगी”, वो बोली “तो क्या करें?” वो मुस्कुराई और बोली “डूब जाने दो” और वो सहम गया

साथी न कोई मंजिल दीया है न कोई महफ़िल चला मुझे ले के, ऐ दिल, अकेला कहाँ? … हरदम मिले कोई, ऐसे नसीब नहीं बेदर्द  है जमीं, दू-ऊ-ऊ-र आस्माँ चला मुझे ले के, ऐ दिल, […]

गमछे रखकर के अपने कन्धों पर…. गमछे रखकर के अपने कन्धों पर बच्चे निकले हैं अपने धन्धों पर। हर जगह पैसे की खातिर है गिरें क्या तरस खाएं ऐसे अन्धों पर। सारा दिन नेतागिरी खूब […]