A trial witrh Awadhi Language
A trial witrh Awadhi Language
Seasons of Life Sitting in my balcony, I felt the agony Of changing seasons, without any reasons Alike the different and difficult phases of life Creating a situation full of strife Spring brings a […]
Packing the tickets in an envelope, She envisioned her despondency Whenever she saw her Parents sacrificing their private Holiday trip for the coinage, Compensating the extra expenses and College fees for her; every time Her […]
Ever since I met you I believed I have only learnt the
Art of using correct syntax (what we call
Grammar but I am a coder so) and words in
Sentences, but I apprehended now that beyond
क्या होगा. . . . . .❤ कभी सोचा है, कि जब तुझको, मेरी याद आई तो क्या होगा; ना हम होंगे, ना तुम होगे, और ना तन्हाई तो क्या होगा ! कि आकर […]
घर अँधेरे में अब ना किसी का रहे । चार सू रंग यूँ रौशनी का रहे । जगमगायें यहाँ सब महल झोपड़ी पर्व सबका ये दीपावली का रहे । घर ,मुहल्ले ,शहर खिल उठें […]
बिन माँ और पिता का एक बच्चा इसके सिवा सोचेगा भी तो क्या, कोई बेचे तो मैं हँसी खरीद लूँ खरीद लूँ वो गुड्डे गुड़िया जिनकी बंद आँखे भी हँसी देती है और खरीद लूँ […]
टूटता हूं फिर से जुड जाता हूं मैं पानी का आईना हूं घर से लिये हूं रात का सूरज कहने को मिट्टी का दीया हूं गले गले है पानी लेकिन धान की सूरत लहराता हूं […]
मिलती गर इज़ाज़त, थोड़ी सी मोहलत मांग लेता | पिंजरे की दाल छोड़कर, आसमानों की भांग लेता || चल पड़ता जहाँ बढ़ते कदम, मुड़ता बस नज़र की ओर | उतार देता थैला काँधे से , […]
चले जाओगे तुम ये सोच नहीं था हो जाएगें तनहा हम ये सोचा नहीं था हंसते हंसते बितायी थी जिंदगी हमने गम में ढ़ल जाएगी जिंदगी ये सोचा नहीं था तेरी आंखो के नशे मे […]
2122 1212 22 कुछ दिनों से खफा-खफा सा है । चाँद मेरा छुपा-छुपा सा है ।। कुछ तो जिन्दा है जिस्म के अंदर ; और कुछ तो जुदा-जुदा सा है । जब से’ […]
दीये जलने दो जरा कूछ उजाला हो जाए वैसे तो अंधेरे की आदत है आज कुछ अलग हो जाए जिंदगी गुजरी है सीधी सी आज रोकेट को कुछ टेडा कर के छोड देते है शायद […]
ए – ख़ुदा ….. जरा तू रौनक – ए – बाज़ार देख…. हर इंसान के चेहरे पर ….. मुस्कराहट का कारवाँ सिलसिलेवार देख ….. जरा एक निगाह , फ़लक पर डाल ….. नजारा […]
सुख़ , समृद्धि और ख़ुशहाली संग , माँ लक्ष्मी का पूजन हो … अपनों की , अपनों से , अपनेपन की बढ़ती चले मिठास …. और दूर सभी उलझन हो … जब दिखे […]
**** Cracks crawling silently, Down to the heart. spreading slowly, Silent noise of tearing apart. The world is on the edge of disaster. intolerance leads to our fall! **** – Anjali
मय में भी नशा है…. लेकिन उस रुख़ – ए – रोशन की ख़ूबसूरती से कम नहीं… हूँ जब आज , मुस्कुराहट के आगोश में …. तो दिल कहे , अब कोई गम नहीं […]
ग़ैरों की बस्ती में , अपना भी एक घर होता.. अपने आप चल पड़ते कदम य़ु तन्हा ना य़े सफर होता…. वक्त बिताने को आवाज देती दीवारे साथ छुटने का ना कोई ड़र होता…. गैरों की बस्ती मे अपना भी एक […]
गायब हर मंजर मेरा ढूढ़े परिंदा घर मेरा जंगल में गुम फ़स्ल मेरी नदी में गुम पत्थर मेरा दुआ मेरी गुम सर सर में भंवर में गुम महवर मेरा नाफ़ में गुम सब ख्वाब मेरे […]
वह रहे कैदे जमां में जो मकीने आम हो लम्हा लम्हा जीने वालों का मक़ां कोई नहीं
ऐसी उठा पटक न देखी कभी, न ही सुने शब्द तीखे तर्रार कभी| ये तो entertainment का जमाना है भैया जो जि सब होत रहत है, वरना पब्लिक तो सब जानती है||
इक लौ थी जो जलती रहती थी करती थी रोशन अंधेरों को इक आफ़ताब आया कहीं से औ निगल गया उसे छोड गया अंधेरे में दुनिया को
*** उसको हमने कल तडपते हुए देखा था शायद उसकी यादें कल लोट आयी थी ***
तेरी सदा का है सदयों से इन्तेजार मुझे तेरे लहू के समंदर जरा पुकार मुझे मैं अपने घर को बुलंदी पे चढ के क्या देखूं उरूजे फन! मेरी देहलीज पर उतार मुझे उबलते देखी है […]
पुरानी जिंदगी कभी कभी जाग उठती है यादें आ जाती है याद बेवजह खारी लकीरें छोडकर रुखसारों पर न जाने कहां खो जाते है जज्बात मेरे लफ़्ज जो कभी जुबां पर आ ना पाये जो […]
KOI LOUTA DE MERE VO DIN JAB ME HANSTI THI POORE MAN SE KHELTI THI, LADTI – JAGADTI THI KABHI KABHI NARAZ HO JAATI THI KHUD SE HI BANATI THI HAR ROJ NAYE DOST […]
वो जो मुह फेर कर गुजर जाए हश्र का भी नशा उतर जाए अब तो ले ले जिन्दगी यारब क्यों ये तोहमत भी अपने सर जाए आज उठी इस तरह निगाहें करम जैसे शबनम से […]
!!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!! Chehre ko nakaab main chupaaye baithe ho khudh ko khudh se hi chipaaye baithe ho kab tak bachaate rahoge sachhai se khud ko ki apne dil main hummi ko […]
!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!! aaj bhi raaton ko karahne ki aawaz sunaai dete hai iss dil se jo barso pahle tora diya tha tumne aaj bhi jinda rakhe hue hun iss dil ko […]
एक और इंतजार सर्दियों के दिन कितने मासूम से दिखते हैं छोटे बच्चे की तरह ऊनी कपडे में लिपटे हुए तुम्हारे आने के दिन थे वो मैं देर तक पटरियों पर बैठे इंतज़ार सेंका करती […]
दुश्मनों की दोस्ती है अब अहले वतन के साथ है अब खिजाँ चमन मे नये पैराहन के साथ सर पर हवाए जुल्म चले सौ जतन के साथ अपनी कुलाह कज है उसी बांकपन के साथ […]
Ye mana dil jise dhunde Badi mushkil se milta hai Ye mana dil jise dhunde Badi mushkil se milta hai Magar jo thokare khaye Bina manzil se milta hai Chalo baithe ho kya bekar Kisnamat […]
गाये जा गीत मिलन के तू अपनी लगन के सजन घर जाना हैं काहे छलके नैनों की गगरी, काहे बरसे जल तुझ बिन सूनी साजन की नगरी, परदेसिया घर चल प्यासे हैं दीप गगन के […]
उठाये जा उन के सितम और जिये जा युंही मुस्कुराये जा, आँसू पिये जा यही है मुहब्बत का दस्तूर, ऐ दिल वो ग़म दें तुझे, तू दुआएं दिये जा कभी वो नज़र जो समायी थी […]
Behna h pani ki tareh, jaha se chau nikal saku, Dekhe mujhe jo, koi parwana,ek nayi soch ,ek naya ,josh de saku, Chahe kitna bhi ho aage band rasta ,na ruksaku, Jab tak na mile […]
!!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!! Ek baar kya aajmaya apno ko ki sabse door hota chala gaya Bahut be-wafai ki tune mujse e zindagi ki mai maut ke kareeb hota chala gaya @@ SAGAR […]
!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!! Likhi thi usne mere hi zakhm-o-dard par kittaaab apni idhar mera dard aur barta gaya udhar uss ki shohrat bharti gayi @@ SAGAR @@ 29/10/15 :: 2:00 PM … […]
यूं तेरी रह गुज़र से दीवाना-वार गुजरे कांधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुजरे बैठे रहे रस्ते में , दिल का खंडहर सजा कर शायद इसी तरफ से एक दिन बहार गुजरे बहती हुई […]
हमने जफ़ा न सीखी उनको वफ़ा न आई पत्थर से दिल लगाया और दिल पे है चोट खाई अपने ही दिल के हाथों बरबाद हो गए हम किसके करें शिकायत अब किसकी दें दुहाई दुनिया […]
!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!! tang ho gayi galiya tere shehar ki tang ho gaye sab raaste tere dil ke kaise reh paaunga main ab yahan mujhe tau aadat hai khuli fizzaaon main saans […]
चाँद के शौक मे तुम छत पे चले मत जाना शहर में ईद की तारीख बदल जाएगी
“क्या मैं तुम्हें चूम लूँ?” डल झील. पूरे चाँद की रात. उसने डरते हुए पूछा। “हश्श्, नाव डूब जाएगी”, वो बोली “तो क्या करें?” वो मुस्कुराई और बोली “डूब जाने दो” और वो सहम गया
!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!! har rang main uska rang nazar aata hai wo na ho tau har rang be-rang nazar aata hai humne tau keh diya chand se bhi ki mera mahboob […]
!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!! kuch iss tarah khaffaa hue wo humse ki hum duniya se khaffa ho gaye jab wohi na ho sake hamare tau hum zindagi se hi juddaa ho gaye […]
Last leaf fell at last No thunder or wind flow that night Snow or rain, nothing did fall Neither there was any fight But, the last leaf have fallen Hope is just wiped out. […]
साथी न कोई मंजिल दीया है न कोई महफ़िल चला मुझे ले के, ऐ दिल, अकेला कहाँ? … हरदम मिले कोई, ऐसे नसीब नहीं बेदर्द है जमीं, दू-ऊ-ऊ-र आस्माँ चला मुझे ले के, ऐ दिल, […]
‘When I couldn’t see you, my world goes blue a silent sound is all I hear within that dusk, that’s true. I wonder sometime, if I could ever complete you, As somewhere deep within […]
!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!! Dil par haath rakhta hun tau tumhari dharkan sunae deti hai aankho par haath rakhta hun tau tumhari surat dekhae deti hai Kaano par haath rakhta hun tau tumhari […]
!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!! Jab koi dard utthe dil main tau yaad kar lena jab koi aah nikle mann se tau yaad kar lena mehfil main tau sab honge tumhare paas apne jab […]
गमछे रखकर के अपने कन्धों पर…. गमछे रखकर के अपने कन्धों पर बच्चे निकले हैं अपने धन्धों पर। हर जगह पैसे की खातिर है गिरें क्या तरस खाएं ऐसे अन्धों पर। सारा दिन नेतागिरी खूब […]
कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर क्या पता कभी कोई कविता बन जायें कुछ दिनों को भी जोड रखा है शायद कहीं ये भी कभी जिंदगी बन जायें
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