खाली दिमाग शैतान का खाली बैठे रहे बेईमान निकम्मे निठल्ले हरामखोर वे किसी सूरत में नहीं किसान रंगे सियारों जैसे बनकर शरीफों को कर रहे बदनाम सार्वजनिक संपत्ति पे निर्माण हैवानों का है यह काम….. […]
खाली दिमाग शैतान का खाली बैठे रहे बेईमान निकम्मे निठल्ले हरामखोर वे किसी सूरत में नहीं किसान रंगे सियारों जैसे बनकर शरीफों को कर रहे बदनाम सार्वजनिक संपत्ति पे निर्माण हैवानों का है यह काम….. […]
यादें ही बस साथ हैं, जीवन में अवशेष, बाकी सब मिटता रहा, नहीं बचा कुछ शेष, नहीं बचा कुछ शेष, उग रहे सूख रहे सब, नाशवान है जिन्दगी, जाने रुक जाए कब, कहे लेखनी करें, […]
अभी कोरोना खत्म नहीं है, अभी से घर से क्यों निकल रहे हो। अभी तो वैक्सीन लगी नहीं है, बढ़ रहा है यह रोग फ़िर से, यह बात समझ क्यों नहीं रहे हो। मास्क भी […]
*******हास्य रचना****** जब कोई करता है, मेरी कविता की बुराई, आत्मा रोती है मेरी, देती है रो-रो दुहाई। मरहम सा लग जाता है, उस वक्त….. जब आती हैं समीक्षाएं, दिल प्रसन्न हो उठता है। देने […]
कोरोना खत्म नहीं हुआ है, फिर भी बाहर घूमें लोग। मास्क भी नहीं लगा हो तो, लग जाएगा रोग। लग जाएगा रोग सेहत ठीक ना होगी। कहे “गीता” बाहर घूमना बंद करो तुम, नहीं रहोगे […]
🍁 नेताओं की नगरी 🍁 ******************** समसामयिक राजनीति को समर्पित ++++++++++++++++++++++ कितना तुझको मोह है नश्वर गद्दी से सुन पगले ! मैं देखती हूं तुझको पैनी नजरों से पैनी नजरों से देख मार डालूंगी तुझको, […]
कौन है सच्चा कौन है झूठा यह तो है किस्मत का फेर तू अच्छा बनके खेलता है नफरत का खेल, है नफरत का खेल खेलता तू अच्छा बन, बनकर तू अच्छा दिखला ना बच्चा बन […]
रिश्ते बेजान से मित्र अंजान से अपने पराये से हो जाते हैं, जब सितारे गर्दिश में हों।। दुश्मन दोस्त पराए अपने और अपने सर पे बिठाते हैं जब सितारे बुलंदी पर हों।। मुंह देखी प्रीत […]
पापा प्लीज फीस जमा करादो छड़ी की मार सहपाठियों में अपमान अब सहन नहीं होता।। मम्मी आज टिफिन में ठंडी रोटी पे नमक-मिर्च पानी लगा मत देना, निरीक्षण है स्कूल में गर्म पंरांठा रख देना।। […]
वही पालकी देश की जनता वही कहार है लोकतन्त्र के नाम पर बदले सिर्फ सवार हैं राज है सिर्फ अंधेरों का उजालों को वनवास है यहाँ तो गांधी के सपनों का उड़ता नित्य उपहास है […]
सुना दो आज मुझको तुम, नज़्म कोई मोहब्बत की। हो जिसमें बस बात, कुछ तेरी कुछ मेरी। छोड़कर सब दुख दर्द दुनियां के, चलो, वक्त कुछ साथ बिताते हैं। कह दो आप कुछ अपनी, कुछ […]
झूठी सीढ़ी मत बना, मंजिल चढ़ने हेतु, खाली ऐसे बना मत तू कागज के सेतु, तू कागज के सेतु, से स्वयं से मत कर छल, ऐसे कैसे पार, होगा लक्ष्य का पथ कल, कहे लेखनी […]
रंग भरी है जिन्दगी, रंगों में रह मस्त, कष्ट से भी खोज खुशी, कभी न होगा पस्त, कभी न होगा पस्त, समय रंगीन बनेगा, मन में खिलता रंग, तुझे प्रवीण करेगा, कहे सतीश होली में […]
सच्चाई की माला फेरे घूमें नेता गली-गली तेरा भला करने का झांसा देकर अपना भला करते हैं मुँह को अपने उजला करके कालिख मन में रखते हैं कालिख रखकर मन वो कितना पाक-साफ रखते हैं […]
कर्म किए जा ए इन्सान, फल की चिंता मत करना फल तो देगा ही भगवान। महाभारत के दौरान, अर्जुन के हृदय में उत्पन्न हुए थे कुछ भ्रम-भाव, उनका करने समाधान। श्री कृष्ण ने गीता का […]
अपनी राहों को पकड़, चल मंजिल की ओर, पकड़े रख मजबूत हो, सच्चाई की डोर, सच्चाई की डोर, तुझे ऊंचाई देगी, नहीं हारने देगी जीत कदम चूमेगी, कहे लेखनी छोड़, तुझे क्यों चिंता रखनी, सच्चा […]
सत्ता में जाकर जिसे, याद रहे जन दर्द, वही मिटा सकता यहाँ, धूल और सब गर्द, धूल और सब गर्द, पड़ी हो जो विकास में, पहले वो हो साफ, रिआया इसी आस में, कहे लेखनी […]
माँ ममता का सागर है, प्रेम का छलकता गागर है। माँ की महिमा को यूं जानें, कि माँ हमें इस दुनियाँ से, नौ माह पूर्व ही जाने। हमें यह दुनियाँ दिखाने को, प्रभु ने चुन […]
देखो ये बादल बिना फ़िकर उड़ते फिरते इधर-उधर। कभी-कभी करते शैतानी, छम-छम खूब बरसाते पानी। सूख रही थी मेरी बगिया, जल बरसाने आए मेघा। बरखा रानी को संग लाए। बरस गई जब बरखा रानी, चलने […]
तुम क्यों कहते हो मुझे कवयित्री हूँ मैं टूटा-फूटा राग हूँ और जोगन हूँ मैं जैसे मीरा लिखती रही भक्ति के पद रोज वैसे मैं लिखती हूँ सदा विरहाग्नि को कर जोड़ विरहाग्नि को कर […]
चंद्रोदय मुझसे कह रहा:- कविता लिखने की बात, मैं कविता के मामले में हूँ ठनठन गोपाल. हूँ ठनठन गोपाल ना आती कविता मुझको फिर भी सब कहते हैं क्यों कवयित्री मुझको ! कवयित्री यदि होती […]
सच्चाई की जीत है, सच्ची बातें बोल, पाप न रख मन में कभी, मन की आंखें खोल। मन की आंखें खोल, हो सके तो अच्छा कर, अच्छा होगा सदा, सदा सच की चर्चा कर कहे […]
तू निर्मल है तू निर्भय है , क्या बैठ यहाँ तू सोच रहा। विधि में तेरे लिखा क्या है, तू मानव है कुछ सोच रहा।। ये जीवन है जीते हैं सब, कुछ लोग यहाँ रोते […]
नारी स्नेह की मूरत है, लुटाती प्रेम और ममता। पुरुष पौरुष की सूरत है, उसका प्रेम नहीं थमता। देता है अधिक दिखावा करे कम, दे खुशियां मिटा दे गम। नारी ममता की मूरत है, पुरुष […]
बोली लेखनी आज मिटा तू घनघोर अंधेरा विगत माह से तूने मुझसे नाता तोड़ा नाता तोड़ा तूने मुझसे जोड़ जरा-सा मैं (कलम) तेरे भावों और हूँ स्याही की प्यासा लिखकर कविता और नज्म तू मेरी […]
मिट गया हर संताप दूर अब हुआ अँधेरा घिर कर मेघ ने मेरे घर-आंगन को घेरा घर-आंगन को घेर मेघ मारे किलकारी नीर बहाए प्रज्ञा’ हाय ! रोये बेचारी सुनकर आया मोर मोर ने शोर […]
दीप जलाकर रख दिये आप ही अपने द्वार आ गया मुझको आप ही अपने ऊपर प्यार अपने ऊपर प्यार यार आया जब मुझको इन नैत्रों में दिख गये सांवरे साजन मुझको देखकर साजन हुई शर्म […]
किंचित ही तू मूढ़ है कहता मेरा मन ! क्यों फोड़ा सिर तूने निरमोही के आंगन निरमोही के आंगन में फलता प्रेम कहाँ है !! जिसको तू प्रियतम समझे वह मोहब्बत का खुदा कहाँ है […]
कैसे बन्धु ? कैसे रिश्ते ? कैसा यह संसार कैसा जीवनसाथी भाई ? स्वार्थ पड़े तब प्यार स्वार्थ पड़े तब प्यार किया है यहाँ सभी ने बैरी भी घूमे बन मीत दिल की प्रेम गली […]
कर्म कर तू कर्म कर कर्म पथ से ना तू भटक दिशाएं भले विपरीत हों बोये पथ में शूल हों ना तू डर और ना हिचक कर्म कर तू कर्म कर |
मेरी मनसा थी यहाँ बोना प्रेम के बीज पर उग आया है यहाँ काँटा बन कर विष काँटा बन कर विष उगा है यहाँ पर जबसे ना आए हैं साजन हे सखि ! यहाँ तभी […]
ठन जाती है मौत से एक दिन सबकी यार मुश्किल कहना है यहाँ किसको किससे प्यार किसको किससे प्यार नहीं मालूम किसी को घर आया मेहमान ना भाता कभी किसी को जायेगा कब यह निश्चित […]
💞 महाशिवरात्रि स्पेशल 💞 ************************** शिव की महिमा सब जग गाए पार्वती जी को मन से पूजा जाये मोहित करते हैं घनश्याम सबसे पहले गणपति का नाम | विघ्नविनाशक मंगलकर्ता यह भक्तों के कर्ता-धर्ता शिव […]
शिवरात्रि का भोर भोर जीवन में लाया भाँग- धतूरा चढ़ा के मैंने शिव को मनाया शिव-शंभू हे नाथ ! अरज मेरी सुन लीजे मेरे श्याम की राधा केवल मुझको कीजे मुझको कीजे नाथ बड़ा उपकार […]
उगल रहा है आदमी विष के ऐसे बोल विष के ऐसे बोल बोलकर थकता ना तू मैं तेरा ही अंश मुझको पहचाना ना तू कैसे दिन आए अंतस में पीर उठी है द्वारे पर बैठी […]
हर ओर सत्यम शिवम सुंदरम, हर हृदय में हर-हर हैं। गरल कंठ में धारण कर, वो सरल भोले शंकर हैं व्याघ्र खाल तन पर लपेटे, भस्म-भभूत ललाट पर लगाए डम-डम डमरू बाजे जिनका, वो गिरीश […]
अंक गणित समझे बिना, लगा लिए थे अंक, धीरे-धीरे उग गए, उल्टे सीधे पंख। उल्टे-सीधे पंख, मार्ग विचलित करने को। हार्मोन भी स्रवित थे भ्रमित करने को, बोले कलम यदि हो, कोई राजा या रंक, […]
बहुत हो चुकी नफरत की आग जल रहे हैं दिल के जंगल मुहोब्बत कर चुके हैं खाक, अब नहीं रही वैसी धाक जो एक नजर पर चुरा ले जाती थी दिल, अब तो नजरें मिला […]
स्याह काली रात किस तरह हो सितारों से मतलब की बात, कुंडली में अंकित ग्रह नक्षत्र, दिख रहे आकाश में, मगर भाग्य है अवकाश में, फिर भी हूँ आस में, क्योंकि कोई तो है पास […]
महिला दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए | कविता- तेरी महिमा न्यारी हे नारी महिमा तेरी न्यारी तुझसे है जग सारी | प्यार द्या दान धर्म की है मूरति तू प्यारी | एक है तू […]
रात है लेकिन न घबरा, कल सुबह निश्चित उगेगी, कर्म के बीजों को बो ले, मंजिल तुझे निश्चित मिलेगी । भाग्य पर तू छोड़ मत दे, प्रारब्ध पर निर्भर न रह, हारने के भाव मत […]
खूबसूरत शाम चारों ओर चमकते बल्ब लग रहे हैं ऐसे किसी ने काली चुनरी में सितारे जड़ दिए हों जैसे। चमचम चमकता शहर सांझ का पहर देख ले जी भर कर विलंब न कर। ये […]
अपनी अपनी मेहनत का, खाए सब संसार कह गए विद्वान लोग, यही जीवन का सार जैसे हांडी काठ की, चढ़े ना दूजी बार। चढ़े न दूजी बार, एक बार ही चढ़ती है, मेहनत ही है […]
फिज़ाओं में गुलाब से बिखर गए, उनके आने से हम और निखर गए। सखियां भी पूछे हमें घेर कर, किसका हुआ है यह तुम पर असर। इठलाती, शरमाती सी फिरती हूं, लहराती जाए मेरी नीली […]
खुश रहो कहकर, दुआओं की पोटली माता-पिता ने, चुपके से सर पर छोड़ी। पता भी न चलने दिया, हर बार यही किया। और हम नासमझ, ज़िंदगी भर कामयाबी को, अपना मुकद्दर मानते रहे।। _____✍️गीता
आज सोच रहा था कोई कविता लिखू पर कैसे ये सोच ही रहा था की तुम याद आ गयी नयन अदृश्य कामना में लीन हो गए वो संसय वो समपर्ण वो अभिधान(नाम) सब कुछ तो […]
बेटी घर की शान है, बेटी है अभिमान, बेटी का सम्मान कर, कहना मेरा मान, कहना मेरा मान, उसे भी पढ़ा-लिखा तू, अवसर देकर आज, उसे भी खूब बढ़ा तू, कहे लेखनी मान, उसे खुशियों […]
हो गया है उजाला अब मुझे भान हुआ जब खुली आँख तब सुबह का ज्ञान हुआ। इन चहकते हुए उड़गनों ने बताया, जाग जा अब तो तूने अंधेरा है बिताया, हो गई है सुबह साफ […]
अंधेरे का गीत लिखूं या सुबह की आस लिखूं नींद आ-जा रही है, और कुछ खास लिखूं। स्वप्न हैं पास खड़े इंतजार करते हैं, बन्द आँखों में ही, वे राज करते हैं। बात गम की […]
आंखे तेरी सब कह देती है हाले दिल बयां कर जाती है जो कह नही पाते हो जुबान से वही दर्द वो चुपके से बता जाती है संगी बिन जीना कितना मुश्किल दिल का आर्तनाद […]
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