गज़ल – प्यार की महक | तुम्हारे प्यार की महक अभी बाकी है | दूरिया ही सही तेरी याद अभी बाकी है | रहे जहा बनके चाँद तू चमकता रहेगा | तू पास रहे न […]
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गज़ल – प्यार की महक | तुम्हारे प्यार की महक अभी बाकी है | दूरिया ही सही तेरी याद अभी बाकी है | रहे जहा बनके चाँद तू चमकता रहेगा | तू पास रहे न […]
बेरोजगार की हालत कब सुधरेगी, कैसे सुधरेगी, कब बनेंगी नई नीतियाँ। कब खुलेंगी खूब भर्तियां। कोचिंग कर चुके नौजवान को कब मिलेगा परीक्षा देने का मौका कब चलेगा उनका चूल्हा चौका। परीक्षा कोई पास कर […]
प्रकृति से दूर हो रहा मानव दु:खों से चूर हो रहा मानव, वन प्रकृति की आभा बढ़ाते , शुद्ध पवन दे उम्र बढ़ाते वृक्ष बचाओ वृक्ष लगाओ वरना एक दिन पछताओगे, ना खाने को भोजन […]
टन- टन टन- टन करते वो फेरीवाला आता था। गदा के जैसे डब्बा अपने काँधे पर ले आता था।। सिर पे टोपी गले में गमछा नाक पे ऐनक बड भाता था। बम्बई मिठाय,,लड़का सब खाय […]
दिनकर आए हैं कई दिनों के बाद, विटामिन डी ले लो। बांट रहे हैं मुफ्त में सौगात, विटामिन डी ले लो। बातें करो धूप संग कुछ देर बैठ कर, किरणों को बैठाओ देकर आसन दिनकर […]
अंधेरी रात में यूँ छोड़कर रूठ कर चल दिये थे तुम अचानक सोचते रह गए हम कि आगे क्या होगा, मगर देखा सुबह तो रोज की ही भांति सूरज उग आया। उड़गनों ने सदा की […]
हार गए इसलिए उदास हो ना खूब निराश हो ना दिल टूट गया है ना उत्साह रूठ गया है ना सब तरफ से हताश हो ना, हाथों में माथा टेककर सोच रहे हो ना क्या […]
रास्ता हूँ मैं युगों युगों से लोग चलते आये हैं मुझ पर न जाने कितने पदचापों की ध्वनि को मैंने सुना है। न जाने कितनों ने चल कर मुझ पर सपनों को बुना है, लोग […]
खिलौना मत समझना किसी धनहीन को तुम मन चले तोड़ दिया मन चले जोड़ लिया। भूख पर वार करके दबाना मत उसे तुम, दिखाकर लोभ-लिप्सा दबाना मत उसे तुम। सरल, कोमल व भोला मुफलिसी का […]
मुक्तक-खाएंगे —————— अब बनाने वाले ही खाएंगे , कोई खाने वाला रहा नही, लगता है, सब दावत मे गए, या घर सब, रुठ के छोड़ गए पर गए कहां यह पता नही, पता होता तो […]
जो मन में है तुम उसे कहो ना न बोलो चुपड़ी सी बात ऐसे दिखावा करके दिलों का नाता बताओ कैसे निभा सकोगे। भरा है नफरत का भाव भीतर अधर हैं बाहर खिले हुए से […]
यह दर्द मेरा लिखा है जिसपर नाम तेरा ढूँढे जो कोई हमदर्द बेदर्द में शामिल नाम तेरा। सही अगर तुम हो नाम, गलत होगा किसका धर्म के पथ पर चलने वाले कर्महीन सही होगा नाम […]
बेकारी पर आप कुछ, नया करो सरकार, युवाजनों को आज है, राहत की दरकार। राहत की दरकार, उन्हें, वे चिंता में हैं, पायेंगे या नहीं नौकरी शंका में हैं। कहे ‘लेखनी’ दूर, करो उनकी आशंका, […]
खुशियां सदा अमावस की रात की आतिशबाजी की तरह आईं मेरे जीवन में… जो बस खत्म हो जाती है क्षण भर की जगमगाहट और उल्लास देकर… और बाद में बचता है तो एक लंबा सन्नाटा […]
15 जनवरी को हम थल सेना दिवस मनाएं, 73वें थल सेना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं तिरंगे की शान हैं सैनिक, भारत का मान हैं सैनिक, पूरी रात जो जागे सीमा पर, उसी का नाम है […]
हमर देशक सिपाही हमर शान छै। देशक रक्षा में जिनकर प्राण छै।। नञ भोजन केॅ कोनो फिकीर छै। नञ छाजन केॅ कोनो फिकीर छै।। जाड़ गरमी तऽ एकहि समान छै। हमर देशक सिपाही हमर शान […]
फेंक रहे थे जब तुम खाना, मैं भोजन की आस में थी। रोटी संग सब्जी जी भी है क्या, मैं वहीं पास में थी। तुमने शायद देखा ना होगा, मैं काले मैले लिबास में थी। […]
मकरसंक्रांति अलग अंदाज लिए, हर प्रान्त में, अपनी छटा बिखेर रहा । सूर्य चले उत्तरायन हो छटा नव आशा की किरण बिखेर रहा । सकारात्मकता का संदेश लिए अपनी संस्कृति, अपनी परिवेश की झलक बिखर […]
धीमी-धीमी धूप संग में, मीठी-मीठी खुशियां लाई। तिल, गज्जक की खुशबू लेकर, सर्दी में संक्रान्ति आई। मकर संक्रान्ति मनाना है, गंगा जी में नहाना है गंगा जी ना जा पाओ तो, घर में जरूर नहाना […]
चलो पतंग उड़ाएं लूट लें, काट लें पतंग उनकी सभी रंगीनियां अपनी बनायें चलो पतंग उड़ाएं चलो पतंग उड़ाएं। उनके चेहरे की खुशियों को चुराकर चलो आनंद मनायें चलो पतंग उड़ाएं। कटी पतंग दूसरे की […]
कविता -मकर संक्रांति चलो मनाए | मकर संक्रांति आई पतंग चलो उड़ाए | उड़े ऊंचाई जैसे सोच पेंच चलो लड़ाये | डोर पतंग की थाम खूब तुम रखना | कट न जाये उम्मीदे डोर चलो […]
आपको नींद आ गई आधी और हम गीत लिख रहे हैं अब क्या करें यह कलम भी चंचल है जागती तब है, सो गए जब सब। स्वप्न में भी मनुष्य की पीड़ा भाव को शिल्प […]
राग कहाँ रागिनी कहाँ मेरी इस सड़क पर लिखी कहानी है, दो घड़ी आप भी खड़े होकर देख लो क्या है मेरी कहानी है। लोहड़ी क्या, कई त्यौहार आये आपने खीर पुए खूब खाये मगर […]
खुशियाँ अपार है प्यार का त्योहार है। वेहरे बीच आग जली लोहड़ी की बहार है।। गैया का गोबर पाथ-पाथ पाथी लिया बनाय। सुक्खा लक्कड़ काट-काट लोहड़ी लिया सजाय ।। घच्चक मूंगफली रेवड़ी संग खिल्लां का […]
बेरोज़गारी बढ़ती ही जा रही है, सुरसा के मुख सम खुलती ही जा रही है। चयन हुआ पर नियुक्ति नहीं है, युवाओं की प्रतीक्षा बढ़ती ही जा रही है। दो-दो वर्ष से प्रतीक्षा कर रहे […]
वो पुरानी गिटार पुरानी बाइक वो गली वो नुक्कर वो चौबारे वो बेहतर ज़िन्दगी बनाने के सपने कोई छीन नहीं सकता वोह जज़्बा आगे आने का वो खुली आँखों के सपने वो रात के तारे […]
जीवन का दर्द लिखो कहती है कलम आज बोलो कहती है उपेक्षित-शोषित-उत्पीड़ित की आवाज बनो कहती है। प्यार-मुहब्बत पर लिखता हूँ रोमांचित होने लगता हूँ, जैसे ही रमने लगता हूँ कलम मुझे कहने लगती है, […]
पूँजी तेरे खेल निराले जिसकी जेब में भर जाती है उसका संसार बदल जाती है, धीरे-धीरे आकर तू मानव व्यवहार बदल जाती है। दम्भ, दर्प, मद, गर्व आदि संगी साथी ले आती है। तेरे आने […]
एक निर्जीव -सी मोटर गाड़ी । शानो शौकत की बनी सवारी।। ये भी मांगे तेल और पानी। घिस गए पुर्जे हुई पुरानी।। अपने जैसा वंदा अखीर। खीचे रिक्शा लगा शरीर ।। एक अकेला खींच रहा […]
अब मैं बड़ा हो गया हूं, पापा हो गए हैं बूढ़े निज परिवार में रमता जा रहा हूं, पापा को विस्मृत करता जा रहा हूं कुछ कम ही सुनता है उनको आजकल, कुछ कम ही […]
कविता-विश्व पटल पर हिंदी चमके —————————————— विश्व पटल पर हिंदी चमके ऐसा राग सुनाता हूं, दुनिया भर के लोग सुनो क्यों हिंदी में कविता लिखता हूं, जब दुनिया में कोई भगवान नहीं हरि ने दुख […]
तुम्हारी नादानी थी बोलो उसकी क्या गलती थी वो पेट में खेला करती थी, बाहर आकर दुनिया देखूंगी मन में सोचा करती थी। वो कलिका अपने जीने के सपने देखा करती थी, तुम से मम्मा […]
हिन्दी केवल भाषा ही नहीं, मेरे वतन की पहचान है हिन्दी का है हृदय में स्थान, हिन्दी ही मेरा सम्मान है हिन्दी की गूंज हो देश विदेश, ऐसा मेरा अरमान है हिन्दी मेरे भावों की […]
अपने वतन की मिट्टी को, क्या कभी तू भुला पाएगा जिस आंगन में खेला-कूदा, क्या वो याद ना आएगा जिस विद्यालय कॉलेज से ली शिक्षा तुमने युवक क्या उसके प्रति भी, नतमस्तक ना हो पाएगा […]
आ बैठ जा मैं गीत लिख दूँ आज तुझ पर है उपेक्षित तू सदा से ठण्ड की रातों में सोता है खुली ठंडी सड़क पर। ठेके का रिक्शा खींच दिन भर जो कमाता है उसे […]
मन !!जरा सी बात पर तू मत दुखित हो इस तरह जिन्दगी है हार भी है जीत भी, संघर्ष भी। गर कभी है अवनयन तो है यहां उत्कर्ष भी। डूबने का भय कभी है तो […]
यह संसार है यहां के कुछ नियम होते हैं यहाँ दिखावे की बजाय लोग दिल से अपने बनाने होते हैं। यहां इज्जत पाने से पहले दूसरे को सम्मान देना पड़ता है। शिखर में चढ़ने के […]
ऐ ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया ज़िन्दगी तूने जो दिया, उसके लिए तेरा शुक्रिया कल कहने का वक्त मिले ना मिले, जो भी तूने मेरे लिए किया उसके लिए तेरा शुक्रिया बचपन में ऐ ज़िन्दगी तूने ख़ूब […]
राशन भाषण का आश्वासन देकर कर बेगार खा गई। रोजी रोटी लक्कड़ झक्कड़ खप्पड़ सब सरकार खा गई। देश हमारा है खतरे में, कह जंजीर लगाती है। बचे हुए थे अब तक […]
हमारी मुफलिसी को क्या समझो तुम तुम्हारे महल, हमारी झोपड़ी है, हमारी राह में संघर्ष खड़ा तुम्हारी भाग वाली खोपड़ी है। हमें नसीब बड़ी मुश्किल से रोटियां पेट भर को खाने को, तुम्हारे पास फेंकने […]
आ मेरे मीत!! कर बहाने मत दे मुझे अश्रु से नहाने मत, बह रहे भाव खूब आंखों से अब इन्हें रोक ले, दे आने मत। जब से फेरी है तूने पीठ मुझे तब से मन […]
मुक्तक-कवि का धर्म ————————- कवि का कोई धर्म नहीं हो सकता है, मंदिर मस्जिद चर्चो में भगवान नहीं हो सकता है, दुख को दुख कहता है जो सुख को सुख कहता है जो खुद के […]
पूस की ठंड में, वह सिकुड़ता सिमटता सा जा रहा था कोहरा भी उसकी ओर आ रहा था सूर्य भी धरा से विदा लेकर, अपने भवन जा रहा था दिन ढलने लगा था, तिमिर छलने […]
कमा लो धन भले कितना मगर नजरें धरा पर हों, किसी को तुच्छ मत समझो, नजर से सब बराबर हों। पढाई उच्च हासिल कर मिला प्रमाण कागज में वही व्यवहार में दिख जाये तब है […]
पूस की रात ————- कड़कड़ाती सर्दी,सिसकती सी रात ठिठुरन, सिहरन आरंपार। पूस की रात जो हुई बरसात कांप उठी सारी कायनात। ना जाने कब होगी ये प्रातः। ठंड और कोहरे ने गला दिए हाड़ मांस। […]
लम्हें —– कुछ गहरे घाव से दुखते होंगे, कुछ गहरे तंज जो आज भी चुभते होंगे। कुछ वक्त के मरहम से भर चुके होंगे, कुछ सुगंधित फूल से महकते होंगे। कुछ लम्हें तोहमतें, कुछ तोहफों […]
सफलता ———– बुझ रहे हो दीयें सारे, ओट कर.. जलाए रखना। जल विहीन भूमि से भी, तुम…. निकाल लोगे जल.. विश्वास को बनाए रखना। अंधकार व्याप्त हो.. सूर्य की तलाश हो, मार्ग जुगनूओं की रोशनी […]
मृगमरिचिका मृगतृष्णा यह जीवन सारा तृष्णा में डूबा जाता है, तृष्णाग्रस्त हो खोया रहता है, हाथ नहीं कुछ आता है। मरुभूमि में उज्जवल जल सा… बार-बार बहकाता है। कस्तूरी की तरह दिशाविहीन हो भटका- भटका […]
महफिल ———- महफिल में हंसते चेहरे भी. … अक्सर बेचैन से रहते हैं, वह हंसते-हंसते जीते हैं आंसुओं को भीतर पीते हैं। महफिल में रौनक छा जाती … जब प्रेम के नग्मे बजते हैं, कुछ […]
बाबुल —————- याद आए बाबुल जब-जब तेरी, आंख भर आए तब तब मेरी। मैं चिड़िया थी अंगना तेरे, चहका करती सांझ सवेरे। गोद में हंसती रोती गाती, थपकी तेरी मुझे सुलाती। थी बाबुल तेरी […]
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