शिशु वस्त्रालय के पुतले से, एक बालक कर रहा था बातें , कितने सुंदर वस्त्र तुम्हारे एक भी ऐसे नहीं पास हमारे। परसों मेरा जन्म-दिन है, नए वस्त्र पहनने का मन है, मां को मालकिन […]

क्यूँ मांगे हम हाथ तुम्हारा जब हमें तुम्हारी जरूरत नहीं, हम तुम्हारे काबिल नहीं, तुम हमारे मुनासिब नहीं ।। ——————————— क्यूँ मांगे हम हाथ तुम्हारा जब हमें तुम्हारी जरूरत नहीं ।।1।। —————————————– सुना है रिश्ता […]

मैं सबके सामने खड़ा हूँ, तुम मुझे जानने की कोशिश तो कर मैं बतला दूँगा, मैं कौन हूँ तुम मन से विकार हटा के तो देख ।।1।। ————————————— चलती राहों पे चलके पा सकते हो […]

जय श्री राम ।। —————————– बुरा नहीं है कोई जहां में हर लोग हरि-खिलौना है, सबका अपना-अपना पाठ है, सबको वही निभाना है ।। ———————————– बुरा नहीं है कोई जहां में हर लोग हरि-खिलौना है […]

जब भी प्रेम करने वालों को कोसा गया मैंने बंद कर लिए अपने कान… जब भी प्रेमियों पर अत्याचार किये गए मैंने मूँद लीं अपनी आँखें…!! जब भी किसी प्रेमी युगल ने देखा मेरी तरफ […]

जी करता है कागज में तस्वीर तेरी ऊतार दूं , दिल के किसी कोने का राज उसमें उकेर दूं | ख़्वाब में था जो, हकीकत में उसे देख रहा हूं , खुद पे नहीं अंकुश, […]

JAY SHRI RAM वृक्ष कबहुँ नाही फल भखे, नदी ना संचे नीर परमारथ के कारण साधुन धरा शरीर ।। ———————————————– रमता योगी बहता पानी कभी न रूकता सुनो रे भाई! जिसको जिससे मिलना है मिलकर […]

उमंग ऐसी जगाओ स्वयं के जीवन में, फटक न पाए निराशा कभी भी जीवन में। रखी नहीं रहती सजा के थाल में खुशियां, वरन स्वयं की मेहनत से, जीतनी आज हैं तुम्हें खुशियां। उमंग रोशनी […]

समय कीमती धन है सबसे, सृष्टि का निर्माण हुआ है तब से। समय खर्च करने से आपको, कुछ धन मिल सकता है। किंतु धन खर्च करने से, बीता समय नहीं मिलता है। सोच समझ कर […]

जिंदगी में अभाव रहते हैं मगर तुझे अभाव में सँभलना है, पैर रख कर कंटीली राहों में लक्ष्य तक स्वयं पहुंचना है। बाहरी छोड़ कर सारा दिखावा आत्मा के स्वरों को सुनना है। छोड़ कर […]

खूबसूरत हो मगर कैसे कहूँ कैसे हो, किसकी उपमा दूँ और बोलूं कि ऐसे हो। पुराने कवियों ने कहा कि फूल हो तुम अब बताओ नया क्या कहूँ कि क्या हो तुम। परन्तु कुछ तो […]

कविता-पर्यावरण है क्या ——————————- सभी सुनो, पर्यावरण है क्या, क्या इसकी परिभाषा है, प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से, जीव जंतु मानव – जिससे प्रभावित हो, उसी को कहते पर्यावरण है| अंबर भू धूप हवा पानी वर्षा […]

मजबूरियां तुम दूसरे की क्यों समझते हो नहीं, भाव दिखते वेदना के क्यों समझते हो नहीं। गोद में बच्चा पकड़कर ठुस भरी बस में कोई माँ खड़ी हो तो उसे क्यों सीट देते हो नहीं। […]

कविता-आपसे दूर हूं ————————- पापा मैं आपसे दूर हूं आपके आशीष से भरपूर हूं, कमबख्त काम ने घेरा है मुझे ऐसा बंधक है बनाया न गांव आ सकता ना शहर छोड़ सकता, गांव में जब […]

ईमेल, चैटिंग ही अपना भविष्य क्या हस्तलेखन अब है स्मृति शेष ? नववर्ष का कार्ड नहीं प्रेमपत्र लेखन स्वीकार नहीं कलम कागज का जमाना बना अतीत विशेष क्या हस्तलेखन अब है स्मृति शेष ? क्या […]

ऊंचे उड़ना चाहता, है मेरा मन आज, लेकिन पंख उगे नहीं, माने खुद को बाज। माने खुद को बाज, हवा में उड़ता है बस, भूल असलियत स्वयं, भूमि पर गिरता है बस। कहे लेखनी उड़ो, […]

दर्द आम जन का समझो तो तब मनुज हो आवाज बन सको तो सचमुच में तब मनुज हो। भूखा गली में सोया पूछा नहीं किसी ने बच्चा भी उसका रोया पूछा नहीं किसी ने। वो […]

कविता-बावरी ——————– सुन बावरी क्यों लड़ती है मुझसे, एक दिन रूठ जाऊंगा, तूझे क्या पूरा शहर छोड़ जाऊंगा, संग में कॉलेज आना जाना, पार्को में समय बिताना, होटल में खाना खाना, फोन पर चैटिंग करना […]

इन मैले वस्त्रों में घूमूं, अच्छा नहीं लगता है। मैं भी कुछ बनूं,उडूं गगन को चूमूं, मेरा मन भी करता है। माँ संग जाना बर्तन धोना, अच्छा नहीं लगता है। मैं भी कुछ पढूं-लिखूं, मेरा […]

एक विरोधाभास रहा है हमेशा से हमारी कल्पनाओं और वास्तविकता के बीच..!! जहाँ कल्पनाएं सुख की मीठी नदी है, वहीं वास्तविकता दुःख का खारा सागर..!! मगर हम हमेशा वास्तविकता की अवहेलना कर चुनते हैं कल्पनाओं […]

गांव में आई हूं मैं । बहुत दिनों के बाद। खेतों में सरसों पीली देखी, गगन की रंगत नीली देखी। खूब चमकते तारे देखे, बहुत दिनों के बाद। गेहूं की सुनहरी बाली देखी, तरुवर की […]

कविता-जहर पिला दो —————————– जहर पिला दो जहर खिला दो मम्मी पापा उपकार करो जन्म नहीं देना मम्मी दर्द मेरा एहसास करो मुझ नन्हीं बच्ची पर हवसी रहम नहीं करता है, मन की प्यास बुझा […]

गणतंत्र पर ऐसा होना हम सबकी ही नाकामी है सबका पत्थर हो जाना हम सबकी ही नादानी है। न इधर झुके न उधर झुके सूखी लकड़ी से अड़े रहे, अलग रंग के झण्डे क्यों ऐसे […]

अपनी तमाम विषमताओं के साथ अनगिनत विविधताओं के बावजूद सबसे माकूल व्यवस्था है ‌अपना गणतंत्र। इस बदलते समय की बस यह मांग है लोक के प्रति तंत्र की सहिष्णुता और तंत्र के प्रति लोक की […]

सुन्दर-सुन्दर झांकियों में समाया भारत, आज राजधानी के राजपथ पर आया भारत। केरल कर्नाटक आंध्र प्रदेश अरुणाचल, सब की झांकी आई है। केरल ने नारियल के सुनहरे फाइबर से, सारी झांकी सजाई है। कर्नाटक ने […]

जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद जय भारत, जय भारत, जय भारत, जय भारत, जय हिंद, जय हिंद। हम सबको मिलकर इसकी उन्नति में जुट जाना है, सब तरफ रहे खुशहाली, हरियाली को पाना है। […]

भारतीय होने पर गर्व है, आज 26 जनवरी का पर्व है। देश के दुश्मनों को मिलकर हराएं, आओ हर घर में तिरंगा फ़हराएं। ना केवल जश्न मनाना है, ना केवल झंडा फ़हराना है, जो कुर्बान […]

हार मिलती है मगर, हार जाना नहीं, सैकड़ों हार से भी, हार जाना नहीं। तोड़ दे यदि परिस्थिति, टूट जाना नहीं, प्यार कर जिन्दगी से, रूठ जाना नहीं। निराशा घेर लेगी, जब कभी भाव तेरे, […]

पहले खुद पर रखो पूर्ण विश्वास तुम, तब जमाने से मांगो खुला साथ तुम। हीन भावों को खुद से करो दूर तुम, शक की बातें स्वयं से रखो दूर तुम। हो गलत यदि कहीं पर […]

यह तिरंगा तो ,हमारी आन बान है यह दुनिया में रखता ,अजब शान है यह राष्ट्र का ईमान है ,गर्व और सम्मान है स्वतन्त्रता और अस्मिता की ,यह एक पहचान है क्रान्तिकारियों की गर्जन हुंकार […]

इस सर्दी के मौसम में, दिन कितनी जल्दी ढलता है। जिसके घर में प्रतीक्षारत हो कोई, उसका पग घर की ओर, जल्दी-जल्दी चलता है। इस सर्दी के मौसम में, दिन कितनी जल्दी ढलता है। जो […]

घर आँगन में फूलों सी खिलती हुई लड़कियाँ! फ़ीकी दुनिया में मिसरी सी घुलतीं हुई लड़कियां!! उदासियों की भीड़ में हँसती हुई मिलती हैं! ज़िम्मेदारी के बोझ तले पिसती हुई लड़कियाँ!! ढल जाती हैं पानी […]

# द्रौपदी की प्रतिज्ञा द्रौपदी का परिचय- आ खींच दुशासन चीर मेरा, हर ले मेरा सौंदर्य सजल । आ केश पकड़ कर खींच मुझे, अपना परिचय दे ऐ निर्बल । मैं राजवंशिनी कुल कीर्ति हूँ, […]

बेटियों का कल बेहतर बनाने को, आओ उनका आज संवारें। बेटी पर अभिमान करो, जन्म लेने पर उसका सम्मान करो। बेटी को शिक्षा का अधिकार दो, बेटी को भी बेटों जैसा ही प्यार दो। उसकी […]

अनुभव  के अतिरिक्त कोई आधार नहीं , परमेश्वर   का   पथ   कोई  व्यापार  नहीं। प्रभु में हीं जीवन कोई संज्ञान  क्या लेगा? सागर में हीं मीन भला  प्रमाण क्या  देगा? खग   जाने   कैसे  कोई आकाश  भला? दीपक   जाने  क्या  है  ये  […]

अपनी आदत बदल कर, पाओ खूब सुकून। रोज सीखना है नया, ऐसा रखो जुनून। सोते समय नहीं कभी, हो उलझन में ध्यान, कभी कभी तलवार को दे दो उसकी म्यान। गुस्सा छोड़ो आप भी नींद […]

पैदाइशी समझदार तो हम भी न थे, मगर परिस्थिति ने समझने लायक बना दिया पैदाइशी जिम्मेदार तो हम भी न थे, मगर छोटी सी उम्र में आई जिम्मेदारी ने जिम्मेदारी उठाने लायक बना दिया। हमारी […]

कविता -मुझे वरदान दो —————————- वरदान दो वरदान दो मुझे वरदान दो, उठी है जो लहर मुझ में हो विकट रूप जैसा गति तेज सुनामी जैसा साकार हो आकार हो प्रकार हो ,मेरे ना विपरीत […]

ये सृष्टि हर क्षण अग्रसर है विनाश की ओर… स्वार्थ, वासना और वैमनस्य की बदली निगल रही हैं विवेक के सूर्य को..!! सुनो! जब दिन प्रतिदिन घटित होतीं वीभत्स त्रासदियाँ मिटा देंगी मानवता को जब […]

जख़्म तुझको मैं दिखा देता हूँ, दर्द अपना मैं भुला लेता हूँ। पास आकर जो बैठ जाते हैं, उनको अपना मैं बना लेता हूँ। कहते हैं मुझसे मन की अपनी, मैं भी मन उनसे लगा […]

हौसला निशीथ में व्योम का विस्तार है हौसला विहान में बाल रवि का भास है नाउम्मीदी में है हौसला खिलती हुई एक कली हौसला ही है कुसमय में सुसमय की इकफली हौसला ही है श्रृंगार […]

पास बैठे हो बहुत ही खूबसूरत है नजारा कैद करना चाहता है इन पलों को मन हमारा । जिन्दगी की खुशी सबसे बड़ी तो आप हो आज आई है खुशी जब आप बैठे पास हो। […]

सच्चा सच में रह गया, ठगा ठगा सा आज, आशा चोरी कर गये, अपने धोखेबाज। जिनके मन में जम रहा, काले धन पर नाज, वे भी आज सफेद से, खूब दिखे नाराज। भूखा चूहा रेंगता, […]

पुराने मित्र मेरे! जिंदगी की, हर ख़ुशी तुझको मिले, तेरी खुशियों से निकल कुछ तार मुझ तक भी जुड़े हैं, ठण्ड से सिकुड़े हुए से, बेरहम यादें संजोये, गाँठ बांधी हो किसी ने संवेदनाओं के […]

सच्चा सच में रह गया, ठगा ठगा सा आज। आशा चोरी कर गए, अपने धोखेबाज।। जिनके हृदय में रहा, काले धन पर नाज। वे क्यों ऐसे श्वेत से, आज हुए नाराज।। भूखा चूहा रेंगता, देख […]

सोच समझ के बोल रे बंदिया सोच समझ के बोल जो तु बोले, तेरा पीछा ना छोड़े मांगे हर अल्फाज़ अपना हिसाब मान-अपमान दिलवाते, दिखलाये संस्कार यही बनाए तेरे वैरी यही बनाए यार सोच समझ […]

खुद को कमतर आंक मत, खुद पर रख विश्वास, दूर रह उन चीजों से, जो देती हों त्रास, जो देती हों त्रास, मार्ग तेरा रोकें जो, उनसे मत कर नेह, तुझे कमतर मानें जो। कहे […]

**हास्य रचना** हिन्दी की परीक्षा थी उस दिन, चिंता से हृदय धड़कता था बूंदा-बांदी भी हो रही थी, रह-रहकर बादल गरजता था। भीगता-भागता विद्यालय पहुंचा, पर्चा हाथों में पकड़ लिया, फ़िर पर्चा पढ़ने बैठ गया, […]

तीन छात्र थे केवल कक्षा में। आ बैठ गए तीनों परीक्षा में।। प्रथम श्रेणी में पास किया एक दूजा द्वितीय दर्जे को पाया। तीजा तेतीस फीसदी लाकर तीजे दर्जे तीजे स्थान पे आया।। अफसोस कि […]