नौकरी

गुलामी का अर्थ
तो तब समझ आया,
जब नौकरी की कुछ दिन
एक प्राइवेट कंपनी में |
कहते है उसे ‘नौकरी’ क्यों,
यह तो जानता था |
किन्तु वह अस्तित्व में है ‘चाकरी’,
यह तो अब समझ आया |
समझ आया कि
तलवे चाटने से है बहेतर
बेकारी अपनी!
चाहे जेब खाली रह जाए,
कम से कम
सिद्धांत दृढ रहते है |

~Bhargav Patel (अनवरत)


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7 Comments

  1. Sridhar - January 24, 2017, 3:11 pm

    behatreen

  2. देव कुमार - January 24, 2017, 3:34 pm

    Asm

  3. Mithilesh Rai - January 24, 2017, 9:56 pm

    बहुत खूब

  4. Abhishek kumar - November 25, 2019, 6:11 pm

    सुन्दर रचना

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