मुक्तक

“मुक्तक”

मुझे क्या हो गया है घर में घर अच्छा नही लगता
कोई बेचारगी में दर बदर अच्छा नही लगता !
मुझे सब सोहरते हासिल मगर किस काम की है ये
कि सूरज के बिना मुझको शहर अच्छा नही लगता !!

सभी अमृत्त के है प्यासे जहर किसको सुहाता है
हो हर दम खुशनुमा मौसम कहर अच्छा नही लगता !
जो मर्यादा न समझे दोस्त भी दुश्मन से क्या कम है
मुझे दुश्मन के धड पर उसका सर अच्छा नही लगता !!
उपाध्याय…


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

मुक्तक

मुक्तक

मुक्तक

मुक्तक

1 Comment

  1. Chandra Prakash - July 28, 2016, 12:42 pm

    बेहतरीन जी

Leave a Reply