अजब-गजब से लोग

अजब-गजब से लोग हैं!
ना जाने क्यों इंसानियत से
इतना जलते लोग हैं
कुछ होश में हैं तो कुछ बेहोश हैं।
मगर कुछ मगरूर होकर
अपनी ही धुन में बेहोश हैं।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

10 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 31, 2020, 7:17 am

    वाह

  2. Master sahab - July 31, 2020, 9:18 am

    कवि के माध्यम से सुंदर भाव प्रकट किए गए हैं अभिषेक जी आपके अंदर आलोचना करने की असीम प्रतिभा है मैं देख पा रहा हूं आप कविताओं का सही मूल्यांकन कर रहे हैं बिना किसी भेदभाव के आप अपनी इस प्रतिभा को निखार तेरे कुछ लोग इस बात का बुरा भी मानेंगे और शायद इसका सामना आपको करना पड़ेगा परंतु आप अपनी इस प्रतिभा को निखार ते हुए आगे बढ़िये।
    आपके अंदर रामचंद्र शुक्ल की तरह आलोचना समालोचना सही मूल्यांकन के उत्तम गुण विद्यमान है आप सर्वश्रेष्ठ कवि ही नहीं आलोचक भी हैं मुझे हार्दिक खुशी है कि आप अपना काम बेहतर ढंग से कर रहे हैं

    • मोहन सिंह मानुष - July 31, 2020, 3:25 pm

      मास्टर जी ! सत्य वचन।
      सही कहा है आपने अभिषेक जी को बधाई!🙏👌

      • Abhishek kumar - July 31, 2020, 8:31 pm

        मैं नाचीज हूं अभी तो सीख रहा हूं मैं कोई कवि नहीं हूं

  3. Geeta kumari - July 31, 2020, 10:24 am

    Nice lines 👌

  4. Suman Kumari - July 31, 2020, 3:16 pm

    मैं भी मास्टरजी से सहमत हूँ ।

    • Abhishek kumar - July 31, 2020, 8:17 pm

      अरे ये तो आप सभी का बड़प्पन है मैं कुछ भी नहीं हूँ

  5. प्रतिमा चौधरी - September 26, 2020, 1:37 pm

    वाह वाह

Leave a Reply