आंखें आईना

बैठे-बैठे मुस्कुरा रहे हो
हमसे तुम कुछ छुपा रहे हैं
आंखें हैं आईना धड़कनों का
उनमें हाल-ए-दिल पढ़ा रहे हो।
निमिषा सिंघल

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13 Comments

  1. ashmita - October 4, 2019, 10:13 pm

    Nice one

  2. Poonam singh - October 4, 2019, 10:46 pm

    Nice

  3. Prafull Pandya - October 4, 2019, 11:31 pm

    Wah

  4. देवेश साखरे 'देव' - October 5, 2019, 9:43 am

    bahut sundar

  5. NIMISHA SINGHAL - October 6, 2019, 6:51 pm

    Thank you

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